रियाद। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सोमवार को सऊदी अरब पर एक बार फिर भारी मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। उन्होंने दक्षिणी सऊदी अरब के खामिस मुशैत स्थित सैन्य एयरबेस को निशाना बनाया। हूतियों का दावा है कि उन्होंने विमान हैंगर, रडार सिस्टम, रनवे और गोला-बारूद डिपो पर दर्जनों हमले किए। यह जवाबी कार्रवाई सऊदी अरब के यमन में हवाई हमलों के जवाब में बताई जा रही है।सऊदी अधिकारियों ने खामिस मुशैत सहित दक्षिणी तीन अन्य शहरों में आपातकालीन अलर्ट जारी किया। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के अनुसार इन हमलों में 13 नागरिक घायल हुए हैं।
हूती विद्रोही लाल सागर तट पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं। हाल के दिनों में उन्होंने पेरिम द्वीप पर कब्जा कर लिया है, जो लाल सागर के मुहाने पर स्थित है। यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के अधिकारियों के अनुसार हूती अब पश्चिमी तट के लगभग पूरे हिस्से पर प्रभावी नियंत्रण बनाए हुए हैं। सऊदी और यमनी वायुसेना हूती ठिकानों पर हवाई हमले बढ़ा रही है, खासकर ऐतिहासिक बंदरगाह मोचा के आसपास, लेकिन हूतियों की प्रगति रोकने में पूरी सफलता नहीं मिली है। इस बीच, खाड़ी अरब देशों ने ईरान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने संबंधी प्रस्तावित वार्ता स्थगित कर दी है। ओमान में होने वाली यह बैठक सोमवार को तय थी, लेकिन ओमान ने इसे टाल दिया। ईरान का कहना है कि यह सऊदी अरब के अनुरोध पर किया गया। होर्मुज जलडमरूमध्य युद्ध शुरू होने (28 फरवरी) के बाद से ज्यादातर बंद है और पहले यहां से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल निर्यात होता था।
गुरुवार को सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन पर हुए हवाई हमले से यह पाइपलाइन बंद हो गई है। रियाद ने इसके लिए इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया को जिम्मेदार ठहराया है। यह पाइपलाइन होर्मुज को बाईपास करने के लिए बनाई गई थी। लंबे समय तक बंद रहने पर वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 4 प्रतिशत प्रभावित हो सकता है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें 4 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी क्राउन प्रिंस से बात की है, लेकिन वाशिंगटन अभी तक सीधी सैन्य मदद देने से हिचकिचा रहा है। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति और शिपिंग मार्गों पर और दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
यह भी पढ़ें: AI खर्च में मंदी के डर से निवेशक चिंतित, सेमीकंडक्टर शेयरों में गिरावट

