नोएडा। खुद को ‘स्मार्ट सिटी’ के तौर पर पेश करने वाले नोएडा की बुनियादी सुविधाओं को लेकर सेक्टर 105 के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बीते एक दशक में शहर को विकास के मॉडल के तौर पर पेश तो किया गया, लेकिन आम नागरिक, मध्यम वर्ग और भूमिदाता किसान आज भी बुनियादी सुविधाओं और पारदर्शी व्यवस्था के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
हिंडन-यमुना बनीं दुर्गंधयुक्त नाला
कृष्णात्रेय के अनुसार, शहर की जीवनदायिनी हिंडन और यमुना नदियां उपेक्षा का शिकार होकर गंदे नाले में तब्दील हो चुकी हैं। उनका आरोप है कि शहरभर के सीवर का पानी बिना ट्रीटमेंट के सीधे नदियों में छोड़ा जा रहा है, जिससे नदी किनारे खड़ा होना भी मुश्किल हो गया है।
बिजली व्यवस्था पुरानी, नई नीति से बढ़ी परेशानी
उन्होंने बिजली ढांचे को 25 साल पुराना बताते हुए कहा कि हल्की बारिश या आंधी में ही पूरी आपूर्ति ठप हो जाती है। साथ ही आरोप लगाया कि नई उपभोक्ता नीति के तहत पूरे शहर के लिए बिल सुधार हेतु सिर्फ एक केंद्र बनाया गया है, जबकि पूरा सिस्टम केवल दो एक्सियन और सीमित स्टाफ के भरोसे चल रहा है।
आवास और किसान मुआवजे के मुद्दे लंबित
कृष्णात्रेय ने दावा किया कि बीते दस वर्षों में मध्यम वर्ग के लिए एक भी नई एलआईजी, एमआईजी या एचआईजी आवासीय योजना शुरू नहीं हुई। वहीं किसानों की 5-10% आबादी भूखंड और उचित मुआवजे जैसी मांगें भी वर्षों से लंबित हैं।
अस्पताल और स्कूलों का बुरा हाल
उन्होंने सरकारी अस्पताल को गंदगी और सुविधाओं की कमी से जूझता हुआ बताते हुए इसे महज ‘रेफरल केंद्र’ करार दिया। सरकारी स्कूलों और डिग्री कॉलेजों में भी शिक्षकों व बुनियादी ढांचे की भारी कमी का आरोप लगाया।
सड़कें और सरकारी दफ्तर भी बदहाल
कृष्णात्रेय के मुताबिक, मुख्य कार्यालयों को छोड़ दें तो शहर की सड़कें गड्ढों से भरी हैं और नाले कचरे से भरे पड़े हैं। रजिस्ट्री दफ्तर समेत कई विभागों में भी कुप्रबंधन की शिकायतें आम हैं। आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने प्रशासन से मांग की है कि बिजली ढांचे को मजबूत किया जाए, स्वास्थ्य-शिक्षा सेवाओं में सुधार लाया जाए और नीतियों को नागरिकों के अनुकूल बनाया जाए।
यह भी पढ़ें: यूपी में नशे के कारोबार पर बैन की मांग, समाजसेवी ने सीएम योगी को लिखा पत्र

