साओ पाउलो/ब्रासिलिया, ब्राजील में रविवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण में वामपंथी राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। उन्होंने दक्षिणपंथी सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर देश के इतिहास में पहली बार चौथा कार्यकाल हासिल किया। ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट (टीएसई) ने लगभग 100 प्रतिशत मतों की गिनती के बाद लूला को विजेता घोषित किया। लूला को करीब 51.8 प्रतिशत वैध वोट मिले, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो को लगभग 48.2 प्रतिशत। दोनों के बीच अंतर करीब 43-44 लाख वोटों का रहा।
यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि लूला पहले चरण में फ्लावियो से पीछे रहे थे। 4 अक्टूबर के पहले दौर में फ्लावियो को करीब 47 प्रतिशत और लूला को 45 प्रतिशत वोट मिले थे। 1989 में प्रत्यक्ष चुनाव बहाल होने के बाद यह पहली बार है जब पहले चरण में दूसरे स्थान पर रहने वाला उम्मीदवार दूसरे चरण में जीत हासिल करने में सफल रहा। 80 वर्षीय लूला मंगलवार को 81 वर्ष के हो जाएंगे और जनवरी 2027 में शपथ लेंगे। वे देश के सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति बनेंगे।
फ्लावियो बोल्सोनारो का इनकार और कानूनी चुनौती
फ्लावियो बोल्सोनारो ने हार स्वीकार नहीं की। उन्होंने कहा कि “इन परिस्थितियों में चुनाव के नतीजों को मानना असंभव है” और वे चुनाव को रद्द कराने के लिए कानूनी कार्रवाई करेंगे। उनका आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश क्रिस्टियानो जानिन (जो पहले लूला के वकील रह चुके हैं) ने मतदान के दौरान ही दो घंटे का विस्तार कर दिया, जिससे नियमों में बदलाव हो गया। फ्लावियो ने इसे “खेल के बीच में नियम बदलने” जैसा बताया और कहा कि इससे मतदाताओं के बीच समानता भंग हुई।
दिलचस्प बात यह है कि उनके अपने अभियान ने भी कुछ दक्षिणी राज्यों में भारी बारिश के कारण मतदान बढ़ाने की मांग की थी। विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े अंतर (2022 में उनके पिता जैयर बोल्सोनारो से लूला की जीत के मार्जिन से दोगुना) और दोनों पक्षों की विस्तार मांग के कारण अदालत में सफलता की संभावना कम है। फिर भी, यह रुख उनके पिता के 2022 के रवैये की याद दिलाता है, जब जैयर ने हार नहीं मानी थी और बाद में तख्तापलट की साजिश के आरोप में 27 साल की सजा सुनाई गई। लूला ने जीत के बाद कहा कि यह चुनाव “इनकारवाद और झूठ की हार” है। उन्होंने लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर जोर दिया।
बाजारों में प्रतिक्रिया: गिरावट की आशंका
निवेशक लूला की जीत को बाजार-अनुकूल नहीं मान रहे थे। पहले चरण में फ्लावियो की बढ़त के बाद शेयर बाजार और मुद्रा में तेजी आई थी। अब उम्मीद है कि वह रैली उल्टेगी। एशियाई कारोबार में नवंबर के ब्राजीलियन रियल फ्यूचर्स करीब 10 प्रतिशत गिरे, जबकि टोक्यो में लिस्टेड नोमुरा एनएफ इबोवेस्पा लिंक्ड ईटीएफ में 14-15 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि सोमवार को घरेलू बाजार खुलते ही तेज बिकवाली हो सकती है।
निवेशक राजकोषीय अनुशासन की स्पष्ट और विश्वसनीय प्रतिबद्धता चाहते हैं। लूला की टीम 2030 तक जीडीपी के करीब 1.3 प्रतिशत प्राथमिक बजट अधिशेष का लक्ष्य रख रही है, लेकिन विपक्षी बहुमत वाले कांग्रेस के साथ तालमेल चुनौतीपूर्ण होगा।
लूला के सामने पांच प्रमुख आर्थिक चुनौतियां
ब्राजील की अर्थव्यवस्था हाल के वर्षों में अपेक्षाओं से बेहतर रही है, लेकिन बढ़ता कर्ज और संरचनात्मक समस्याएं चौथे कार्यकाल को जटिल बना सकती हैं:
- बढ़ता सार्वजनिक ऋण: लूला के मौजूदा कार्यकाल में सार्वजनिक ऋण जीडीपी के 82 प्रतिशत से अधिक हो गया है (10 प्रतिशत अंक से ज्यादा की बढ़ोतरी)। अनिवार्य खर्चों के कारण बजट का बहुत छोटा हिस्सा ही समायोज्य रह गया है।
- उच्च ब्याज दरें और महंगाई: केंद्रीय बैंक की दर 13.75 प्रतिशत है, जबकि सालाना महंगाई 4.6 प्रतिशत पर बनी हुई है, जो सहनशीलता सीमा (1.5-4.5 प्रतिशत) से ऊपर है। बाजारों को उम्मीद है कि महंगाई 2029 तक 3 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर रह सकती है।
- घरों और व्यवसायों का भारी कर्ज: लगभग 8.4 करोड़ ब्राजीलियन और 93 लाख व्यवसाय कर्ज चुकाने में पीछे हैं (रिकॉर्ड स्तर)। ऊंची ब्याज दरों का असर साफ दिख रहा है।
- कांग्रेस में विरोध: हाल के चुनावों में दक्षिणपंथी ताकतें मजबूत हुई हैं। लूला को विपक्षी-बहुल कांग्रेस के साथ काम करना होगा, जहां बजट पर सांसदों का प्रभाव बढ़ गया है।
- कर सुधार और खर्च संतुलन: सामाजिक कार्यक्रमों (कल्याणकारी योजनाओं) को बनाए रखते हुए राजकोषीय सुधार लागू करना कठिन होगा। न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने और पेंशन खर्चों का दबाव भी बना रहेगा।
लूला का कार्यकाल जनवरी 2027 में शुरू होगा। देश राजनीतिक रूप से विभाजित है और आर्थिक दबाव बढ़ रहे हैं। उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे सामाजिक वादों और बाजारों की मांग के बीच कितना संतुलन बना पाते हैं। ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक बाजारों के लिए भी महत्वपूर्ण बना रहेगा।

