Delhi news राजधानी में महिलाओं के साथ सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली छेड़खानी और उत्पीड़न पर अब पहले से कहीं ज्यादा सख्ती बरती जाएगी। पुलिस मुख्यालय के विमर्श हॉल में विशेष पुलिस आयुक्त (एसपीयूडब्ल्यूएसी) की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी जिलों के डीसीपी को “शिष्टाचार” एंटी-इव टीजिंग दस्तों को और मजबूत करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में तय हुआ कि हर जिले में भीड़भाड़ और संवेदनशील इलाकों की नियमित पहचान व मैपिंग की जाएगी, ताकि इन “हॉटस्पॉट्स” पर सही समय पर सही तैनाती हो सके। दस्तों की तैनाती को घुमा-घुमाकर करने का निर्देश दिया गया है, जिससे अधिकतम इलाके पुलिस की नजर में रहें।
**अब सादी वर्दी में महिला पुलिसकर्मी बनेंगी “डिकॉय”**
बैठक की सबसे खास बात यह रही कि सादे कपड़ों में महिला पुलिसकर्मियों को डिकॉय के रूप में तैनात करने का फैसला लिया गया है, जिससे शोहदों को रंगे हाथों पकड़ना आसान होगा। इसके साथ ही बसों और अन्य सार्वजनिक परिवाहनों में औचक जांच अभियान चलाए जाएंगे — ड्राइवर, कंडक्टर और यात्रियों से बातचीत करके आदतन अपराधियों की पहचान की जाएगी और शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
**फहअ, मार्केट एसोसिएशन और वॉलंटियर्स भी जुड़ेंगे मुहिम से**
पुलिस ने स्थानीय निवासी कल्याण संघों मार्केट वेलफेयर एसोसिएशनों और स्वयंसेवकों को भी अभियान से जोड़ने पर जोर दिया, ताकि संवेदनशील स्थानों की पहचान और जन-सहभागिता से घटनाओं की रिपोर्टिंग बेहतर हो सके।
**पीड़िता की गरिमा सबसे पहले — बिना शर्मिंदगी के मिलेगी मदद**
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दस्तों में तैनात कर्मी संवेदनशील, सहानुभूतिपूर्ण और स्वप्रेरित होने चाहिए, और पीड़िताओं को किसी भी तरह की अनावश्यक सार्वजनिक शर्मिंदगी से बचाया जाना चाहिए।
बैठक में यह भी दोहराया गया कि इस पूरी मुहिम का मकसद सिर्फ कानून लागू करना नहीं, बल्कि महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों के लिए एक सुरक्षित, भरोसेमंद और आत्मविश्वास से भरा माहौल तैयार करना है। सभी जिला डीसीपी को दस्तों की नियमित निगरानी और निदेर्शों के पूर्ण पालन के लिए जवाबदेह बनाया गया है।
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