भारत की परीक्षा प्रणाली इन दिनों अभूतपूर्व संकट से घिरी है। एक तरफ NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में NTA को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करना पड़ा, तो दूसरी तरफ CBSE की नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली ने लाखों छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को लेकर गहरा विवाद खड़ा कर दिया है। इन दोनों संकटों की कुल आर्थिक चोट ₹1,000 करोड़ से अधिक आँकी जा रही है और इसे चुका रहे हैं देश के आम छात्र, उनके परिवार और करदाता।
NEET-UG 2026: पेपर लीक, रद्दीकरण और सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
3 मई 2026 को NTA ने NEET-UG 2026 परीक्षा आयोजित की थी। लेकिन महज नौ दिन बाद, 12 मई को, परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र परिचालित होने के साक्ष्य सामने आने के बाद इसे रद्द कर दिया गया। यह लीक कथित तौर पर महाराष्ट्र के नासिक से शुरू हुई और हरियाणा होते हुए आंध्र प्रदेश व राजस्थान तक सॉल्वर गैंग और कोचिंग नेटवर्क के माध्यम से पहुँची। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए टिप्पणी की कि यह “दुखद” है कि NTA ने 2024 के पेपर लीक प्रकरण से कोई सबक नहीं लिया। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और अलोक आराधे की पीठ ने NTA को 28 मई तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने याचिका दायर कर NTA के पुनर्गठन अथवा उसे एक मजबूत और स्वायत्त संस्था से प्रतिस्थापित करने की माँग की है। याचिकाकर्ताओं ने एक उच्चस्तरीय स्वतंत्र निगरानी समिति के गठन की भी माँग रखी है, जिसके प्रमुख किसी सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश हों और साइबर सुरक्षा व फोरेंसिक विशेषज्ञ भी उसमें शामिल हों।
NTA का हलफनामा: सुधारों का आश्वासन
NTA ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद उसने व्यापक संरचनात्मक और सुरक्षा सुधार किए हैं। NTA के हलफनामे में कहा गया कि एक उच्चस्तरीय स्टीयरिंग कमेटी (HPSC) ने 17 अप्रैल 2026 को हुई बैठक में परीक्षा पूर्व, परीक्षा के दौरान और परीक्षा पश्चात के व्यापक सुरक्षा उपायों की सिफारिश की है। इनमें अनिवार्य CCTV जाँच और 90 दिनों तक फुटेज का संरक्षण, परीक्षा केंद्रों पर मॉक ड्रिल, और बिजली बैकअप प्रणालियों का सत्यापन शामिल है।
HPSC परीक्षा के बाद पुनः बैठक करेगी और स्वास्थ्य मंत्रालय के परामर्श से यह तय करेगी कि भविष्य में NEET परीक्षाएँ कम्प्यूटर-आधारित (CBT) मोड में ली जाएँ या पेन-पेपर (PPT) मोड में। पुनर्गठन की प्रक्रिया में NTA में 16 नए वरिष्ठ पद भी सृजित किए गए हैं, जिनमें निदेशक और संयुक्त निदेशक स्तर के पद शामिल हैं। NEET 2026 की परीक्षा 21 जून 2026 (रविवार) को निर्धारित की गई है। किसी भी छात्र को नए सिरे से पंजीकरण नहीं करना होगा और कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
CBSE का डिजिटल संकट: जब Physics की उत्तर पुस्तिका किसी और की निकली
NEET के तूफान के बीच CBSE भी अपने सबसे बड़े तकनीकी विवाद में फँस गई। 12वीं कक्षा के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने CBSE के आधिकारिक पोर्टल पर जब अपनी Physics की उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी देखी, तो उसमें किसी दूसरे छात्र की उत्तर पुस्तिका थी लिखावट तक अलग थी। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो CBSE को सार्वजनिक रूप से माफी माँगनी पड़ी। इस नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को डिजिटलीकरण के नाम पर लागू किया गया था, लेकिन इसने 2026 बैच को गंभीर परेशानियों में डाल दिया। हजारों छात्रों ने पाया कि उनकी पूरक उत्तर पुस्तिकाओं के स्कैन जिनमें 22 अंकों तक के उत्तर थे डिजिटल सिस्टम में पूरी तरह गायब थे, यानी उनका मूल्यांकन ही नहीं हुआ। इन खामियों के चलते 2026 में 12वीं का परिणाम 3.19 प्रतिशत गिरकर 85.20 प्रतिशत रह गया — जो हाल के वर्षों का सबसे कम प्रदर्शन है। इस विवाद के बाद 4,04,319 छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाएँ देखने के लिए आवेदन किया और कुल 11,31,961 उत्तर पुस्तिकाओं की माँग की गई यह CBSE के इतिहास में सबसे बड़ा पुनर्मूल्यांकन अभियान बन गया। कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने CBSE की OSM प्रणाली में “बड़े पैमाने पर छेड़छाड़” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 18.5 लाख छात्रों का भविष्य दाँव पर है और उन्हें सच बताया जाना चाहिए।
₹1,000 करोड़ की चोट: कौन भर रहा है यह कीमत?
वित्त वर्ष 2023-24 में अकेले NTA की फीस आय लगभग ₹1,065 करोड़ थी और खर्च लगभग ₹1,020 करोड़। जब परीक्षा रद्द होती है तो पूरा वित्तीय चक्र फिर से शुरू हो जाता है। प्रति छात्र मात्र ₹1,000 से ₹2,000 की औसत लागत (यात्रा, आवास, तैयारी) के रूढ़िवादी अनुमान से भी देशभर में घरेलू खर्च ₹300 करोड़ से अधिक पहुँच जाता है। इसमें पुनर्परीक्षा की प्रशासनिक लागत, सुरक्षा खर्च और सरकारी तंत्र का बोझ जोड़ें तो कुल आँकड़ा ₹1,000 करोड़ के पार चला जाता है।देश में पिछले 11 वर्षों में 100 से अधिक परीक्षा लीक की घटनाएँ दर्ज हुई हैं, जिनसे लगभग 6-7 करोड़ अभ्यर्थी प्रभावित हुए और अनुमानित ₹50,000 करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ।
व्यवस्था पर सवाल, छात्रों में आक्रोश
वर्षों से छात्रों को बताया गया कि बोर्ड परीक्षाएँ निष्पक्ष और मेधा-आधारित हैं। लेकिन 2026 में जब छात्रों ने पोर्टल खोला तो उन्हें अपठनीय स्कैन, बिना जाँचे उत्तर, गायब पन्ने और किसी दूसरे छात्र की उत्तर पुस्तिका मिली। उस एक पल ने इस यकीन को चकनाचूर कर दिया। सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 के तहत 3 से 10 साल की जेल और ₹1 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन सजा की दर मात्र 5-10 प्रतिशत ही अनुमानित है। NEET की पेपर लीक और CBSE की डिजिटल विफलता दोनों अलग-अलग संस्थाओं की अलग-अलग चूकें हैं, लेकिन इनका दर्द एक ही है: भारत के करोड़ों होनहार छात्रों का भरोसा टूटा है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, CBI जाँच और NTA के सुधारों के वादे तब तक पर्याप्त नहीं होंगे जब तक जवाबदेही तय नहीं होती और व्यवस्था की जड़ से मरम्मत नहीं होती।

