यमुना प्राधिकरण के गांवों में अब बिना नक्शा पास कराए नहीं होगा निर्माण, लागू होगी मानचित्र स्वीकृति की अनिवार्यता

Yamuna Authority:

ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के अधिसूचित गांवों में बेतरतीब और अनियोजित निर्माण पर लगाम लगाने की तैयारी है। प्राधिकरण इन गांवों में भवन निर्माण से पहले मानचित्र स्वीकृति को अनिवार्य करने जा रहा है। नीति लागू करने से पहले ग्रामीणों से सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएंगी। उनके निस्तारण के बाद प्रस्ताव को प्राधिकरण बोर्ड की मंजूरी के लिए रखा जाएगा और स्वीकृति मिलने पर नीति लागू होगी।

आबादी का बढ़ता दबाव बना बड़ी वजह

यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में आबादी का दबाव लगातार बढ़ रहा है। क्षेत्र में उद्योगों की स्थापना के साथ बड़ी संख्या में कामगार और कर्मचारी यहां पहुंच रहे हैं। इनकी आवासीय जरूरतों को पूरा करने और किराये से आमदनी के लिए गांवों में बिना किसी योजना के मकान, कमरे और बहुमंजिला इमारतें बनाई जा रही हैं।

अधिकारियों के अनुसार, मानचित्र स्वीकृति की व्यवस्था न होने से निर्माण में न तो सड़क की चौड़ाई का ध्यान रखा जा रहा है और न ही सुरक्षा मानकों का। इससे गांवों में संकरी गलियां, जलभराव, बिजली-पानी की किल्लत और सीवरेज जैसी समस्याएं बढ़ने की आशंका है।

बुनियादी ढांचे पर पड़ सकता है असर

बेतरतीब निर्माण से गांवों के बुनियादी ढांचे पर भारी दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। आबादी बढ़ने पर सड़क, पेयजल, सीवर, बिजली और साफ-सफाई जैसी सुविधाओं पर बोझ बढ़ेगा। अनियोजित ढंग से बनी इमारतों में आपातकालीन स्थिति में राहत और बचाव कार्य भी कठिन हो सकता है। प्राधिकरण का मानना है कि समय रहते नियम बनाकर ही गांवों का व्यवस्थित विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।

नक्शा पास कराने से क्या होगा फायदा

मानचित्र स्वीकृति अनिवार्य होने से निर्माण तय मानकों के अनुसार होगा। इसके संभावित लाभ इस प्रकार हैं:

  • सड़कों और गलियों की चौड़ाई का ध्यान रखा जाएगा, जिससे आवागमन सुगम रहेगा।
  • भवनों की ऊंचाई, क्षेत्रफल और सेटबैक जैसे मानक तय होंगे।
  • अग्नि सुरक्षा और भूकंप-रोधी निर्माण पर जोर रहेगा।
  • सीवर, पानी और बिजली जैसी सुविधाओं की योजना बेहतर ढंग से बन सकेगी।
  • अवैध निर्माण पर निगरानी और कार्रवाई आसान होगी।

ग्रामीणों से मांगे जाएंगे सुझाव और आपत्तियां

प्राधिकरण नीति को एकतरफा लागू करने के बजाय ग्रामीणों की राय को महत्व देगा। प्रस्तावित व्यवस्था का प्रारूप सार्वजनिक कर निर्धारित अवधि में सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। ग्रामीण अपनी बात लिखित रूप में प्राधिकरण को दे सकेंगे। प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार के बाद आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। इसके बाद अंतिम प्रस्ताव बोर्ड बैठक में स्वीकृति के लिए रखा जाएगा।

बोर्ड की मंजूरी के बाद लागू होगी नीति

बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद ही अधिसूचित गांवों में मानचित्र स्वीकृति की व्यवस्था प्रभावी होगी। इसके बाद इन गांवों में नया निर्माण कराने वाले लोगों को पहले प्राधिकरण से नक्शा पास कराना होगा। प्राधिकरण का कहना है कि इसका उद्देश्य ग्रामीणों पर बंदिश लगाना नहीं, बल्कि गांवों को सुनियोजित, सुरक्षित और सुविधा संपन्न बनाना है।

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