Deprecated: File Theme without header.php is deprecated since version 3.0.0 with no alternative available. Please include a header.php template in your theme. in /home/u149331777/domains/jaihindjanab.com/public_html/wp-includes/functions.php on line 6260
जब कोई नही दिला रहा था इंसाफ तब महा प्रसाद ने हाईकोर्ट में की दलील पेश... – जय हिन्द जनाब जब कोई नही दिला रहा था इंसाफ तब महा प्रसाद ने हाईकोर्ट में की दलील पेश... – जय हिन्द जनाब

जब कोई नही दिला रहा था इंसाफ तब महा प्रसाद ने हाईकोर्ट में की दलील पेश…

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में सोशल मीडिया पर सीएम को फोटो को एडिट करके उसे वायरल करने के मामले में जब इंसाफ की बात हुई तो कोई आगे नही आया लेकिन अधिवक्ता महाप्रसाद ने कोर्ट में आरोपी की और से दलीलें पेश की। जिसके बाद कोर्ट ने जमानत दे दी। बता दें कि मुख्यमंत्री की छवि धूमिल करने और सामाजिक सौहार्द को भंग करने जैसे गम्भीर आरोप लगे थे। मुकदमा भी दर्ज हुआ और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। अधिवक्ता महा प्रसाद ने अपने अद्भुत विधिक कौशल, निर्भीकता और संविधान-सम्मत दृष्टिकोण का ऐसा प्रभावशाली परिचय दिया। जिसने न्याय व्यवस्था में जनविश्वास को और मजबूत किया है।

मालूम हो कि मुरादाबाद के रहने वाले साहिल शमसी नामक व्यक्ति पर आरोप था कि उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री साझा कर हिन्दू-मुस्लिम समुदायों में वैमनस्य पैदा करने और प्रदेश के मुखिया की गरिमा को ठेस पहुँचाने का प्रयास किया। इस संवेदनशील विषय पर पुलिस द्वारा दर्ज गंभीर धाराओं में गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी, लेकिन महा प्रसाद ने न केवल बेहतरीन विधिक रणनीति तैयार की, बल्कि सिद्धांतत यह भी स्थापित किया कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी तभी की जानी चाहिए जब पर्याप्त, ठोस एवं प्रथमदृष्टया विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध हों।
उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने भी महा प्रसाद के तर्कों से सहमति जताते हुए कहा कि अभियुक्त द्वारा जांच में सहयोग का आश्वासन दिया गया है, और गिरफ्तारी इस स्तर पर उचित नहीं होगी। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अभियुक्त की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण संविधान की मूल आत्मा है, और अभियोजन पक्ष को यदि आवश्यकता हो तो कानून सम्मत प्रक्रिया अपनाते हुए आगे की कार्रवाई करनी चाहिए।

यह सफलता न केवल कानून के दायरे में रहकर लड़ी गई। एक न्यायिक लड़ाई को दर्शाती है, बल्कि समाज में इस संदेश को भी सशक्त करती है कि कानून का शासन सर्वोपरि है और किसी भी व्यक्ति को बिना न्यायिक जांच के प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए। महा प्रसाद, अधिवक्ता उच्च न्यायालय, का यह प्रयास निश्चित रूप से युवा अधिवक्ताओं और न्याय व्यवस्था पर भरोसा रखने वाले नागरिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी दृढ़ता, न्याय के प्रति समर्पण और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने की प्रतिबद्धता प्रशंसनीय है।

 

News: अमरनाथ यात्रा पर आईजीपी कश्मीर जोन, वी.के. बिरदी ने कहा…. पढ़िए पूरी ख़बर

यहां से शेयर करें