कीव/मॉस्को। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मानवीय साहस और कूटनीतिक हलचल दोनों एक साथ सामने आए हैं। एक ओर यूक्रेनी सैनिक कोस्टियान्टिन व्लासेंको की अविश्वसनीय जीवित रहने की कहानी ने दुनिया को झकझोर दिया है, तो दूसरी ओर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शांति वार्ता के एजेंडे को स्पष्ट करते हुए कहा है कि चर्चा केवल अस्थायी युद्धविराम तक सीमित न रहे, बल्कि रूस, यूक्रेन और पूरे यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था पर केंद्रित हो।
कोस्टियान्टिन व्लासेंको (49), क्रिवी रिह के रहने वाले और 30वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड के स्वयंसेवक सैनिक, खार्किव क्षेत्र के किल जोन में लगभग 491 दिनों (करीब 70 सप्ताह) तक अकेले फंसे रहे। वे एक कंक्रीट के ड्रेनेज पाइप में तैनात थे, जिसे ‘वेरडन’ कहा जाता था। फरवरी 2026 में उनके साथी की मौत के बाद वे पूरी तरह अकेले पड़ गए। रूसी बलों को उनकी स्थिति का पता था और वे बार-बार सरेंडर करने का दबाव डालते रहे, लेकिन व्लासेंको ने इनकार कर दिया।
बाद में रूसी ड्रोन से गिराए गए हथियार से उनके दोनों पैर बुरी तरह घायल हो गए। बायां पैर नेक्रोसिस के कारण सड़कर खुद अलग हो गया, जबकि दाएं पैर की हालत इतनी खराब हो गई कि उन्हें खुद चाकू से काटना पड़ा। उन्होंने बताया, “मैंने उसे ईंट पर रखा, चाकू लिया… आंखों से आंसू बह रहे थे, लेकिन काटना ही था। मैंने काट दिया।” बिना दोनों पैरों के भी उन्होंने अपना पोस्ट संभाला। भोजन और जरूरी सामान हवाई ड्रॉप से मिलता रहा। परिवार (पत्नी और बेटी) के ख्याल ने उन्हें जिंदा रखा।
पारंपरिक बचाव संभव नहीं था क्योंकि इलाका रूसी ड्रोनों और माइनफील्ड से भरा था। यूक्रेनी कमांड ने भारी हेक्साकॉप्टर ड्रोन (आमतौर पर गोला-बारूद या सामान पहुंचाने वाला) को बचाव के लिए संशोधित किया। अक्टूबर 2026 की शुरुआत में (रिपोर्ट्स के अनुसार 4 अक्टूबर के आसपास) यह ड्रोन उनके पास पहुंचा। निर्देशों के साथ फोन भी गिराया गया। व्लासेंको ने खुद को हार्नेस से बांधा, कैमरे की ओर ‘ओके’ और दिल का इशारा किया और उड़ान भरी। ड्रोन उन्हें करीब 11 से 15 किलोमीटर दूर सुरक्षित क्षेत्र तक ले गया। यह युद्ध के इतिहास में किसी सैनिक का ड्रोन से सीधा बचाव का पहला ज्ञात मामला माना जा रहा है। वे अब अस्पताल में उपचार के अधीन हैं।
इसी बीच कूटनीतिक मोर्चे पर भी हलचल है। 22 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से मुलाकात के एक दिन बाद पुतिन ने रूसी टेलीविजन पर साक्षात्कार में कहा कि यूक्रेन युद्ध के समाधान के लिए होने वाली वार्ता में सुरक्षा गारंटी पर जोर होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया, “इन वार्ताओं का लक्ष्य शांति समझौतों के अंतिम रूप में यूक्रेन और रूस की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, न कि किसी अस्थायी युद्धविराम का नतीजा। हम इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए संपर्क फिर से शुरू करने को तैयार हैं।”
पुतिन ने विटकॉफ के इस सुझाव से भी सहमति जताई कि चर्चा पूरे यूरोप की सुरक्षा संरचना (architecture of European security) तक विस्तारित होनी चाहिए। रूस नवंबर में अमेरिकी मध्यस्थता वाली त्रिपक्षीय वार्ता (रूस-यूक्रेन-अमेरिका) फिर से शुरू करने को तैयार है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेन्स्की भी नवंबर की शुरुआत में ऐसी वार्ता के लिए तैयार बताए गए हैं।
हालांकि वार्ता की बातों के बावजूद मोर्चे पर तनाव बरकरार है। विटकॉफ-पुतिन मुलाकात के कुछ घंटों के अंदर ही रूस ने कीव और यूक्रेन के कई क्षेत्रों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें नागरिक हताहत हुए। यूक्रेन ने भी जवाबी ड्रोन हमले किए। दोनों पक्ष शांति की बात करते हुए भी सैन्य दबाव बनाए रखने की रणनीति अपनाए हुए दिख रहे हैं। व्लासेंको की कहानी युद्ध की क्रूरता और मानव साहस दोनों को उजागर करती है, जबकि पुतिन के बयान बताते हैं कि कूटनीतिक प्रक्रिया जटिल और व्यापक सुरक्षा मुद्दों से जुड़ी हुई है। युद्ध जारी है और आगे की वार्ताओं का नतीजा अभी अनिश्चित है।
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