नोएडा के विवादित गार्डन गैलेरिया मॉल में एक बार फिर नशे की हालत में दो गुटों के बीच जमकर लात-घूंसे चले, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। महिला मित्र को लेकर भड़का विवाद देर रात मॉल के बार में हुआ, जो मॉल की सुरक्षा व्यवस्था और नाइट लाइफ पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
मॉल घटना का विवरण
सेक्टर-38ए स्थित गार्डन गैलेरिया मॉल, जो पहले भी मारपीट की घटनाओं के लिए चर्चित रहा है, 10 मई 2026 की देर रात फिर सुर्खियों में आ गया। दो गुटों के बीच शराब के नशे में शुरू हुई तकरार हिंसक झड़प में बदल गई, जिसमें बाउंसरों की भी कथित संलिप्तता सामने आई। पुलिस ने वीडियो को संज्ञान में लेते हुए जांच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। मॉल के नाइट क्लब और बार देर रात नशे की पार्टियों के लिए कुख्यात हैं, जहां पूर्व में भी डीजे पर हमला और बाउंसरों की दबंगई जैसी घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं। नागरिक संगठनों ने मांग की है कि नोएडा पुलिस केवल गिरफ्तारी तक सीमित न रहे, बल्कि बारों का पूर्ण निरीक्षण कर शराब परोसने के समय, बाउंसरों के लाइसेंस और प्रशिक्षण पर कड़ाई बरते।
जिम व स्विमिंग पूल पर ताबड़तोड़ छापेमारी
इसी बीच, नोएडा-ग्रेटर नोएडा में जिम और स्विमिंग पूलों पर जिला खेल विभाग ने बड़ा एक्शन ले लिया। प्रभारी क्रीड़ा अधिकारी डॉ. परवेज अली के नेतृत्व में मिक्सन अल्टीमो, गौर अतुल्यम, सुपरटेक सिजार, जे.पी. रिसोर्ट, रियान इंटरनेशनल स्कूल और वाईएमसीए समेत कई जगहों का औचकनिरीक्षण किया गया। रियान स्कूल के पूल में ऑक्सीजन सिलेंडर, व्हीलचेयर, लाइफ जैकेट और सीसीटीवी की कमी पाई गई, जबकि जे.पी. रिसोर्ट में लाइफ सेवर अनुपस्थित थे। केवल वाईएमसीए में सभी मानक सही मिले। विभाग ने खामियों पर नोटिस जारी कर सुधार का आदेश दिया, अन्यथा सीलिंग की चेतावनी दी है।
नए नियम और बढ़ा शुल्क
2026 से जिम, स्विमिंग पूल व स्पोर्ट्स अकादमियों का वार्षिक रजिस्ट्रेशन शुल्क 15 हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपये किया गया है। एनओसी अनिवार्य कर दी गई, जो सोसाइटियों, स्कूलों और होटलों पर लागू होगा। देर रात पूल पार्टियों पर भी रोक लगाई गई, जिसमें पूल केवल सुबह 5:30-9:30 और शाम 4:00-10:00 बजे तक खुल सकेंगे।
प्रशासन की अपेक्षाएं
नोएडा पुलिस ने मॉल संचालकों को सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश दिए हैं, जबकि खेल विभाग का अभियान जिम संचालकों में हड़कंप मचा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना ठोस सुधार के ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी, जो सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालेंगी। प्रशासन अब बाउंसर प्रशिक्षण और लाइसेंसिंग पर भी नजर रखेगा।

