Deprecated: File Theme without header.php is deprecated since version 3.0.0 with no alternative available. Please include a header.php template in your theme. in /home/u149331777/domains/jaihindjanab.com/public_html/wp-includes/functions.php on line 6260
नोएडा-ग्रेटर नोएडा की ऊंची इमारतें बनीं चिंता का सबब! सुपरनोवा के बाद फर्स्ट एवेन्यू में मौत, क्या हाईराइज बन रहे ‘सुसाइड पॉइंट’? – जय हिन्द जनाब नोएडा-ग्रेटर नोएडा की ऊंची इमारतें बनीं चिंता का सबब! सुपरनोवा के बाद फर्स्ट एवेन्यू में मौत, क्या हाईराइज बन रहे ‘सुसाइड पॉइंट’? – जय हिन्द जनाब

नोएडा-ग्रेटर नोएडा की ऊंची इमारतें बनीं चिंता का सबब! सुपरनोवा के बाद फर्स्ट एवेन्यू में मौत, क्या हाईराइज बन रहे ‘सुसाइड पॉइंट’?

नोएडा/ग्रेटर नोएडा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा की पहचान आज देश के बड़े हाईराइज शहरों में होती है। आसमान छूती इमारतें यहां के तेजी से बदलते शहरी विकास की तस्वीर पेश करती हैं, लेकिन इन्हीं ऊंची इमारतों से सामने आ रही मौत की घटनाओं ने अब एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है—क्या हाईराइज सोसायटियों में सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है या कुछ ऊंची इमारतें आत्महत्या के लिए आसान जगह बनती जा रही हैं?

हाल के दिनों में सुपरनोवा में संभव जैन की मौत और ग्रेटर नोएडा की फर्स्ट एवेन्यू में पुलकित गौतम की तीसरी मंजिल से गिरने की घटना ने इस सवाल को और गंभीर बना दिया है। हालांकि दोनों घटनाओं की परिस्थितियां अलग हैं और हर ऊंचाई से हुई मौत को आत्महत्या नहीं कहा जा सकता, लेकिन लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं हाईराइज सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत जरूर बताती हैं।

सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से संभव जैन ने दी जान

नोएडा के सेक्टर-94 स्थित Supertech Supernova में 3 अक्टूबर को 28 वर्षीय संभव जैन की मौत ने लोगों को झकझोर दिया। रिपोर्टों के मुताबिक संभव जैन सुपरनोवा के स्पायरा टावर में एक दिन के लिए ठहरे थे और 43वीं मंजिल से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और घटनास्थल से फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए।

प्रारंभिक जांच और मीडिया रिपोर्टों में संभव के मानसिक तनाव, आर्थिक दबाव और पारिवारिक परिस्थितियों का भी जिक्र सामने आया है। हालांकि आत्महत्या के पीछे की पूरी वजह जांच का विषय है।

फर्स्ट एवेन्यू में तीसरी मंजिल से गिरने से पुलकित गौतम की मौत

दूसरी घटना ग्रेटर नोएडा की फर्स्ट एवेन्यू से सामने आई है। सोमवार सुबह पुलकित गौतम की तीसरी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परिवार में मां और चचेरे भाई की मौत के बाद पुलकित अकेले रह रहे थे। इस घटना ने एक बार फिर हाईराइज और बहुमंजिला आवासीय परिसरों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ मानसिक और सामाजिक सुरक्षा पर भी सवाल खड़े किए हैं। इस मामले में भी मौत की वास्तविक परिस्थितियों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

सवाल सिर्फ इमारत की ऊंचाई का नहीं, सुरक्षा व्यवस्था का भी

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में हाईराइज सोसायटियां विकसित हुई हैं। कई टावर दर्जनों मंजिल ऊंचे हैं। ऐसे में बालकनी, खिड़की, छत और अन्य खुले हिस्सों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

सवाल यह है कि क्या सभी हाईराइज सोसायटियों में बालकनी और खिड़कियों की पर्याप्त सुरक्षा, एक्सेस कंट्रोल, छत तक पहुंच की निगरानी, सीसीटीवी और सिक्योरिटी स्टाफ की प्रभावी व्यवस्था है? सिर्फ गेट पर गार्ड तैनात कर देने से हाईराइज सुरक्षा पूरी नहीं हो जाती। खासकर ऐसे मामलों में जहां कोई व्यक्ति मानसिक तनाव में हो, वहां सोसायटी प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।

क्या शॉर्ट टर्म रेंटल भी बन रहा है चुनौती?

सुपरनोवा की घटना के बाद हाईराइज इमारतों में Airbnb और अन्य शॉर्ट-टर्म रेंटल को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक संभव जैन एक दिन के लिए वहां ठहरे थे। ऐसे में सोसायटी प्रबंधन के सामने चुनौती यह है कि अस्थायी रूप से आने वाले लोगों की पहचान और गतिविधियों की निगरानी किस स्तर तक की जा रही है। हालांकि किसी घटना के लिए शॉर्ट-टर्म रेंटल को सीधे जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन हाईराइज सुरक्षा के नजरिए से इस व्यवस्था की समीक्षा जरूरी हो सकती है।

क्या नोएडा-ग्रेटर नोएडा को चाहिए हाईराइज सेफ्टी ऑडिट?

लगातार हो रही घटनाओं के बीच अब बड़ा सवाल यह है कि क्या नोएडा और ग्रेटर नोएडा की सभी ऊंची इमारतों का हाईराइज सेफ्टी ऑडिट कराया जाना चाहिए? इस ऑडिट में केवल फायर सेफ्टी ही नहीं, बल्कि बालकनी और खिड़कियों की डिजाइन, रेलिंग की ऊंचाई, छत तक पहुंच, कॉमन एरिया की निगरानी, सीसीटीवी कवरेज, सिक्योरिटी रिस्पॉन्स टाइम और शॉर्ट-टर्म रेंटल से जुड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल को भी शामिल किया जा सकता है।

‘सुसाइड पॉइंट’ कहना आसान, समस्या समझना जरूरी

इन घटनाओं के आधार पर किसी पूरी इमारत या पूरे शहर की हाईराइज सोसायटियों को ‘सुसाइड पॉइंट’ घोषित करना उचित नहीं होगा। आत्महत्या के पीछे मानसिक स्वास्थ्य, आर्थिक परेशानी, पारिवारिक तनाव और कई अन्य व्यक्तिगत कारण हो सकते हैं। लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि एक के बाद एक ऊंची इमारतों से होने वाली मौतों को सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज न किया जाए। अगर किसी व्यक्ति में संकट के संकेत दिखाई देते हैं तो परिवार, दोस्त, सोसायटी प्रबंधन और आसपास के लोगों की समय पर प्रतिक्रिया बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा को आधुनिक हाईराइज शहर बनाने के साथ अब ‘हाईराइज सेफ्टी’ को भी शहरी सुरक्षा का अहम हिस्सा बनाना होगा। सवाल केवल यह नहीं होना चाहिए कि इमारत कितनी ऊंची है, बल्कि यह भी होना चाहिए कि वहां रहने वाला व्यक्ति कितना सुरक्षित है।

यह भी पढ़ें: किसानों की आने वाली है मौज! न्यू नोएडा बसाने की तैयारी तेज, 31 गांवों में लगेंगे जमीन अधिग्रहण कैंप

यहां से शेयर करें