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नोएडा-ग्रेटर नोएडा में कब थमेगा मौत का सिलसिला? प्राधिकरण की लापरवाही पर उठे सवाल, छह महीने में दो दर्दनाक हादसों ने झकझोरा शहर – जय हिन्द जनाब नोएडा-ग्रेटर नोएडा में कब थमेगा मौत का सिलसिला? प्राधिकरण की लापरवाही पर उठे सवाल, छह महीने में दो दर्दनाक हादसों ने झकझोरा शहर – जय हिन्द जनाब

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में कब थमेगा मौत का सिलसिला? प्राधिकरण की लापरवाही पर उठे सवाल, छह महीने में दो दर्दनाक हादसों ने झकझोरा शहर

नोएडा/ग्रेटर नोएडा। विश्वस्तरीय शहर बनाने के दावों के बीच नोएडा और ग्रेटर नोएडा में विकास कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी लगातार लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। ताजा मामला ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित कलाधाम सोसाइटी का है, जहां पार्क में खेलते समय छह वर्षीय मासूम अव्यान सूर्य (Avyaan Surya) करीब 15 फीट गहरे बारिश के पानी से भरे गड्ढे में गिर गया और उसकी मौत हो गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह गड्ढा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओर से बोरिंग कार्य के लिए खुदवाया गया था, लेकिन मौके पर न तो बैरिकेडिंग की गई और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया था।

खेलते-खेलते गड्ढे में गिरा मासूम, अस्पताल पहुंचने से पहले तोड़ दिया दम

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शनिवार शाम बच्चे पार्क में क्रिकेट खेल रहे थे। इसी दौरान अव्यान का पैर फिसला और वह पानी से भरे गहरे गड्ढे में जा गिरा। सोसाइटी के लोगों ने काफी प्रयास कर उसे बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने प्राधिकरण तथा संबंधित ठेकेदार पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया। प्रशासन ने मामले में जांच और ठेकेदार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही है।

छह महीने पहले सेक्टर-150 में गई थी सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की जान

यह पहली घटना नहीं है। इसी वर्ष जनवरी में नोएडा के सेक्टर-150 में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की भी पानी से भरे खुले गड्ढे में कार गिरने से मौत हो गई थी। स्थानीय लोगों का कहना था कि दुर्घटनास्थल पर लंबे समय से पर्याप्त स्ट्रीट लाइट, बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर और चेतावनी संकेतों की मांग की जा रही थी, लेकिन संबंधित एजेंसियों ने समय रहते कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।

सवालों के घेरे में प्राधिकरण की कार्यप्रणाली

दो बड़े हादसों के बावजूद सवाल उठ रहे हैं कि क्या नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई स्थायी व्यवस्था बनाई है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि विकास कार्यों के दौरान खुले गड्ढे, अधूरे निर्माण स्थल और बिना सुरक्षा इंतजाम के छोड़ी गई साइटें लगातार दुर्घटनाओं को न्योता दे रही हैं। उनका कहना है कि हादसे के बाद जांच समिति, नोटिस और कार्रवाई की घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई देता।

विशेषज्ञों की राय: सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी

शहरी विकास और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी खुदाई या निर्माण स्थल पर मजबूत बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और नियमित निगरानी अनिवार्य होनी चाहिए। विशेषकर मानसून के दौरान पानी से भरे खुले गड्ढे गंभीर खतरा बन जाते हैं और ऐसे मामलों में संबंधित एजेंसियों तथा ठेकेदारों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है।

स्थानीय लोगों की मांग

दोनों घटनाओं के बाद लोगों ने मांग की है कि:

  • सभी खुले गड्ढों और निर्माण स्थलों की तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराई जाए।
  • बिना बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत वाले स्थलों पर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
  • लापरवाही से होने वाली मौतों में जवाबदेही तय कर दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
  • भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए।

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