प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को हाथ से लिखकर अस्पष्ट रूप में तैयार करने के मामले में कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और संबंधित मेडिकल ऑफिसर को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने आरोपी छत्रपाल की जमानत अर्जी की सुनवाई के दौरान पारित किया।
पढ़ने योग्य नहीं थी रिपोर्ट की प्रति
याची के अधिवक्ता ने मृतका गौरी पाल उर्फ पूजा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की स्पष्ट प्रति दाखिल करने से छूट मांगी थी, क्योंकि जमानत अर्जी में लगी प्रति पढ़ने योग्य नहीं थी। कोर्ट ने पाया कि आवेदक इसकी कोई स्पष्ट प्रति पेश नहीं कर सका, जिसके बाद छूट की अर्जी खारिज कर दी गई और स्पष्ट प्रति दाखिल करने का निर्देश दिया गया।
पहले भी दे चुका है आदेश
रिपोर्ट के अवलोकन में सामने आया कि इसे मेडिकल ऑफिसर ने हाथ से भरकर तैयार किया था, जबकि हाईकोर्ट 20 मार्च 2023 के अपने आदेश में पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि पोस्टमॉर्टम और इंजरी रिपोर्ट पठनीय होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि अब इसके लिए पोर्टल उपलब्ध है, जिस पर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, इंजरी रिपोर्ट और यौन उत्पीड़न रिपोर्ट तैयार कर अपलोड करना अनिवार्य है, ताकि पुलिस CCTNS के माध्यम से इसे देख सके।
डॉक्टर अब भी कर रहे हाथ से एंट्री
कोर्ट ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर जिले से आ रहे कई मामलों में डॉक्टर अब भी प्रोफार्मा हाथ से भरकर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं, जबकि इसे MEDLEAPR पोर्टल पर तैयार किया जाना अनिवार्य है। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत अर्जी केवल इसलिए निस्तारित नहीं हुई कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की प्रति अस्पष्ट थी।
मामले की अगली सुनवाई अब 15 सितंबर 2026 को होगी, जिसमें नोएडा CMO और संबंधित मेडिकल ऑफिसर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा।

