“RSS Go Back”: केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय में वंदे मातरम सेमिनार पर छात्रों का हल्ला-बोल

कासरगोड (केरल), कासरगोड जिले के पेरिया स्थित केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUK) में मंगलवार को माहौल तनावपूर्ण रहा। वंदे मातरम के 150 वर्ष पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार के विरोध में छात्र संगठनों ने परिसर में प्रदर्शन किया। SFI, NSUI, MSF और AISF ने मिलकर “RSS गो बैक” के नारे लगाए और कार्यक्रम न होने देने का एलान किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य गेट और सेमिनार स्थल के रास्तों को घेर लिया।

विवाद की जड़ क्या है?

दो दिवसीय सेमिनार विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी के सेमिनार हॉल में हो रहा है। साहित्य अकादमी की आधिकारिक जानकारी के अनुसार उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंदकुमार हैं। अखिल भारतीय साहित्य परिषद को सह-आयोजक बनाए जाने से भी छात्र संगठन नाराज़ हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि एक केंद्रीय विश्वविद्यालय के आयोजन में किसी विशेष विचारधारा से जुड़े लोगों की भागीदारी संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है। उनका आरोप है कि यह परिसर के “भगवाकरण” की कोशिश है। SFI का रुख यह भी है कि उसे वंदे मातरम के ऐतिहासिक महत्व को याद करने या पहले दो छंदों के साथ कार्यक्रम करने पर आपत्ति नहीं है। संगठन का विरोध पूरे गीत के गायन को एक खास वैचारिक या धार्मिक व्याख्या से जोड़ने के प्रयास पर है।

पंजीकृत छात्रों को रोके जाने का आरोप

आंदोलन तब और तेज़ हुआ जब आरोप लगा कि पंजीकरण कराने वाले छात्रों को भीतर नहीं जाने दिया गया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि विश्वविद्यालय का पहचान पत्र दिखाने वाले छात्रों को रोका गया, जबकि ABVP के सदस्यों को प्रवेश मिला। छात्रों के अनुसार पुलिस ने कहा कि कुलपति के निर्देश पर छात्रों को अंदर नहीं जाने देना है। खुद को डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स बताने वाले एक अधिकारी ने कहा कि उन्हें इसकी वजह नहीं पता और आयोजकों से पूछना होगा। ये सभी बातें प्रदर्शनकारियों के आरोप हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक विस्तृत आधिकारिक सफाई नहीं मिली है।

पुलिस से धक्का-मुक्की, भारी सुरक्षा तैनात

सेमिनार हॉल में घुसने की कोशिश के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच तीखी धक्का-मुक्की हुई। परिसर में वाटर कैनन और स्ट्राइक फोर्स तैनात की गई। छात्र झंडे लहराते और नारे लगाते रहे, जबकि कार्यक्रम स्थल के आसपास भारी पुलिस बल मौजूद रहा।

कानूनी चेतावनी से पहले ही बढ़ गया था तनाव

मामला सोमवार को ही गरमा गया था। विश्वविद्यालय ने वंदे मातरम गायन में बाधा डालने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी, जबकि छात्र संगठनों ने जे. नंदकुमार को रोकने की योजना बनाई थी। छात्रों ने इस सर्कुलर को डराने की कोशिश बताया। राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2026 ने वंदे मातरम को भी कानूनी संरक्षण दिया है, जिसका हवाला प्रशासन की चेतावनी के संदर्भ में दिया जा रहा है।

राज्य में पहले से गर्म है वंदे मातरम की बहस

यह विवाद अकेला नहीं है। गृह मंत्रालय ने गीत के आधिकारिक छह छंदों वाले संस्करण को निर्धारित किया है। केरल के मंत्रियों का कहना रहा है कि संविधान सभा द्वारा अपनाए गए दो छंद ही गाए जाएंगे। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली सरकार ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में वंदे मातरम को शामिल नहीं किया। इससे पहले तिरुवनंतपुरम में केरल विश्वविद्यालय के बाहर भी इसी मुद्दे पर SFI का प्रदर्शन हुआ था। उस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। 5 सितंबर को नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का विरोध किया और राज्य सरकार पर संघ परिवार के एजेंडे के अनुकूल नीतियों का आरोप लगाया।

आगे क्या?

छात्र संगठनों ने आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन, पुलिस और आयोजकों की ओर से घटनाक्रम पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतज़ार है। सेमिनार दो दिन चलना है, इसलिए बुधवार को भी परिसर में तनाव बने रहने की आशंका है।

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