ग्रेटर नोएडा वेस्ट: विकास के नाम पर खतरे की दीवार सड़क के बीच खड़े यूनिपोल, उड़ती जहरीली धूल और पानी के लिए तरसते लोग, प्रशासन मौन

चौड़ीकरण का काम पूरा, बाधाएं अभी भी जिंदा महीनों बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

ग्रेटर नोएडा वेस्ट: ग्रेटर नोएडा वेस्ट जिसे एक आधुनिक, सुनियोजित शहर के रूप में विकसित किया जा रहा है इन दिनों विकास और लापरवाही के बीच की खाई का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। सड़क चौड़ीकरण के नाम पर शुरू हुए निर्माण कार्यों ने आम नागरिकों की ज़िंदगी को खतरे में डाल दिया है। चार मूर्ति चौक पर अंडरपास और सड़क निर्माण कार्य के चलते धूल का ऐसा तांडव मचा हुआ है कि आसपास की सोसाइटियों में रहने वाले बच्चे और बुजुर्ग सांस लेने को तड़प रहे हैं। इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक बात यह है कि जनप्रतिनिधि और प्रशासन, दोनों ने चुप्पी साध रखी है।

सड़क के बीच खड़ा यूनिपोल — हादसे का न्योता                                                                                                                                                

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में सड़क चौड़ीकरण का काम तो कर दिया गया, लेकिन सड़क के बीचोंबीच खड़े यूनिपोल (विशाल विज्ञापन होर्डिंग) और बिजली के पोल हटाने की जहमत किसी ने नहीं उठाई। इन यूनिपोलों के कारण वाहन चालकों को अचानक रुकना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ गया है। देश के अन्य शहरों में इस तरह के विशाल यूनिपोल और होर्डिंग जानलेवा साबित हो चुके हैं तेज आंधी में ये 40 फुट ऊंचे ढांचे भरभराकर गिरते हैं और खड़े वाहनों को नष्ट कर देते हैं। ऐसे में ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सड़कों पर बिना सुरक्षा उपाय के खड़े ये यूनिपोल एक दिन बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि 16-B की ओर यू-टर्न के पास बड़ा गड्डा महीनों से वैसे ही छोड़ा हुआ है। रात के अंधेरे में वाहन चालक इस गड्डे में गिरते हैं और दोपहिया वाहन सवारों के लिए तो यह जानलेवा बन चुका है।

धूल का जहर — PM 2.5 खतरनाक सीमा से ऊपर

निर्माण स्थलों पर जल छिड़काव के नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। स्थानीय पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार इलाके में PM 2.5 और PM 10 का स्तर खतरनाक सीमा से कहीं ऊपर पहुंच चुका है, जिससे बच्चे और बुजुर्ग अस्पताल के चक्कर लगाने को मजबूर हो रहे हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की टीमों ने ग्रेटर नोएडा में सड़क धूल से जुड़े 102 उल्लंघनों का पता लगाया है। इसके बावजूद ठेकेदार निर्माण स्थलों पर नियमित पानी का छिड़काव नहीं कर रहे और संबंधित अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। जनसुनवाई में पहुंचे नागरिकों ने बताया कि ATS नोबेलिटी और एम्स ग्रीन एवेन्यू को जोड़ने वाली सड़क आज भी कच्ची है, जिससे वाहनों के गुजरने पर भारी मात्रा में धूल उड़ती है और आसपास के इलाकों में प्रदूषण फैलता है।

पेड़ कट गए, हरियाली उजड़ी — गर्मी में पीने का पानी भी नसीब नहीं

सड़क चौड़ीकरण के दौरान बड़े पैमाने पर पेड़ काटे गए हैं। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हुआ है, बल्कि प्रचंड गर्मी में छाया भी समाप्त हो गई है। सड़क किनारे काम करने वाले मज़दूरों और राहगीरों को पीने का पानी तक नसीब नहीं हो रहा। निर्माण स्थलों पर न तो मज़दूरों के लिए पेयजल का इंतज़ाम है और न ही आम जनता के लिए।

जनसुनवाई में फूटा आक्रोश, अफ़सरों ने दिलाया झूठा भरोसा

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में आयोजित जनसुनवाई उस वक्त हंगामेदार हो गई जब क्षेत्र के निवासी अपनी लंबे समय से उपेक्षित समस्याओं को लेकर प्राधिकरण कार्यालय पहुंचे। टूटी-फूटी सड़कें, जलभराव, और कमजोर सुरक्षा व्यवस्था जैसी समस्याओं पर लोगों ने अधिकारियों के सामने खुलकर आक्रोश जाहिर किया, जिन्होंने जल्द कार्रवाई का भरोसा दिलाया। साल 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में भी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है।

₹256 करोड़ का बजट, पर ज़मीन पर नतीजा शून्य?

उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा बेल्ट की सड़कों के उन्नयन के लिए ₹256 करोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसमें समर्पित सड़क सुरक्षा सुधार भी शामिल हैं। अधिकारियों को कड़े गुणवत्ता मानकों का पालन करने और तय समय-सीमा के भीतर परियोजनाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन ग्रेटर नोएडा वेस्ट लंबे समय से विलंबित वादों की छाया में जीता रहा है  असली कसौटी यह है कि निर्माण की गुणवत्ता और क्रियान्वयन की गति क्या होगी।

विशेषज्ञों की राय

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान यदि बाधाओं को न हटाया जाए तो यह “विकास” नहीं, बल्कि नए खतरे खड़े करना है। निर्माण स्थलों पर साइनेज, बैरिकेड, रात में रिफ्लेक्टर और नियमित जल छिड़काव अनिवार्य होना चाहिए।

मांगें और सुझाव

निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क के बीच खड़े सभी यूनिपोल और होर्डिंग तत्काल हटाए जाएं, 16-B यू-टर्न के पास खड्डे की तत्काल मरम्मत हो, निर्माण स्थलों पर दिन में कम से कम दो बार पानी का छिड़काव अनिवार्य किया जाए, निर्माण क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था की जाए

ठेकेदारों पर उल्लंघन की स्थिति में जुर्माना लगाया जाए

अंत में एक सवाल: क्या सरकार और प्रशासन तब तक नहीं जागेंगे, जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए? ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लाखों निवासी इस सवाल का जवाब मांग रहे हैं।

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