नोएडा, हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में बिजली चोरी और अवैध कनेक्शन के कथित नेटवर्क पर बिजली निगम ने अब कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। सेक्टर-63 बिजली सबस्टेशन के अवर अभियंता (जेई) अनुज कुमार की शिकायत पर सेक्टर-63 थाने में पहला मुकदमा दर्ज किया गया है। एफआईआर में बिजली निगम के तीन जेई, एक टीजी-2, छह लाइनमैन और 13 अन्य लोगों समेत कुल 23 आरोपियों को नामजद किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, भारतीय विद्युत अधिनियम और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
छिजारसी से पर्थला तक फैला था नेटवर्क
एफआईआर के अनुसार, छिजारसी कॉलोनी, छिजारसी, चोटपुर, पर्थला और आसपास के हिंडन डूब क्षेत्र में अवैध बिजली कनेक्शन देने, तारों का नेटवर्क बिछाने और बिजली चोरी कराने की गतिविधियां चल रही थीं। आरोप है कि कुछ बिजलीकर्मियों और स्थानीय लोगों की मिलीभगत से लोगों को अनधिकृत कनेक्शन दिए गए और उनसे बिजली के बदले नियमित रूप से रकम वसूली गई। पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि कथित नेटवर्क में किस आरोपी की क्या भूमिका थी, अवैध कनेक्शन किस प्रक्रिया से दिए गए और वसूली की रकम किस स्तर तक पहुंचती थी। अधिकारियों के मुताबिक एफआईआर में शामिल नाम शुरुआती जांच और विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर दर्ज किए गए हैं। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
13 हजार अवैध कनेक्शनों का दावा
डूब क्षेत्र में बिजली कनेक्शनों को लेकर लखनऊ में शिकायत के बाद स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन, उत्तर प्रदेश ने मामले की जांच कराई थी। जांच में छिजारसी और आसपास के क्षेत्रों में करीब 13 हजार अवैध बिजली कनेक्शन होने की बात सामने आई। अधिकारियों ने अनुमान जताया कि बिजली चोरी और अनधिकृत आपूर्ति से हर महीने करीब 6.50 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा था। मामला केवल राजस्व हानि तक सीमित नहीं है। खुले तारों, असुरक्षित जोड़ और अस्थायी लाइनों से आग लगने, करंट लगने और शॉर्ट सर्किट का खतरा भी बना हुआ था। इसके अलावा डूब क्षेत्र में अनधिकृत बिजली नेटवर्क के कारण विद्युत व्यवस्था, सरकारी संपत्ति और बिजली विभाग के कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी सवाल उठे हैं।
200 किलोवाट के कनेक्शन से कई घरों को सप्लाई
अभियान के दौरान बिजली निगम की टीमों को ऐसे मामले भी मिले, जहां एक बड़े कनेक्शन से कई घरों को अनधिकृत रूप से बिजली सप्लाई दी जा रही थी। पर्थला क्षेत्र में करीब 200 किलोवाट के कनेक्शन से बड़ी संख्या में घरों को बिजली दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। एक कार्रवाई में 150 से अधिक घरों तक अवैध सप्लाई पहुंचने का आरोप सामने आया था।
अधिकारियों ने अभियान के दौरान बड़ी संख्या में अवैध तार, केबल और उपकरण हटाए। अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार, छिजारसी, चोटपुर, सदुल्लापुर और पर्थला क्षेत्र में तीन से चार दिन की कार्रवाई में 3,000 से अधिक अवैध कनेक्शन काटे गए, जबकि कुछ रिपोर्टों में यह संख्या 5,000 से अधिक बताई गई है। अभियान के दौरान 40 से अधिक मुकदमे दर्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
कार्रवाई के बाद विरोध, बिजली आपूर्ति पर संकट
अवैध कनेक्शन काटे जाने के बाद डूब क्षेत्र की 40 से अधिक कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को बिजली संकट का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन, कैंडल मार्च और पंचायत के जरिए प्रशासन से राहत की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कई परिवार वर्षों से इन इलाकों में रह रहे हैं और बिजली कटने से बच्चों की पढ़ाई, पानी की आपूर्ति तथा रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, प्रशासन और बिजली निगम का तर्क है कि हिंडन का डूब क्षेत्र पर्यावरणीय और बाढ़ नियंत्रण की दृष्टि से संवेदनशील है। वर्ष 2017 के राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के बाद ऐसे क्षेत्रों में निर्माण और स्थायी सुविधाओं को लेकर नियम सख्त हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि स्थायी बिजली सुविधा मिलने से डूब क्षेत्र में अवैध बसावट और अतिक्रमण को बढ़ावा मिल सकता है।
अस्थायी कनेक्शन की व्यवस्था शुरू
विरोध और मानवीय आधार पर बिजली संकट को देखते हुए विद्युत निगम ने डूब क्षेत्र में अस्थायी कनेक्शन देने की प्रक्रिया शुरू की है। सेक्टर-63 सबस्टेशन से छिजारसी, चोटपुर, बहलोलपुर और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों से आवेदन लिए जा रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अधिकतम 2 किलोवाट तक का सिंगल-फेज कनेक्शन दिया जाएगा। इसके लिए प्रीपेड स्मार्ट मीटर और लगभग 1,600 रुपये प्रति किलोवाट की दर का प्रावधान बताया गया है। आवेदकों से आधार कार्ड, मकान से जुड़े दस्तावेज और घर की तस्वीर मांगी जा रही है। इस प्रक्रिया के तहत अब तक 625 से अधिक उपभोक्ताओं को वैध कनेक्शन दिए जाने की जानकारी है। हालांकि, अस्थायी कनेक्शन की व्यवस्था के लिए औपचारिक सरकारी आदेश का इंतजार बताया गया है। बिजली निगम के अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य अवैध आपूर्ति पर रोक लगाते हुए लोगों को नियंत्रित और मीटर आधारित बिजली उपलब्ध कराना है।
जांच में विभागीय भूमिका पर भी नजर
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि एफआईआर में बिजली निगम के कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया गया है। तीन जेई, एक टीजी-2 और छह लाइनमैन के नाम शामिल होने से विभागीय निगरानी और आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच एजेंसियां यह पता करेंगी कि:
अवैध कनेक्शन किसके निर्देश पर दिए गए।
बिजली की लाइनें और मीटर किसने लगाए।
उपभोक्ताओं से कथित वसूली कौन कर रहा था।
बिजली चोरी की जानकारी विभागीय स्तर पर पहले क्यों नहीं पकड़ी गई।
सरकारी राजस्व को हुए वास्तविक नुकसान की राशि कितनी है।
पुलिस और बिजली विभाग की जांच के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी, दस्तावेजों की जांच और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल आगे बढ़ सकती है। फिलहाल सभी आरोपी कानून की नजर में तब तक दोषी नहीं माने जाएंगे, जब तक अदालत में आरोप साबित न हो जाएं।
आगे की चुनौती
हिंडन डूब क्षेत्र का विवाद अब तीन मोर्चों पर खड़ा है—बिजली चोरी पर कार्रवाई, हजारों परिवारों को वैध आपूर्ति और पर्यावरणीय नियमों का पालन। प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि अवैध नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त किया जाए, लेकिन कार्रवाई के दौरान आम परिवारों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित न होना पड़े। स्थायी समाधान के लिए डूब क्षेत्र की सीमा, भूमि उपयोग, बस्तियों की वैधता और बिजली कनेक्शन की नीति पर राज्य सरकार, नोएडा प्राधिकरण, सिंचाई विभाग और विद्युत निगम को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने होंगे। तब तक अस्थायी कनेक्शन और कड़ी निगरानी के जरिए व्यवस्था संभालने की कोशिश की जा रही है।
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