नोएडा प्राधिकरण की सबसे चर्चित वाणिज्यिक परियोजनाओं में से एक सेक्टर-98 का ‘मॉल ऑफ नोएडा’ अब बड़े घोटाले के रूप में उभर रहा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस प्रोजेक्ट की गहन जांच शुरू कर दी है, जिसमें जमीन आवंटन में कथित अनियमितताएं, भारी भरकम बकाया राशि न चुकाने और निवेशकों के साथ कथित धोखाधड़ी के गंभीर आरोप शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, सिक्का ग्रुप द्वारा विकसित इस परियोजना में नोएडा प्राधिकरण का लगभग 800 करोड़ रुपये का बकाया है, जो 17 साल से लंबित है। बिल्डर ने प्राधिकरण से बेहद कम कीमत पर जमीन हासिल की, लेकिन न तो शेष राशि चुकाई और न ही परियोजना को समय पर पूरा किया। अब CBI की जांच में यह मामला और गंभीर रूप लेता दिख रहा है।
प्रोजेक्ट की पृष्ठभूमि और अनियमितताएं
वर्ष 2009 में नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-98 में 22,000 वर्ग मीटर का प्लॉट एक्सपैंशन कंस्ट्रक्शन प्रा. लि. को मात्र 109 करोड़ रुपये में आवंटित किया था। बिल्डर ने सिर्फ 10 प्रतिशत राशि जमा की। 2011 में इस प्लॉट को दो हिस्सों (C-1A और C-1B) में बांट दिया गया। एक हिस्सा थ्री सी कॉम्प्लेक्स और दूसरा ग्रेनाइट हिल्स नाम से जाना गया।बाद में सिक्का ग्रुप को ग्रेनाइट हिल्स वाले हिस्से की जमीन आपसी समझौते के तहत ट्रांसफर कर दी गई, लेकिन इस बिक्री या ट्रांसफर से जुड़े कोई दस्तावेज नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय में दर्ज नहीं हैं। प्राधिकरण के वाणिज्यिक विभाग के दो अधिकारियों से सोमवार को CBI मुख्यालय दिल्ली में लगभग तीन घंटे पूछताछ की गई। जांच एजेंसी ने परियोजना से संबंधित सभी दस्तावेज तलब किए हैं। सूत्र बताते हैं कि दस्तावेजों की कमी के कारण प्राधिकरण अब तक बकाया वसूल नहीं कर पाया। बिल्डर पक्ष का कहना है कि जमीन मूल रूप से किसानों की थी और NGT ने 2011 में निर्माण पर रोक लगा दी थी। कोविड काल में छूट मांगी गई, लेकिन राहत नहीं मिली।
निवेशकों के साथ कथित ठगी
CBI जांच का एक बड़ा पहलू निवेशकों से जुड़ा है। आरोप है कि सिक्का ग्रुप ने प्रोजेक्ट में दुकानें, ऑफिस और कमर्शियल स्पेस बेचकर रकम जुटाई, लेकिन कई मामलों में पैसा अन्य प्रोजेक्ट्स में डायवर्ट कर दिया गया। RERA के तहत देय राशि भी नहीं जमा की गई, जिसके चलते 2022 में ग्रुप के सेक्टर-98 और ग्रेटर नोएडा वेस्ट के कार्यालय सील कर दिए गए थे।यह मामला नोएडा के रियल एस्टेट सेक्टर में बड़े स्तर पर हो रहे अनियमितताओं की श्रृंखला का हिस्सा लगता है। हाल के वर्षों में नोएडा स्पोर्ट्स सिटी (9000 करोड़ रुपये का कथित घोटाला), विभिन्न बिल्डर प्रोजेक्ट्स में होमबायर्स ठगी और प्राधिकरण-बिल्डर मिलीभगत के कई मामले CBI व ED की जांच में हैं।
CBI की कार्रवाई और आगे क्या?
CBI ने नोएडा प्राधिकरण के नियोजन और लेखा विभागों को भी नोटिस जारी कर दस्तावेज पेश करने को कहा है। जांच में यदि प्राधिकरण अधिकारियों की मिलीभगत साबित होती है तो बड़े स्तर पर कार्रवाई हो सकती है। नोएडा प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “हम पूर्ण सहयोग कर रहे हैं। बकाया वसूली के लिए पहले भी कानूनी कदम उठाए गए थे, लेकिन दस्तावेजी कमी बाधा बनी। CBI जांच से सच्चाई सामने आएगी।” सिक्का ग्रुप की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह न केवल सिक्का ग्रुप बल्कि पूरे नोएडा प्राधिकरण की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करेगा।
नोएडा के रियल एस्टेट में सुधार की मांग: होमबायर्स और निवेशक संगठन CBI जांच का स्वागत कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि सभी पुराने आवंटनों की समीक्षा हो। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI की यह जांच नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का संकेत दे रही है।अभी जांच चल रही है।

