जेवर में तेज रफ्तार बाइक ने ली 5 साल की मासूम की जान, बचाने की कोशिश में बाइक चालक नाले में गिरा

परिवार में मातम, इलाके में आक्रोश सड़क सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल, उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित जेवर क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना में तेज रफ्तार बाइक की चपेट में आकर मात्र 5 वर्षीय एक मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब बच्ची घर से बाहर निकली और तभी अनियंत्रित गति से आ रही बाइक ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। घटना के बाद पूरे मोहल्ले में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

हादसे का ब्यौरा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाइक की रफ्तार इतनी अधिक थी कि चालक उस पर नियंत्रण खो बैठा और बच्ची को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बच्ची दूर जाकर गिर पड़ी और उसके सिर व शरीर पर गंभीर चोटें आईं। इस हादसे की एक और त्रासद बात यह रही कि बाइक चालक ने बच्ची को बचाने की कोशिश में ब्रेक लगाए, लेकिन संतुलन खोने की वजह से वह खुद भी नाले में जा गिरा और गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों ने तत्काल बच्ची को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। घायल बाइक चालक को भी उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। सूचना मिलते ही जेवर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

बच्ची की मौत की खबर सुनते ही परिवार में मातम छा गया। मां बेहोश हो गई और पिता सदमे में आ गए। पड़ोसियों और ग्रामीणों की भीड़ घर के बाहर जमा हो गई। गांव में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश और दुख देखा जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गांव की सड़कों पर तेज रफ्तार बाइक चालकों की वजह से आए दिन इस तरह के हादसे होते रहते हैं। स्थानीय निवासी रामकिशोर (काल्पनिक नाम) ने बताया, “यह सड़क काफी संकरी है और यहाँ से तेज रफ्तार बाइकें गुजरती रहती हैं। बच्चे और बुजुर्ग हमेशा खतरे में रहते हैं। कई बार प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।”

जेवर में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर सवाल

यह घटना उस जेवर क्षेत्र में हुई है जो इन दिनों अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण के चलते चर्चा में है। तेजी से बढ़ रहे निर्माण कार्यों और वाहनों की बढ़ती आवाजाही के कारण इस क्षेत्र की सड़कों पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माणाधीन स्थलों पर रात के समय उचित प्रकाश व्यवस्था, बैरिकेडिंग और साइनबोर्ड लगाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस हादसे ने एक बार फिर यूपी में सड़क सुरक्षा के मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। समाजवादी पार्टी इस तरह की घटनाओं पर लगातार सरकार को घेरती रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा है कि यूपी की भाजपा सरकार में ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं होता। भाजपा सरकार को नियम लागू करने से कोई मतलब नहीं है, उनका सारा ध्यान वसूली और उगाही पर रहता है। उन्होंने यह भी कहा है कि यूपी में पुराने जर्जर वाहन सबके लिए खतरा बने हैं, नशे में ड्राइविंग पर जुर्माने के नाम पर केवल पैसा वसूला जा रहा है, और ट्रैफिक पुलिस चौराहों पर नियमों का पालन कराने की बजाय उगाही करने का इंतजार करती है। स्थानीय विधायकों और नेताओं से मुआवजे और सड़क सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की जा रही है। विपक्षी दलों ने इस घटना को “सरकारी लापरवाही और पुलिस की विफलता” करार देते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और बढ़ती चिंताएं

देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर सर्वोच्च न्यायालय भी गंभीर हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देश की कुल सड़कों का केवल दो प्रतिशत हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग हैं, लेकिन यहां करीब 30 प्रतिशत मौतें होती हैं। कोर्ट ने माना कि यह स्थिति सिस्टम की कमजोरियों को दिखाती है। हर एक जान की कीमत है और इसे बचाना सरकार की जिम्मेदारी है।

ग्रेटर नोएडा में बच्चों की सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला

यह कोई पहली घटना नहीं है। कुछ ही दिन पहले ग्रेटर नोएडा के दनकौर में 5 साल की मासूम बच्ची की उसी स्कूल बस से कुचलकर मौत हो गई थी, जिससे वह कुछ ही सेकंड पहले उतरी थी। हादसे के बाद चालक फरार हो गया था, जबकि परिजनों ने स्कूल की लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए थे। उस मामले में परिजनों का आरोप था कि बस में चालक के अलावा कोई हेल्पर मौजूद नहीं था। लगातार हो रही इन घटनाओं ने ग्रेटर नोएडा क्षेत्र की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

आम जनता का आक्रोश

इलाके के स्थानीय नागरिकों में इस हादसे को लेकर भारी गुस्सा है। लोगों का कहना है कि जेवर जैसे विकासशील क्षेत्र में जहाँ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बन रहा है, वहाँ की आंतरिक सड़कों पर न तो स्पीड ब्रेकर हैं और न ही ट्रैफिक निगरानी का कोई प्रबंध। बच्चों और बुजुर्गों के लिए सड़क पर चलना जोखिम भरा हो गया है। एक स्थानीय महिला ने रोते हुए कहा, “इस मासूम की जान का जिम्मेदार कौन है? क्या हमारे बच्चों को घर से बाहर निकलने का हक भी नहीं रहा?”

पुलिस की कार्रवाई

जेवर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बाइक जब्त कर ली गई है। घायल चालक से अस्पताल में पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और दोषी के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों की राय

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में स्पीड गवर्नर, रेजिडेंशियल जोन में वाहन गति की सीमा, सीसीटीवी निगरानी और नियमित ट्रैफिक पेट्रोलिंग जैसे उपायों को तत्काल लागू करने की जरूरत है। उनका यह भी मानना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए विद्यालयों और आवासीय क्षेत्रों के आसपास ‘स्कूल ज़ोन’ और ‘चाइल्ड सेफ्टी ज़ोन’ घोषित किए जाने चाहिए।

यह भी पढ़ें: हेपेटाइटिस-बी पीड़ित महिला का फेलिक्स हॉस्पिटल में सुरक्षित सिजेरियन, मां और नवजात दोनों स्वस्थ

यहां से शेयर करें