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UP News: सियासी गतिविधियों से खुद को दूर रखेगा दारूल उलूम UP News: सियासी गतिविधियों से खुद को दूर रखेगा दारूल उलूम

UP News: सियासी गतिविधियों से खुद को दूर रखेगा दारूल उलूम

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UP News:  देवबंद,। देवबंदी मसलक के धार्मिक शिक्षण केंद्र दारूल उलूम देवबंद ने बुधवार को साफ किया कि 18वीं लोकसभा के होने वाले चुनावों में यह संस्था खुद को सियासत और सियासी गतिविधियों से दूर रखेगी।

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संस्था के प्रमुख मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने बुधवार को यूनीवार्ता से कहा “ दारूल उलूम खालिसी तौर पर एक इस्लामिक शिक्षण संस्था है जो राजनीति से पूरी तरह से परहेज करती है। देश का मुसलमान अपनी इच्छा से मतदान करने के लिए स्वतंत्र है। वह जिस पार्टी का समर्थन करें और चाहे जिसे अपना वोट डाले। हम चुनावों के दौरान मुसलमानों के लिए ना तो कोई फतवा जारी करेंगे, ना कोई निर्देश देंगे और ना ही कोई मशवरा देंगे।”
दारूल उलूम देवबंद 150 साल से भी पुरानी दीनी संस्था है। देशभर के साढ़े तीन हजार से भी ज्यादा छात्र यहां शिक्षा ग्रहण करते हैं। जिनका पूरा खर्चा संस्था उठाती है। यह संस्था पूरी तरह से दान-चंदे पर आश्रित है। दारूल उलूम से देशभर के तीन हजार मदरसे संबद्ध है। नोमानी का कहना है कि इन मदरसों से दारूल उलूम का वास्ता छात्रों को पढ़ाए जाने वाली शिक्षा और पाठ्यक्रम तक ही सीमित है। बाकी मामलों में ये मदरसे क्या करते हैं क्या नहीं करते हैं दारूल उलूम का उससे कोई लेना-देना नहीं है।

इस सवाल के जवाब में कि मुसलमानों के हितों को लेकर कई ऐसे कदम सरकार द्वारा उठाए गए हैं तो ऐसी सूरत में दारूल उलूम चुनावों के दौरान पूरी तरह से खामोशी अख्तियार रखेगा। उन्होंने कहा कि मसले अपनी जगह हैं। उन्हें उठाने के लिए दूसरे मंच मौजूद हैं। दारूल उलूम की भूमिका तालीम देने तक ही सीमित है। देश की सियासत और सियासतदानों से इस संस्था का कोई लेना-देना नहीं है।
एक अन्य सवाल के जवाब में मुफ्ती ने कहा कि चुनावों के दौरान यदि कोई राजनेता, मंत्री या विपक्षी दल का सदस्य दारूल उलूम आता है तो संस्था के पदाधिकारी और प्रशासन उनकी अगुवानी और उनका स्वागत नहीं करेगा। ना उनसे भेंट करेंगा। संस्था हर समय सभी के लिए खुली है लेकिन चुनावों में हम पूरी तरह से राजनीति और राजनेताओं से दूरी बनाकर रखते हैं। इस बार भी उसका कड़ाई से पालन किया जाएगा।

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