“मैं फंस गई हूं यार, तू मत फंसना”, और 15 मिनट बाद आ गई मौत की खबर, ससुराल का पलटवार, ‘ड्रग्स लेती थीं त्विशा’

शादी के 5 महीने में ही खत्म हुई त्विशा की जिंदगी, दहेज हत्या या आत्महत्या? रिटायर्ड जज की बहू की मौत ने पूरे देश को झकझोरा, नोएडा की बेटी, ‘मिस पुणे’ का खिताब जीतने वाली, एमबीए की डिग्री हासिल करने वाली त्विशा शर्मा की जिंदगी 12 मई 2026 की रात एक ऐसे घर में खत्म हो गई, जिसे उसने महज पाँच महीने पहले अपना घर माना था। भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल की छत के सरिये से लटकी मिली 31 वर्षीय त्विशा की मौत अब एक राष्ट्रीय विवाद बन चुकी है जिसके एक तरफ है एक परिवार का टूटा हुआ दर्द, और दूसरी तरफ है एक ऐसा ससुराल जहाँ सास रिटायर्ड जज हैं और पति वकील।

कौन थीं त्विशा शर्मा?

त्विशा शर्मा एक 33 वर्षीया पूर्व सौंदर्य प्रतियोगिता विजेता और एमबीए ग्रेजुएट थीं। उन्होंने सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से बीबीए और नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज से एमबीए किया था। दिल्ली और मुंबई में उन्होंने मार्केटिंग और कम्युनिकेशन के क्षेत्र में काम किया था। जिंदगी में हर मुकाम पर आगे बढ़ने वाली इस बेटी को नहीं पता था कि उनकी सबसे बड़ी परीक्षा उनका अपना घर बनेगा।

मुलाकात से शादी तक का सफर

डेटिंग ऐप के जरिए साल 2024 में त्विशा की मुलाकात वकील समर्थ सिंह से हुई थी, जिसके बाद दिसंबर 2025 में दोनों का प्रेम विवाह हुआ। शादी के बाद त्विशा भोपाल आ गईं। परिवार के अनुसार, शुरुआत में वे खुश नजर आती थीं, लेकिन जल्द ही ससुराल में उनकी परेशानियाँ शुरू हो गईं।

आखिरी संदेश: दर्द की दास्तान

व्हाट्सएप पर अपनी माँ के साथ हुई बातचीत में त्विशा ने 30 अप्रैल को लिखा था “क्यों भेजा मुझे यहाँ, ये यहाँ बात ही नहीं कर रहा है।” कुछ दिन बाद उन्होंने लिखा “मेरा जीवन नरक हो गया है मम्मी।”  त्विशा ने एक जगह यह भी लिखा था  “ये लोग बहुत निर्दयी हैं, समर्थ तो ठीक से मुझसे बात तक नहीं करता।”  मौत से कुछ दिन पहले 7 मई को अपनी एक सहेली को उन्होंने लिखा — “शादी की खुजली में शादी मत करना, सोच समझकर आगे बढ़ना।” और फिर वो आखिरी संदेश आया  “I am trapped bro, तू मत फंसना।”

12 मई की वो काली रात

त्विशा के पिता नवनिधि शर्मा के अनुसार, उन्होंने घटना की रात अपनी बेटी से करीब 30 मिनट बात की थी, जिसमें त्विशा ने ससुराल में हो रहे उत्पीड़न की बात बताई। उनके भाई, मेजर हर्षित शर्मा ने बताया कि रात करीब 10:05 बजे त्विशा ने माँ को रोते हुए फोन किया, लेकिन पति के कमरे में आते ही फोन अचानक कट गया। इसके बाद त्विशा, उनके पति समर्थ और सास गिरीबाला सिंह — किसी का भी फोन नहीं उठा। और महज 15 मिनट बाद आई वो खबर, जिसने पूरे परिवार को तोड़ दिया — त्विशा की सांसें बंद हो चुकी थीं।

परिवार के गंभीर आरोप, त्विशा के परिवार ने कई संगीन आरोप लगाए हैं:

जबरन गर्भपात: सास गिरीबाला सिंह ने खुद अपनी जमानत अर्जी में माना कि 17 अप्रैल 2026 को त्विशा को पहली बार अपने गर्भवती होने की जानकारी हुई। त्विशा के भाई का आरोप है कि बच्चे को ‘नाजायज’ बताते हुए मौत से एक हफ्ते पहले जबरन गर्भपात कराया गया।

दहेज का दबाव: परिवार का कहना है कि त्विशा के पिता ने उन्हें ₹20 लाख के शेयर इन्वेस्टमेंट दिए थे, और ससुराल वाले उन्हें अपने नाम ट्रांसफर करने का दबाव बना रहे थे। परिजनों ने यह भी सवाल उठाया कि जो पैसे ट्रांसफर हुए, वे कहाँ गए — जबकि त्विशा बाद में उनसे पैसे माँग रही थीं।

जानबूझकर देरी: परिवार का आरोप है कि मृत्यु के बाद उन्हें ठीक से त्विशा का शव तक नहीं देखने दिया गया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उठे सवाल

सहायक पुलिस आयुक्त राजनीश कश्यप काउल ने पुष्टि की कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण ‘एंटी-मॉर्टम हैंगिंग’ (जीवित अवस्था में फाँसी) बताया गया है। साथ ही रिपोर्ट में कई पूर्व-मृत्यु चोटों के निशान भी मिले हैं, जिससे मामले में संदेह और गहरा हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस रस्सी या सामग्री से कथित तौर पर फाँसी दी गई, वह प्रारंभिक पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों को नहीं सौंपी गई — जबकि फोरेंसिक प्रक्रिया के अनुसार गले की चोटों से उसकी तुलना अनिवार्य होती है। नाखूनों के सैंपल डीएनए जाँच के लिए सुरक्षित रखे गए हैं।

ससुराल का पलटवार: ‘ड्रग्स लेती थीं त्विशा’

सास गिरीबाला सिंह की जमानत अर्जी में दावा किया गया कि त्विशा मानसिक रूप से संघर्ष कर रही थीं, मनोचिकित्सीय उपचार ले रही थीं और कथित तौर पर नशे की लत से जूझ रही थीं। अर्जी में गर्भावस्था की जटिलताओं को भी कैनाबिस के सेवन से जोड़ने की कोशिश की गई और मौत को मानसिक तनाव से उपजी आत्महत्या बताया गया। त्विशा के परिवार ने इन दावों को मृतका के चरित्र की हत्या बताते हुए पूरी तरह खारिज किया है।

कानूनी मोर्चे पर ताजा हालात

मामले की गंभीरता और बढ़ते दबाव को देखते हुए भोपाल पुलिस ने 6 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) गठित किया है। सहायक पुलिस आयुक्त राजनीश कश्यप को इसका प्रमुख बनाया गया है और टीम में एक महिला पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। सास गिरीबाला सिंह को भोपाल की अदालत से अग्रिम जमानत मिल चुकी है। पति समर्थ सिंह अभी भी फरार हैं और पुलिस उनका पासपोर्ट निलंबित कराने की कार्रवाई कर रही है, ताकि वे देश से बाहर न जा सकें। आज यानी 18 मई को समर्थ की अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई होनी है। परिजनों का आरोप है कि SIT में उन्हीं अधिकारियों को शामिल किया गया है जो शुरुआत में उनकी शिकायत पर FIR दर्ज करने में देरी कर रहे थे।

CM आवास के बाहर धरना, देशभर में आक्रोश

त्विशा के पिता नवनिधि शर्मा और भाई (मेजर हर्षित शर्मा) मुख्यमंत्री मोहन यादव के आवास के बाहर धरने पर बैठे। परिवार की माँग है कि शव का पोस्टमार्टम दिल्ली AIIMS में दोबारा कराया जाए, केस मध्यप्रदेश से बाहर किसी निष्पक्ष एजेंसी को सौंपा जाए और पुलिस जाँच पर निगरानी रखी जाए। CM सचिवालय के अधिकारियों ने मुलाकात में माना कि मामले की गंभीरता को देखते हुए बाहरी एजेंसी से जांच की जरूरत हो सकती है।  त्विशा का शव अभी भी भोपाल AIIMS के मुर्दाघर में रखा है। परिवार का कहना है कि माँगें पूरी होने के बाद ही वे अंतिम संस्कार करेंगे। हाथरस से लेकर नोएडा तक, सोशल मीडिया पर #JusticeForTwisha ट्रेंड कर रहा है और देशभर में कैंडल मार्च निकाले जा रहे हैं।

परिवार की माँग न्याय या राख?

त्विशा की माँ रेखा शर्मा ने कहा, “हम चाहते हैं कि समर्थ सिंह और उसकी माँ दोनों को गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने मेरी बेटी को मारा।” पिता ने कहा कि उन्हें मध्यप्रदेश की न्याय व्यवस्था पर भरोसा नहीं रहा और वे उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत को चुनौती देंगे। यह मामला केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं है। यह उन तमाम सवालों का आईना है जो आज भी भारतीय समाज में अनुत्तरित हैं, कि क्या पढ़ी-लिखी, काबिल, स्वतंत्र महिला भी अपने ही घर में सुरक्षित नहीं है? क्या ‘प्रभावशाली’ आरोपियों के सामने कानून झुक जाता है? और क्या एक माँ-बाप की चीख इस व्यवस्था में सुनी जाएगी? जांच जारी है। न्याय का इंतजार है। और त्विशा का शव AIIMS भोपाल के मुर्दाघर में अभी भी इंसाफ की राह देख रहा है।

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