बैंक मैनेजर पर कंपनी के खाते से एक करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी का आरोप, छह लोगों पर मुकदमा

नोएडा। फेज-वन थाना क्षेत्र स्थित एक बैंक के प्रबंधक पर कंपनी के बैंक खाते से कथित तौर पर धोखाधड़ी कर एक करोड़ रुपये से अधिक की रकम हड़पने का गंभीर आरोप लगा है। मामले में कंपनी के निदेशक की शिकायत पर कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने बैंक प्रबंधक समेत छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और बैंक खातों में हुए लेनदेन समेत अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

मामला सेक्टर-2 स्थित हरित रियलटेक प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। कंपनी के निदेशक सौरभ राणा ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि नरेंद्र कुमार ने वर्ष 2014 के आसपास खुद को इंडियन बैंक में बैंक प्रबंधक बताते हुए कंपनी का दौरा किया था। उसने कंपनी का बैंक खाता खुलवाने और बैंकिंग संबंधी कार्यों में सहायता करने की बात कही। इसी दौरान उसने कंपनी के अन्य निदेशकों से भी परिचय बढ़ाया।

बैंक खाता खुलने के बाद बढ़ा भरोसा

शिकायत के मुताबिक नरेंद्र कुमार की मदद से कंपनी का बैंक खाता बैंक में खुल गया। कंपनी के निदेशक आरटीजीएस और अन्य बैंकिंग लेनदेन के लिए बैंक शाखा में आते-जाते थे। आरोप है कि करीब चार-पांच वर्षों के दौरान नरेंद्र कुमार ने कंपनी के निदेशकों का इतना विश्वास हासिल कर लिया कि उसे बैंकिंग कार्यों के लिए हस्ताक्षर किए हुए चेक भी सौंपे जाने लगे।

आरोप है कि इसी विश्वास का फायदा उठाकर नरेंद्र कुमार ने कंपनी के लेखा संबंधी कार्यों में भी सहायता करने का भरोसा दिलाया। इसके बदले वह अपनी पत्नी के खाते में वेतन लेने लगा। कंपनी को कथित तौर पर लंबे समय तक इस बात की जानकारी नहीं हुई कि उसके बैंक खाते से अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर की जा रही है।

निजी खाते के अलावा पांच अन्य खातों में रकम ट्रांसफर करने का आरोप

कंपनी निदेशक की शिकायत के अनुसार आरोपी ने अपने पद और कंपनी के साथ बनाए गए विश्वास का कथित तौर पर दुरुपयोग किया। आरोप है कि कंपनी के बैंक खातों से रकम केवल नरेंद्र कुमार के निजी खाते में ही नहीं, बल्कि उसके परिचितों के खातों में भी ट्रांसफर की गई।

शिकायत में जिन खातों में रकम ट्रांसफर किए जाने का आरोप लगाया गया है, उनमें लोकेंद्र कुमार, रेनू अग्रवाल, मीनाक्षी श्योराण, संजय चौहान और राहुल कुमार के खाते शामिल हैं।

कंपनी का आरोप है कि अलग-अलग खातों में रकम भेजकर कथित तौर पर वित्तीय लेनदेन को छिपाने का प्रयास किया गया। कंपनी के दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कुल कितनी रकम और किस-किस तारीख को इन खातों में ट्रांसफर की गई।

लेनदेन छिपाने के लिए भी प्रयास करने का आरोप

शिकायतकर्ता का आरोप है कि कथित धोखाधड़ी को अंजाम देने के बाद बैंक खातों में हुए लेनदेन को छिपाने के लिए भी कई प्रयास किए गए। कंपनी को जब बैंकिंग रिकॉर्ड और खातों की गतिविधियों की जानकारी हुई तो पूरे मामले का खुलासा हुआ।

इसके बाद कंपनी निदेशक ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की। आरोप है कि शिकायत के बावजूद तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं होने पर उन्होंने कोर्ट का रुख किया। कोर्ट के आदेश के बाद फेज-वन थाना पुलिस ने बैंक प्रबंधक नरेंद्र कुमार समेत छह आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

बैंक रिकॉर्ड और खातों की जांच में खुलेगा पूरा राज

पुलिस अब मामले में कंपनी के बैंक खातों, चेक, आरटीजीएस लेनदेन, संबंधित बैंक रिकॉर्ड और आरोपियों के खातों में हुए ट्रांजेक्शन की जांच करेगी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि कथित तौर पर कंपनी के खाते से रकम कब-कब निकाली गई और किन खातों में भेजी गई।

इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि कंपनी के बैंक खाते से रकम ट्रांसफर करने के लिए किन दस्तावेजों या बैंकिंग माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो मामले में रकम की पूरी श्रृंखला सामने आने की उम्मीद है।

विश्वास में लेकर कंपनी के खाते से रकम निकालने का आरोप

इस मामले में सबसे अहम पहलू यह है कि आरोपी पर कंपनी के निदेशकों का विश्वास जीतने के बाद बैंकिंग और लेखा संबंधी काम में मदद करने के बहाने खाते से रकम ट्रांसफर करने का आरोप है। कई वर्षों तक बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े रहने के कारण उसे कंपनी के वित्तीय लेनदेन की जानकारी भी होने का आरोप लगाया गया है।

फिलहाल पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि एक करोड़ रुपये से अधिक की कथित रकम किस तरह निकाली गई, कितने समय तक यह लेनदेन चलता रहा और इसमें नामजद सभी आरोपियों की क्या भूमिका थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। बैंक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 

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