राहत की बड़ी खबर, सरकार ने कमर्शियल खरीदारों के लिए पेट्रोल-डीजल पर लगी पाबंदियां हटाईं, 1 जुलाई से लागू होगी पुरानी व्यवस्था

मिडिल ईस्ट संकट में सुधार के बाद बड़ा फैसला, इससे पहले 90 दिन के लिए लगाई गई थी रिटेल आउटलेट्स से बल्क खरीद पर रोक

केंद्र सरकार ने एक जुलाई से कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और इंस्टीट्यूशनल खरीदारों के लिए पेट्रोल पंपों से पेट्रोल-डीजल खरीदने पर लगी पाबंदियां पूरी तरह हटा ली हैं। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण ग्लोबल एनर्जी ट्रेड में आई रुकावट के दौरान घरेलू फ्यूल सप्लाई को सुरक्षित रखने के मकसद से ये इमरजेंसी उपाय लागू किए गए थे, जिन्हें अब हालात सामान्य होने पर वापस ले लिया गया है।

क्यों लगाई गई थी पाबंदी

बता दें कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 11 जून को मोटर स्पिरिट और हाई-स्पीड डीजल (रिटेल आउटलेट्स के जरिए सप्लाई के अस्थायी नियमन) आदेश, 2026 जारी कर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और फ्यूल रिटेलर्स को 90 दिनों तक रिटेल आउटलेट्स से बल्क खरीद पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। इसकी वजह यह थी कि रिटेल और बल्क बिक्री कीमतों में अंतर के कारण इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल उपभोक्ता पेट्रोल पंपों की ओर शिफ्ट हो रहे थे दिल्ली में जहां पेट्रोल पंप पर डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर था, वहीं बल्क सप्लाई में इसकी कीमत 134.50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी। इस अंतर का फायदा उठाकर टेलीकॉम टावर और पावर जेनरेशन यूनिट जैसे बड़े उपभोक्ता सीधे आम पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदने लगे थे, जिससे आम जनता के लिए तय रिजर्व स्टॉक के डायवर्ज होने और स्थानीय किल्लत का खतरा पैदा हो गया था। पाबंदी के दौरान रिटेल आउटलेट्स पर डीजल की बिक्री सिर्फ वाहन के फ्यूल टैंक या पेसो (PESO) से मंजूर कंटेनरों तक सीमित कर दी गई थी, जिसमें प्रति ग्राहक या प्रति वाहन रोजाना अधिकतम 200 लीटर की लिमिट तय थी, और इस डीजल को आगे बेचने पर भी पूरी तरह रोक लगाई गई थी। सरकार के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां आम उपभोक्ताओं को महंगे क्रूड ऑयल के असर से बचाने के लिए पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर रोजाना करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही थीं। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में देश के 327 जिलों में डीजल की बिक्री में 10 फीसदी से ज्यादा और 80 जिलों में 30 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

LPG में पहले ही मिल चुकी थी राहत

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही सरकार कमर्शियल एलपीजी पर लगी इसी तरह की पाबंदियां हटा चुकी है। इसकी वजह घरेलू एलपीजी उत्पादन में सुधार और अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद आयातित एलपीजी कार्गो की उपलब्धता बेहतर होने को बताया गया था। पेट्रोलियम मंत्रालय ने तब यह भी कहा था कि यह फैसला राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्वच्छ और सुरक्षित ईंधन तक पहुंच बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पेट्रोल-डीजल पर पाबंदी हटाने का ताजा फैसला भी इसी सिलसिले की अगली कड़ी माना जा रहा है, जो वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लौटने का संकेत देता है।

आगे क्या बदलेगा

एक जुलाई से लागू नई व्यवस्था के तहत अब कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और इंस्टीट्यूशनल खरीदार बिना किसी रोक-टोक के सामान्य रिटेल पेट्रोल पंपों से जरूरत के मुताबिक पेट्रोल-डीजल खरीद सकेंगे। 200 लीटर प्रतिदिन की सीमा और रीसेल पर रोक जैसे प्रावधान भी प्रभावी रूप से समाप्त हो जाएंगे, जिससे टेलीकॉम टावर ऑपरेटरों, छोटे उद्योगों, परिवहन कंपनियों और अन्य बड़े उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें पिछले करीब तीन महीनों से अपने कंज्यूमर या कैप्टिव पंपों पर निर्भर रहना पड़ रहा था। सरकार ने साफ किया है कि यह बदलाव मिडिल ईस्ट में हालात सुधरने, क्रूड ऑयल की कीमतों में आई नरमी और घरेलू रिफाइनरियों के अधिकतम क्षमता पर काम करने को देखते हुए किया गया है। साथ ही अधिकारियों ने उपभोक्ताओं से अफवाहों से दूर रहने और बिना किसी पैनिक के सामान्य खरीदारी करने की अपील भी की है, क्योंकि देश में फ्यूल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

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