Deprecated: File Theme without header.php is deprecated since version 3.0.0 with no alternative available. Please include a header.php template in your theme. in /home/u149331777/domains/jaihindjanab.com/public_html/wp-includes/functions.php on line 6260
नोएडा में वेतन वृद्धि पर अनिश्चितता, Motherson समेत कई फैक्टरियों के श्रमिकों को अभी भी नहीं मिला बढ़ा हुआ वेतन, महंगाई में बढ़ रही बेचैनी  – जय हिन्द जनाब नोएडा में वेतन वृद्धि पर अनिश्चितता, Motherson समेत कई फैक्टरियों के श्रमिकों को अभी भी नहीं मिला बढ़ा हुआ वेतन, महंगाई में बढ़ रही बेचैनी  – जय हिन्द जनाब

नोएडा में वेतन वृद्धि पर अनिश्चितता, Motherson समेत कई फैक्टरियों के श्रमिकों को अभी भी नहीं मिला बढ़ा हुआ वेतन, महंगाई में बढ़ रही बेचैनी 

अप्रैल मध्य में नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में 21 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की घोषणा की थी, लेकिन दो सप्ताह बाद भी Motherson Group समेत कई कंपनियों के श्रमिकों को वादे के अनुसार बढ़ा हुआ वेतन और ओवरटाइम नहीं मिला है। भारी पुलिस तैनाती के बीच श्रमिक सैलरी का इंतजार कर रहे हैं और HR के आश्वासनों पर भरोसा नहीं कर पा रहे।

मई के पहले सप्ताह में Motherson की एक यूनिट में काम करने वाले संविदा श्रमिकों ने बताया कि उन्हें पे-स्लिप तक नहीं दी गई है और बैंक खाते में संशोधित वेतन जमा नहीं हुआ। एक महिला श्रमिक कविता (नाम बदला गया), जो आठ साल से कंपनी में काम कर रही हैं और बिहार से प्रवासी हैं, ने कहा, “HR ने आश्वासन दिया है कि संशोधित वेतन मिल जाएगा, लेकिन हम यकीन नहीं कर पा रहे।” वे परिवार की एकमात्र कमाने वाली सदस्य हैं।  सरकार ने अप्रैल 1 से प्रभावी न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी की थी। नोएडा-गाजियाबाद क्षेत्र में अकुशल श्रमिकों का वेतन ₹11,313 से बढ़कर ₹13,690 हो गया है। नगरपालिका क्षेत्रों में 15% और अन्य क्षेत्रों में 9% बढ़ोतरी तय की गई। साथ ही सैलरी 10 तारीख तक भुगतान करने और डबल रेट पर ऑवरटाइम का आदेश दिया गया था। लेकिन कई कंपनियां 7 तारीख के बाद सैलरी देती हैं और देरी आम बात है।

काम की स्थितियां जस की तस: प्रदर्शन के बाद भी काम की स्थितियां में खास बदलाव नहीं आया है। श्रमिकों का आरोप है कि पूर्ण उपस्थिति के लिए ₹1,500 इनसेंटिव का वादा किया गया था लेकिन नहीं मिला। पे-स्लिप कंपनी ऑफिस में ही देखने को मिलती है, घर ले जाने की अनुमति नहीं। जॉइनिंग लेटर या रोजगार प्रमाण-पत्र भी कई नए श्रमिकों को नहीं दिए गए। सुनील (नाम बदला) ने बताया कि ओवरटाइम पर डबल भुगतान का दावा किया जाता है लेकिन लागू होने पर संदेह है। एक अन्य श्रमिक विभूति ने कहा कि वादा ₹20,000 का था लेकिन कटौतियों के बाद केवल ₹16,000 मिलता है।

मजिस्ट्रियल जांच की तैयारी और आम जनता की भूमिका

गौतमबुद्ध नगर जिले में 13 अप्रैल को श्रमिकों और कर्मचारियों के धरना–प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसक घटनाओं की जांच अब विशेष मजिस्ट्रियल कमेटी को सौंप दी गई है। इसके लिए अपर पुलिस आयुक्त (मुख्यालय) अजय कुमार को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है, और प्रशासन ने आम जनता से 15 मई तक मौखिक, लिखित और इलेक्ट्रॉनिक (ऑडियो–वीडियो) साक्ष्य जमा करने की अपील की है। आम जनता की प्रतिक्रिया में ज़्यादातर लोग इस जांच को आवश्यक और “निष्पक्ष” बता रहे हैं, लेकिन साथ ही भी चिंता जताई जा रही है कि आम मजदूरों के बजाय केवल निचले स्तर के नेताओं और सहयोगियों को निशाना न बनाया जाए।

सोशल मीडिया और जन प्रतिक्रियाएं: एक्स (ट्विटर) पर इस मुद्दे पर काफी चर्चा हुई है। कई यूजर्स ने श्रमिकों के संघर्ष को उजागर किया और सरकार व कंपनियों से तुरंत अमल की मांग की। एक यूजर ने लिखा, “नोएडा के मजदूर भाई ध्यान दें! क्या आपकी कंपनी ने वेतन वृद्धि और डबल ओवरटाइम शुरू किया?” दूसरों ने Hartech Plastic जैसी अन्य कंपनियों में भी देरी की शिकायत की। मीडिया की रिपोर्ट को शेयर करते हुए लोग अनिश्चितता पर चिंता जता रहे हैं।  प्रदर्शन के दौरान अप्रैल 13 को हिंसा भड़की थी, जिसमें वाहनों में आगजनी और पथराव हुआ। पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और सैकड़ों गिरफ्तारियां हुईं। श्रमिक हरियाणा में हुई वेतन बढ़ोतरी का हवाला देते हुए ₹20,000 न्यूनतम वेतन और बेहतर स्थितियों की मांग कर रहे थे। ट्रेड यूनियनों ने कहा कि 2014 से वेतन संशोधन लंबित था और नई बढ़ोतरी अपर्याप्त है।

जनता की राय: आम लोग महंगाई, किराए और एडमिशन खर्च के बीच श्रमिकों की दिक्कतों से सहानुभूति रखते हैं। सोशल मीडिया पर पोस्ट्स में कहा गया कि 12 घंटे काम के बाद भी सिलिंडर और सब्जी भरने के लिए भटकना पड़ता है। कई ने मजदूरों के अधिकारों, समय पर भुगतान और दस्तावेजी सबूतों की मांग की। कुछ ने राजनीतिक दलों पर भी सवाल उठाए। कंपनी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। जिला प्रशासन ने हिंसा की मजिस्ट्रेटीय जांच का आदेश दिया है। श्रमिकों में आक्रोश बरकरार है और वे दस्तावेजी गारंटी तथा तुरंत अमल की मांग कर रहे हैं। यह स्थिति न केवल नोएडा बल्कि पूरे NCR के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक-प्रबंधन संबंधों और न्यूनतम मजदूरी के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है। महंगाई के इस दौर में श्रमिकों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने वाली मजदूरी और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना चुनौती बना हुआ है। प्रशासन और कंपनियों को जल्द ठोस कदम उठाने होंगे, वरना असंतोष फिर भड़क सकता है।

यह भी पढ़ें : “जल्दी सेवा-पानी कर चल…” नोएडा में डायल-112 की वर्दी में रिश्वतखोरी का शर्मनाक चेहरा, ऑटो चालक से 5 हजार मांगने का वीडियो वायरल; सोशल मीडिया पर जनता का फूटा गुस्सा

यहां से शेयर करें