नई दिल्ली/कैलिफोर्निया। एलन मस्क की नई टेस्ला रोडस्टर ने सुपरकार की परिभाषा को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स कार ने SpaceX के सहयोग से विकसित रॉकेट-शैली के थ्रस्टर्स की मदद से जमीन से उठकर हवा में घूमने (रोटेशन) और फिर लैंड करने का प्रदर्शन किया। हालांकि, इस तकनीक का मतलब वह नहीं है जो “रॉकेट” शब्द सुनकर समझ आता है।
ईंधन नहीं, संपीड़ित हवा है असली राज
इस सिस्टम में रॉकेट फ्यूल नहीं जलाया जाता। इसके बजाय यह संपीड़ित हवा (कंप्रेस्ड एयर), उच्च दबाव वाली गैस और न्यूटन के गति के तीसरे नियम पर काम करता है। नोजल से तेज गति से गैस बाहर निकलने पर विपरीत दिशा में बल पैदा होता है, जो कार को आगे या ऊपर धकेलता है। अनावरण के दौरान सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, रोडस्टर के रॉकेट कॉन्फिगरेशन में कंपोजिट प्रेशर वेसल्स में करीब 250-260 किलोग्राम संपीड़ित हवा जमा रहती है। वाहन के चारों ओर लगे 10 नोजल उसकी गति को नियंत्रित करते हैं।
कोल्ड-गैस थ्रस्टर क्या होते हैं?
पारंपरिक रॉकेट इंजन ईंधन और ऑक्सीडाइजर जलाकर गर्म और तेज एक्जॉस्ट बनाते हैं। इसके उलट, कोल्ड-गैस थ्रस्टर में किसी तरह का दहन (कंबशन) नहीं होता। ऊर्जा उस गैस से मिलती है जो पहले से ही दबाव में स्टोर की गई होती है। इससे सिद्धांत सरल हो जाता है, हालांकि इतने ऊंचे दबाव के लिए खास टैंक, वाल्व और प्लंबिंग जरूरी होती है।
कार जमीन से कैसे उठती है?
ऊपर उठने के लिए थ्रस्ट का कुल बल वाहन के वजन से ज्यादा होना चाहिए। हवा में टिके रहने के लिए थ्रस्ट लगभग वजन के बराबर रखना होता है। रोडस्टर के थ्रस्टर तीन काम कर सकते हैं:
- लिफ्ट: थ्रस्ट को नीचे की ओर देने से कार ऊपर उठती है।
- एटीट्यूड कंट्रोल: छोटे या अलग जगह लगे थ्रस्टर कार को घुमाते हैं और मैन्यूवर के दौरान उसकी दिशा सुधारते हैं।
- स्टेबिलाइजेशन और लैंडिंग: सही समय पर दिए गए छोटे बर्स्ट रोटेशन और उतरने की गति को नियंत्रित करते हैं।
अंतरिक्ष यान भी अपनी दिशा बदलने के लिए ऐसे ही कोल्ड-गैस सिस्टम इस्तेमाल करते हैं। फर्क यह है कि अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी होती है, जबकि कार को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण और वायुमंडलीय परिस्थितियों से जूझना पड़ता है।
पारंपरिक रॉकेट इंजन क्यों नहीं?
कोल्ड-गैस सिस्टम का सबसे बड़ा नुकसान इसकी दक्षता है। गैस बाहर निकलते समय फैलती है और सिस्टम का दबाव धीरे-धीरे घटता जाता है। सीमित गैस भंडार वाली कार अनंत समय तक थ्रस्ट पैदा नहीं कर सकती। टेस्ला ने ऑनबोर्ड कंप्रेसर से सिस्टम को दोबारा भरने की बात कही है, लेकिन इसका व्यावहारिक प्रदर्शन और टिकाऊपन अभी साबित होना बाकी है।
क्या यह सचमुच उड़ने वाली कार है?
पारंपरिक अर्थ में नहीं। प्रदर्शन में कुछ पलों के नियंत्रित हवाई मैन्यूवर दिखे, न कि हवाई जहाज या हेलीकॉप्टर जैसी लगातार उड़ान। इस सिस्टम से जुड़ी इंजीनियरिंग चुनौतियां भी हैं, जैसे स्थिरता, ऊर्जा खपत, शोर, सुरक्षा और थ्रस्टर फेल होने की स्थिति के नतीजे। टेस्ला ने अभी यह नहीं दिखाया है कि यह सिस्टम सामान्य परिस्थितियों में सुरक्षित और भरोसेमंद ढंग से काम कर सकता है।
2028 में प्रोडक्शन का लक्ष्य
कंपनी ने 2028 तक प्रोडक्शन का लक्ष्य रखा है, लेकिन अंतिम वाहन की क्षमताओं की पुष्टि होना बाकी है। फिलहाल रोडस्टर इलेक्ट्रिक कार इंजीनियरिंग और स्पेसक्राफ्ट प्रोपल्शन तकनीक को मिलाने का एक अनोखा प्रयोग है। यह तकनीक आगे चलकर कारों की एक व्यावहारिक सुविधा बनेगी या सिर्फ एक इंजीनियरिंग तमाशा बनकर रह जाएगी, यह सवाल अभी खुला है।
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