करोड़ों के फ्लैट, नलों से कीड़े वाला पानी! नोएडा की सुपरनोवा सोसाइटी में 350 परिवार परेशान

नोएडा। उत्तर प्रदेश की हाईटेक सिटी नोएडा में करोड़ों रुपये खर्च कर फ्लैट खरीदने वाले परिवारों के सामने ऐसा संकट खड़ा हो गया है, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की होगी। सेक्टर-94 स्थित सुपरटेक सुपरनोवा सोसाइटी में रहने वाले सैकड़ों परिवार पिछले दिनों से गंदे, बदबूदार और कीड़ों वाले पानी की समस्या से परेशान हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक नलों से पीले-काले रंग का पानी निकलने के साथ उसमें कीड़े दिखाई देने की शिकायतें सामने आई हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन लोगों ने नोएडा की इस हाईराइज परियोजना में करोड़ों रुपये खर्च कर घर खरीदा, उन्हें रोजमर्रा की सबसे बुनियादी जरूरत स्वच्छ पानी के लिए भी संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है? रिपोर्टों के अनुसार समस्या से करीब 350 परिवार प्रभावित हैं और कई निवासी पीने तथा खाना बनाने के लिए पैकेज्ड पानी खरीदने को मजबूर हैं।

नलों से निकल रहा पीले-काले रंग का बदबूदार पानी

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक सुपरनोवा में रहने वाले कुछ लोगों ने नलों से आने वाले पानी को पीले-काले रंग का, बदबूदार और कीड़ों से भरा बताया है। एक निवासी ने पानी की स्थिति देखकर चिंता जताई कि जिस घर को उन्होंने बेहतर जीवन के सपने के साथ खरीदा था, वहां अब पानी की गुणवत्ता ही सबसे बड़ी समस्या बन गई है।

जागरण की रिपोर्ट में भी सोसाइटी के करीब 350 परिवारों के गंदे और कीड़े वाले पानी से परेशान होने तथा बच्चों में त्वचा संबंधी परेशानी की शिकायतों का उल्लेख किया गया है। हालांकि स्वास्थ्य पर पानी के प्रभाव की चिकित्सकीय पुष्टि अलग-अलग मामलों में जांच के बाद ही की जा सकती है।

आखिर क्यों बंद हुई गंगाजल की सप्लाई?

इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी गंगाजल आपूर्ति बंद होना बताई जा रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सुपरनोवा में पहले गंगाजल की आपूर्ति होती थी, लेकिन पानी के बकाये को लेकर यह सप्लाई करीब दो साल पहले बंद हो गई थी। रिपोर्ट में पूर्व AOA पदाधिकारी के हवाले से बताया गया कि बकाया राशि बिल्डर से जुड़ी थी और इस कारण सोसाइटी को पानी की समस्या का सामना करना पड़ा।

सितंबर की शुरुआत में हिन्दुस्तान ने रिपोर्ट किया था कि गंगाजल कनेक्शन बकाया बिल के कारण काटा गया और AOA के अनुसार पानी का बकाया करीब 72 लाख रुपये तक पहुंच गया था।

वहीं नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट में मूल बकाया करीब 42 लाख रुपये और ब्याज जुड़ने के बाद कुल रकम करीब 72 लाख रुपये होने की जानकारी दी गई। यानी अलग-अलग रिपोर्टों में बकाये की राशि को लेकर विवरण अलग है, लेकिन गंगाजल कनेक्शन के बकाये से प्रभावित होने की बात कई रिपोर्टों में सामने आई है।

बोरवेल के पानी पर निर्भरता, सॉफ्टनर प्लांट भी खराब

गंगाजल की सप्लाई बंद होने के बाद सोसाइटी में भूजल यानी बोरवेल के पानी पर निर्भरता बढ़ गई। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार भूजल को शोधित करके घरों तक पहुंचाने वाला सॉफ्टनर प्लांट खराब बताया गया है और इसकी वजह से पानी की गुणवत्ता को लेकर समस्या बढ़ी। रिपोर्ट में प्लांट के करीब चार महीने से खराब होने की बात कही गई है।

यही स्थिति अब सवाल खड़े कर रही है कि यदि वैकल्पिक जलस्रोत का इस्तेमाल किया जा रहा था तो उसके ट्रीटमेंट सिस्टम की नियमित देखरेख क्यों नहीं हुई? क्या जल शोधन व्यवस्था की समय-समय पर जांच की गई? और यदि जांच हुई थी तो खराबी सामने आने के बाद उसे तत्काल ठीक क्यों नहीं किया गया?

करोड़ों के फ्लैट, फिर भी बोतलबंद पानी खरीदने की मजबूरी

सुपरनोवा को नोएडा की प्रमुख हाईराइज परियोजनाओं में गिना जाता है। यहां रहने वाले लोगों के सामने अब ऐसी स्थिति है कि घर के नल से आने वाले पानी पर भरोसा करना मुश्किल हो रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कई परिवारों को पीने के साथ-साथ रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी वैकल्पिक पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है।

इस स्थिति ने एक बार फिर नोएडा की हाईराइज सोसाइटियों में बुनियादी सुविधाओं और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। महंगे फ्लैट, आधुनिक टावर और लग्जरी सुविधाओं के दावों के बीच यदि स्वच्छ पानी जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं है तो इसका सीधा असर निवासियों के भरोसे और जीवन की गुणवत्ता पर पड़ता है।

AOA के सामने भी बड़ी चुनौती

निवासियों की ओर से सोसाइटी की Apartment Owners Association (AOA) के समक्ष शिकायतें किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार निवासी चाहते हैं कि गंगाजल की आपूर्ति दोबारा शुरू हो और बकाये से जुड़े विवाद का समाधान किया जाए, ताकि वर्तमान जल संकट खत्म हो सके।

यहां सवाल केवल पानी की गुणवत्ता का नहीं बल्कि जिम्मेदारी तय करने का भी है। यदि बिल्डर से जुड़ा बकाया भुगतान विवाद का कारण है, तो उसका बोझ मौजूदा फ्लैट मालिकों पर किस सीमा तक डाला जा सकता है? दूसरी ओर, यदि सोसाइटी वैकल्पिक जलस्रोत पर निर्भर है तो उसके ट्रीटमेंट और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है? इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है।

नोएडा प्राधिकरण की भूमिका पर भी नजर

सुपरनोवा का पानी संकट केवल सोसाइटी प्रबंधन तक सीमित मामला नहीं है। गंगाजल आपूर्ति और बकाया भुगतान से जुड़े मामले में नोएडा प्राधिकरण से भी समाधान की उम्मीद की जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक AOA की ओर से अधिकारियों के समक्ष गंगाजल आपूर्ति बहाल कराने की मांग रखी गई है।

नोएडा में पहले भी अलग-अलग सेक्टरों में पानी की गुणवत्ता, कम दबाव और आपूर्ति से जुड़ी शिकायतें सामने आती रही हैं। अगस्त 2026 में हिन्दुस्तान टाइम्स ने कई सेक्टरों के निवासियों द्वारा कम दबाव, बदबूदार और कीचड़युक्त पानी की शिकायतों की रिपोर्ट की थी।

इस पृष्ठभूमि में सुपरनोवा का मामला और गंभीर हो जाता है, क्योंकि यहां समस्या केवल कम दबाव या सीमित आपूर्ति की नहीं बल्कि पानी में कथित तौर पर कीड़े दिखाई देने तक पहुंच गई है।

पानी की जांच और जिम्मेदारी तय करना जरूरी

ऐसे मामले में केवल शिकायतों या वायरल वीडियो के आधार पर पानी को स्वास्थ्य के लिए खतरनाक घोषित करना उचित नहीं होगा। लेकिन नलों से कीड़े निकलने और दुर्गंधयुक्त पानी की शिकायतें इतनी गंभीर हैं कि जल के नमूने लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से जांच कराना जरूरी हो जाता है।

साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि सोसाइटी में पानी की टंकी, पाइपलाइन, बोरवेल, सॉफ्टनर/ट्रीटमेंट प्लांट और वितरण व्यवस्था की आखिरी बार कब जांच हुई थी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी होगा।

अब सबसे बड़ा सवाल—स्वच्छ पानी कब मिलेगा?

सुपरनोवा के निवासियों की समस्या का स्थायी समाधान केवल टैंकर या बोतलबंद पानी उपलब्ध कराना नहीं हो सकता। गंगाजल आपूर्ति से जुड़े बकाये का समाधान, वैकल्पिक जल शोधन प्रणाली की मरम्मत, पाइपलाइन और स्टोरेज सिस्टम की जांच तथा पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी—इन सभी पहलुओं पर एक साथ काम करना होगा।

नोएडा की पहचान देश के आधुनिक और विकसित शहरों में होती है। ऐसे में सेक्टर-94 की इस हाईराइज सोसाइटी में करोड़ों रुपये के घर खरीदने वाले परिवारों को यदि अपने ही घर के नल से आने वाले पानी को इस्तेमाल करने से पहले डरना पड़े, तो यह केवल एक सोसाइटी की समस्या नहीं बल्कि शहरी जल प्रबंधन और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर सवाल भी है।

अब देखना होगा कि AOA, प्राधिकरण और संबंधित प्रबंधन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाते हैं और सुपरनोवा के सैकड़ों परिवारों को सुरक्षित एवं स्वच्छ पानी की नियमित आपूर्ति कब तक बहाल होती है।

 

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