संपत्ति की हवस में बाप ने ली अपने ही जिगर के टुकड़े की जान — ग्रेटर नोएडा की दिल दहला देने वाली घटना

ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव से एक ऐसी खबर आई है जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। एक पिता ने,  जिसे बच्चे का पहला रक्षक और भगवान माना जाता है — अपने ही 13 वर्षीय मासूम बेटे की गला दबाकर हत्या कर दी। और यह सब इसलिए नहीं कि उसके बेटे ने कोई गुनाह किया था — बल्कि इसलिए कि उस बाप को अपने भाइयों से संपत्ति विवाद में बदला लेना था। सुधांशु, आठवीं कक्षा का एक होनहार छात्र, अपने पिता प्रदीप भाटी की इस घिनौनी साजिश का मोहरा बन गया।

वारदात की रात — एक बेटे का आखिरी सफर

बुधवार की रात करीब नौ बजे सुधांशु घर से निकला। रात गहराती गई, लेकिन वह नहीं लौटा। परिजनों ने तलाश शुरू की — मुहल्ले में, रिश्तेदारों में, दोस्तों में। कहीं कोई सुराग नहीं। अगले दिन यानी गुरुवार को सुधांशु के चाचा मोहित ने कासना कोतवाली में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। उसी शाम करीब सात बजे गांव के बाहर तालाब के किनारे खेल रहे बच्चों ने पानी में एक शव उतराते देखा। जब तक ग्रामीण पहुंचे और शव की पहचान हुई — पूरे परिवार में कोहराम मच गया। वह मासूम सुधांशु ही था, जिसकी पूरी ज़िंदगी अभी बाकी थी।

पिता का नाटक और पुलिस की पैनी नजर

शव मिलने के बाद मौके पर पहुंचा पिता प्रदीप भाटी रोने-धोने के बजाय अपने ही भाइयों पर बेटे के अपहरण और हत्या का आरोप लगाने लगा। यह व्यवहार संदेहास्पद था। पुलिस ने तत्काल आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज ने सारी कलई खोल दी — प्रदीप बुधवार रात अपने बेटे सुधांशु को कार में बिठाकर ले जाता दिखा। करीब दो घंटे बाद वह अकेला लौटा। यह वीडियो साक्ष्य किसी गवाह से कम न था। जब पुलिस ने सख्ती बरती तो प्रदीप ने दावा किया कि बेटा गुलिस्तापुर में किसी दोस्त के घर है। पुलिस उसे लेकर वहां पहुंची — और वहां पहुंचते ही प्रदीप भागने की कोशिश करने लगा। पुलिस और ग्रामीणों ने उसे दबोच लिया। कानून के शिकंजे में फंसता देख प्रदीप ने ब्लेड से अपना गला काटकर आत्महत्या का प्रयास किया। पुलिस ने फौरन उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है।

संपत्ति विवाद — रिश्तों का सबसे बड़ा दुश्मन

यह घटना केवल एक हत्या की खबर नहीं है — यह उस सामाजिक बीमारी का आईना है जो हमारे समाज में गहरी जड़ें जमा चुकी है। ज़मीन-जायदाद के विवाद में भाइयों के बीच दुश्मनी कोई नई बात नहीं, लेकिन जब इस दुश्मनी की आग में एक मासूम बच्चे को झोंक दिया जाए — तो यह सिर्फ हत्या नहीं, पितृत्व का सबसे घिनौना पतन है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ग्रामीण इलाकों में संपत्ति को लेकर पारिवारिक कलह आम बात है। लेकिन इस मामले में प्रदीप ने अपने भाइयों को फंसाने के लिए अपने ही खून को बलिदान कर दिया — और बाद में खुद को पीड़ित के रूप में पेश करने की कोशिश की। यह सोच कितनी विकृत और खतरनाक है, इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है।

समाज के लिए एक कड़वा सवाल

सुधांशु जैसे बच्चे रोज़ स्कूल जाते हैं, सपने देखते हैं, अपने परिवार पर भरोसा करते हैं। उन्हें क्या पता कि घर की चारदीवारी के भीतर ही उनके लिए खतरा पल रहा है।

इस घटना ने कुछ गंभीर सवाल खड़े किए हैं:

  • क्या संपत्ति कानूनों में सुधार की ज़रूरत नहीं, ताकि विवाद अदालत में सुलझें, न घर के आंगन में?
  • क्या ग्राम स्तर पर विवाद सुलह तंत्र को मज़बूत किया जाए, ताकि पारिवारिक झगड़े इस हद तक न पहुंचें?
  • क्या बच्चों की सुरक्षा सिर्फ बाहरी खतरों से ही नहीं, बल्कि घर के भीतर भी सुनिश्चित करने की ज़रूरत है?

पुलिस की सतर्कता से टूटा झूठ का जाल

इस पूरे मामले में कासना कोतवाली पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सीसीटीवी फुटेज के कुशल उपयोग ने साजिश को बेनकाब किया। यदि पुलिस ने आरोपी के व्यवहार पर समय रहते शक न किया होता, तो शायद एक निर्दोष परिवार — सुधांशु के चाचा — झूठे आरोपों में फंस जाते।सुधांशु अब नहीं रहा। उसकी कॉपियां, उसकी किताबें, उसके सपने — सब अधूरे रह गए। एक बाप ने उसे दुनिया में लाया और उसी बाप ने उसे इस दुनिया से विदा कर दिया — महज़ एक ज़मीन के टुकड़े के लिए। यह घटना हमें याद दिलाती है कि संपत्ति का कोई भी टुकड़ा किसी इंसान की जान से बड़ा नहीं हो सकता — और जो समाज यह भूल जाता है, वह धीरे-धीरे अपनी इंसानियत खो देता है।

 

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