सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पुराना सराइकी लोकगीत छाया हुआ है। लोग इसे ‘तू सांवल फूल कस्तूरी’ या ‘छलरे छलरे वाल’ के नाम से खोज रहे हैं। यह कोई नया पॉप गाना नहीं, बल्कि पाकिस्तान के दक्षिणी पंजाब का पारंपरिक सराइकी लोकगीत है, जो पुरुष की खूबसूरती की बेहद काव्यात्मक तारीफ करता है।
मूल गायक और टीम
मूल रूप से यह गीत दिग्गज लोक गायक **शफाउल्लाह खान रोखड़ी** (1966-2020) की आवाज में सबसे लोकप्रिय हुआ। उन्होंने इसे 2017 के आसपास ‘कसूर’ एल्बम में गाया था। बोल **सुलीम बिस्मिल** (कुछ स्रोतों में स्वयं रोखड़ी भी) के माने जाते हैं। रोखड़ी प्रोडक्शन लेबल के तहत काम करते थे। उनके बेटे **जीशान खान रोखड़ी** ने भी ट्रिब्यूट वर्जन प्रस्तुत किया है। पुराने कलाकारों में **मुहम्मद हुसैन बंदियालवी** का भी नाम जुड़ा है। 2026 में वायरल होने का मुख्य कारण पाकिस्तानी गायिका शांजी सियाल (Shanzy Sial) और गिटारिस्ट मोहसिन लशारी (Mohsin Lashari / Lashari Waves) का अकॉस्टिक कवर है। इसमें शांजी की कोमल आवाज और सिंपल गिटार अकंपनीमेंट ने गीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाया। भारतीय पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने भी अपना वर्जन शेयर किया, जिससे भारत में ट्रेंड और तेज हुआ। कई अन्य कवर—अनुष्का गौतम, सूफी इरफान आदि—भी सामने आए।
बोल और मतलब
मुख्य लाइन:
तू सांवल फूल कस्तूरी, तेरी थी गई बहुत मशहूरी”
अर्थात—तुम सांवले रंग के फूल और कस्तूरी (कस्तूरी जैसी खुशबू) जैसे हो, तुम्हारी खूबसूरती की हर जगह चर्चा है।
आगे आता है:
– छलरे-छलरे वाल (घुंघराले बाल)
– मोढ़े रखदा ए काली शॉल
– हाथ चे नया रत्ता रुमाल
– तेरियां रीसां कौन करे (तुम्हारी बराबरी कौन कर सकता है)
यह गीत आमतौर पर महिला की सुंदरता की बजाय पुरुष प्रेमी की तारीफ करता है—घुंघराले बाल, काली शॉल, लाल रुमाल और उसकी अदाओं का जिक्र। ‘फूल’ सुंदरता का और ‘कस्तूरी’ आकर्षक खुशबू का रूपक है।
सोशल मीडिया पर शेयर और रील
शांजी सियाल के इंस्टाग्राम अकॉस्टिक वर्जन ने अक्टूबर 2026 की शुरुआत में 50 मिलियन से अधिक व्यूज और 6.5 मिलियन लाइक्स पार कर लिए। कुछ रिपोर्ट्स में इसे 80 मिलियन व्यूज तक पहुंचने का जिक्र भी है। यूट्यूब पर विभिन्न कवर करोड़ों व्यूज हासिल कर चुके हैं (एक फीमेल वर्जन अकेले 10 मिलियन+)। रील और शेयर की सटीक संख्या उपलब्ध नहीं, लेकिन ऑडियो इंस्टाग्राम, यूट्यूब शॉर्ट्स और टिकटॉक पर हजारों-लाखों रील्स में इस्तेमाल हो रहा है। भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ युवा इसे एस्थेटिक एडिट, ट्रांजिशन और रोमांटिक रील्स में इस्तेमाल कर रहे हैं। ट्रेंड सितंबर-अक्टूबर 2026 में तेज हुआ।
प्रतिक्रियाएं
लोगों को गीत की मेलोडी 1994 के बॉलीवुड गाने ‘ना कजरे की धार’ (मोहरा) से मिलती-जुलती लग रही है, हालांकि कोई आधिकारिक लिंक नहीं है। टिप्पणियों में इसे “दिल को छू लेने वाला”, “पुरुष सौंदर्य पर पहला ऐसा गाना”, “बॉर्डर पार संगीत की मिसाल” कहा जा रहा है। कई यूजर्स लिख रहे हैं कि पुराने लोकगीत को नई पीढ़ी ने अपना लिया। कुछ इसे “गरिबों का दर्द संगीत में” बता रहे हैं, तो कुछ सिर्फ इसकी सुरीली आवाज और काव्यात्मक बोल पर मुग्ध हैं। एक पुराना सराइकी लोकगीत साबित कर रहा है कि अच्छी धुन और सच्ची भावना को वायरल होने के लिए नई होने की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी बस एक नई पीढ़ी की नजर चाहिए होती है।
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