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नोएडा हिंसा और हरियाणा किसान आंदोलन: सोशल मीडिया से मंडी तक अशांति का नया दौर – जय हिन्द जनाब नोएडा हिंसा और हरियाणा किसान आंदोलन: सोशल मीडिया से मंडी तक अशांति का नया दौर – जय हिन्द जनाब

नोएडा हिंसा और हरियाणा किसान आंदोलन: सोशल मीडिया से मंडी तक अशांति का नया दौर

नोएडा हिंसा और हरियाणा किसान आंदोलन: देश इस समय दो बड़े जन-आंदोलनों की चपेट में है एक तरफ उत्तर प्रदेश के नोएडा में मजदूरों का उग्र प्रदर्शन, दूसरी तरफ हरियाणा में किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन के खिलाफ बढ़ता विरोध। दोनों मामलों में एक समान धागा नजर आता है सरकारी नीतियों से उपजी बेचैनी और उसे भड़काने में सोशल मीडिया की भूमिका।

नोएडा: 50 से ज्यादा फर्जी अकाउंट, 24 घंटे में अफवाहों का जाल

नोएडा के फेज-2 (गौतम बुद्ध नगर) में सोमवार को हुए श्रमिक प्रदर्शन के दौरान दो सोशल मीडिया हैंडल के जरिए फर्जी सूचनाएं फैलाई गईं, जिससे शांतिपूर्ण आंदोलन हिंसक हो गया। पुलिस ने इन दोनों हैंडल के खिलाफ FIR दर्ज की है।

पुलिस की जांच में पता चला कि प्रदर्शन से पहले 50 से ज्यादा बॉट अकाउंट सक्रिय थे, जिनमें से कई महज 24 घंटों के भीतर बनाए गए थे। उत्तर प्रदेश सरकार ने इन अकाउंट के डिजिटल ट्रेल की जांच के लिए एक Special Task Force गठित करने की घोषणा की है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के मुताबिक, जिले भर के करीब 83 स्थानों पर लगभग 42,000 मजदूर इकट्ठा हुए। इनमें से दो जगहों पर हिंसा हुई, जहां न्यूनतम बल का प्रयोग करते हुए 200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। बाकी 78 स्थानों पर संवाद के जरिए स्थिति को शांत किया गया।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों पर गोली नहीं चलाई गई और उन्होंने जनता से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक सूचनाओं पर भरोसा न करें। मजदूरों की मूल मांग वेतन वृद्धि की थी। सरकार ने 21% वेतन बढ़ोतरी की घोषणा की, इसके बावजूद मंगलवार को सेक्टर-80 में नया प्रदर्शन शुरू हो गया।

हरियाणा: बायोमेट्रिक सिस्टम से परेशान किसान, आंदोलन तेज

उधर हरियाणा में रबी मार्केटिंग सीजन 2026 की शुरुआत के साथ ही किसान नई मंडी नीति के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड (HSAMB) ने 28 मार्च 2026 को एक पत्र जारी कर मंडियों में आने वाले वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर की अनिवार्यता, eKharid मोबाइल ऐप से गेट पास, और फसल की नीलामी से पहले किसान या उसके अधिकृत प्रतिनिधि का बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया।

किसानों का कहना है कि इस प्रक्रिया में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, वाहन नंबर रजिस्ट्रेशन और आंख की स्कैनिंग सब कुछ खुद किसान को मंडी जाकर करना पड़ता है, जिसके बाद भी घंटों इंतजार करना पड़ता है। महिला और बुजुर्ग किसानों को रात तक मंडी में रुकना पड़ रहा है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हरियाणा में एक चौथाई से ज्यादा कृषि भूमि महिलाओं के नाम है, ऐसे में उन्हें मंडी में बायोमेट्रिक के लिए बाध्य करना न केवल अव्यावहारिक है बल्कि मानवाधिकारों का उल्लंघन भी है।

संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले फतेहाबाद में किसानों ने अदामपुर रोड पर करीब चार घंटे चक्का जाम किया। INLD, BKU एकता उग्राहन समेत कई संगठन नियमों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। INLD नेता अभय सिंह चौटाला ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को चेतावनी दी है कि अगर बायोमेट्रिक सिस्टम और नई खरीद शर्तें वापस नहीं ली गईं, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

दोनों आंदोलनों को जोड़ने वाली कड़ी

नोएडा और हरियाणा दोनों मामलों में सरकार की डिजिटल व नौकरशाही नीतियों ने आम आदमी और किसान को सीधे प्रभावित किया है। नोएडा में मजदूरों की वेतन-वृद्धि की जायज मांग को सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट्स ने हिंसा में बदल दिया। हरियाणा में पारदर्शिता के नाम पर लागू बायोमेट्रिक सिस्टम, तकनीकी खामियों और जमीनी हकीकत से कटे होने के कारण किसानों के लिए नई मुसीबत बन गया है।

यूपी पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और बिना सत्यापन के कोई भी सामग्री साझा न करें। वहीं हरियाणा सरकार ने कुछ रियायतें देते हुए कहा है कि किसान तीन नॉमिनी तय कर सकते हैं जो उनकी ओर से मंडी में फसल बेच सकेंगे, और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन मंडी के गेट पर नहीं बल्कि फसल के ढेर पर जाकर पूरी की जाएगी। फिलहाल दोनों राज्यों में तनाव बना हुआ है और प्रशासन हालात पर करीबी नजर रखे हुए है।​​​​​​​​​​​​​​​​

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