Delhi Police CJP protest: नई दिल्ली, दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर मंतर प्रदर्शन और उसके दौरान हुई हिंसा से जुड़े फर्जी, भ्रामक तथा एआई-जनरेटेड पोस्ट्स को हटाने के लिए कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को पत्र लिखा है। पुलिस का आरोप है कि इन पोस्ट्स में एआई से बनी गाली-गलौज वाली सामग्री, डीपफेक वीडियो, एडिटेड तस्वीरें और गलत सूचनाएं फैलाई जा रही थीं, जो सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकती थीं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन से जुड़े ऑनलाइन एक्टिविटी की जांच के दौरान सैकड़ों सोशल मीडिया पोस्ट्स को फ्लैग किया गया है। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को निशाना बनाने वाली आपत्तिजनक भाषा वाली सामग्री भी शामिल है। तीन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर आपत्तिजनक भाषा और आक्रामक टिप्पणियों वाले कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया गया है। कई फ्लैग किए गए वीडियो, कमेंट्स और पोस्ट्स पहले ही हटाए जा चुके हैं।
इससे पहले पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि सीजेपी प्रदर्शन के दौरान एक समन्वित गलत सूचना अभियान चलाया जा रहा था। इसमें एआई-जनरेटेड वीडियो, डीपफेक, फर्जी पोस्ट्स और एडिटेड फोटोग्राफ्स का इस्तेमाल कर गलत आख्यान गढ़ा जा रहा था। पुलिस ने 400 से अधिक (कुछ रिपोर्ट्स में 450 से 480) पाकिस्तान-लिंक्ड सोशल मीडिया हैंडल्स की पहचान कर उन्हें ब्लॉक कर दिया है। ये अकाउंट्स पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी फर्जी खबरें फैलाने में सक्रिय रहे थे।
जंतर मंतर पर कई हफ्तों से चल रहे प्रदर्शन के दौरान खासकर इंस्टाग्राम पर बड़ी संख्या में पोस्ट्स और वीडियो शेयर किए गए। पुलिस ने इनमें से कई को झूठा, एडिटेड या जनता को गुमराह करने वाला पाया। पुलिस ने कम से कम 15 फर्जी दावों का खंडन भी किया है, जिनमें महिला प्रदर्शनकारी की मौत, 12 वर्षीय बच्ची पर हमला, पुलिस द्वारा छर्रे या नाखून लगे डंडों का इस्तेमाल और अन्य हिंसक घटनाओं के दावे शामिल थे। पुलिस ने साफ किया कि प्रदर्शन के दौरान किसी की मौत नहीं हुई।
सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के तहत नोटिस जारी किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम चौबीसों घंटे निगरानी रख रही है और फर्जी, डीपफेक तथा अवैध कंटेंट पोस्ट करने वाले हैंडल्स को नोटिस भेज रही है। एक वायरल डीपफेक वीडियो में दिल्ली पुलिस के एक डीसीपी के इस्तीफे का दावा किया गया था, जिसे पुलिस ने पूरी तरह फर्जी और एआई-जनरेटेड बताया। सीजेपी का 36 दिनों का प्रदर्शन 20 जुलाई को संसद चलो मार्च के दौरान हिंसा के बाद तनावपूर्ण रहा। बाद में सरकार ने मांगें मान लीं, जिसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शामिल था, और प्रदर्शन समाप्त हो गया। पुलिस ने हिंसा से जुड़े 15 एफआईआर दर्ज किए थे, जिन्हें बाद में वापस लेने का फैसला किया गया। पुलिस व्यापक साजिश की भी जांच कर रही है।
दिल्ली पुलिस ने जनता से अपील की है कि किसी भी वायरल पोस्ट, वीडियो या तस्वीर को शेयर करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें। गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर गलत सूचना और एआई दुरुपयोग के खिलाफ पुलिस की निरंतर निगरानी का हिस्सा है।

