बिल्डर की दादागीरी या अफसरों की साठगांठ?

नोएडा, सेक्टर-73 स्थित शौर्य फार्म बैंक्विट हॉल से सेक्टर-122 तक जाने वाली सर्विस रोड पर बिल्डर की मनमानी स्थानीय निवासियों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। निर्माणाधीन डी मार्ट प्रोजेक्ट के लिए सड़क पर ड्रम, निर्माण सामग्री और प्रोजेक्ट से निकला कबाड़ डंप कर रास्ते का बड़ा हिस्सा बंद कर दिया गया है। इससे आईथम-73 और एंथोरियम के पास कम्युनिटी सेंटर तक का रास्ता बेहद संकरा हो गया है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, सर्विस लेन लंबे समय से बाधित है। रास्ता बंद होने के कारण लोगों को सेक्टर-73 स्थित महादेव अपार्टमेंट के सामने से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे मुख्य सड़क पर ट्रैफिक का दबाव और जाम बढ़ गया है। सपाइयों के कार्यकर्ताओं का कार्यालय ए स्क्वायर मॉल, सेक्टर-73 के पास सर्फबाद वाले कट से सेक्टर-122 होते हुए पर्थला सीएनजी चौक तक जाने वाली यह सर्विस रोड अतिक्रमण की शिकार है।

सेक्टर-122 पीके के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष भूषण शर्मा ने बताया कि सर्विस रोड खुलवाने के लिए नोएडा प्राधिकरण के जीएम अरुण अरोड़ा से शिकायत की गई है। उन्होंने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि निवासियों का कहना है कि केवल रास्ता खुलवाना काफी नहीं है। इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बावजूद आईएएस-आईपीएस अधिकारी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे। स्थानीय जनता का आरोप है कि नोएडा सीईओ कृष्ण करुणेश और बिल्डर के बीच मिलीभगत हो सकती है। नोएडा सपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं की भी मिलीभगत का संदेह जताया जा रहा है, वरना इतने महीनों से सर्विस रोड बंद नहीं रहती।

साफ हवा रैंकिंग पर भी सवाल
इसी बीच साफ हवा सर्वेक्षण में 3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों में नोएडा देश के टॉप-10 में 8वें पायदान पर आने के बाद लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया है। सर्वे की फाइलों में चमकता नोएडा जमीन पर गड्ढे, धूल, टूटी सड़कों, जाम और कूड़े के ढेर से जूझ रहा है। सेक्टर-58, 59, 62, 63 और 64 जैसे औद्योगिक-आवासीय क्षेत्रों में सड़कों के किनारे कूड़ा, उड़ती धूल और लगातार जाम आम बात हो गई है। पिछले दो साल से सड़कों की रिसर्फेसिंग नहीं हुई। फरवरी में करीब 400 करोड़ के टेंडर निकाले गए, लेकिन प्रक्रिया पूरी होने तक बारिश शुरू हो गई। फरवरी-मार्च में ही स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम आई थी। लोग पूछ रहे हैं कि जब सड़कों का हाल इतना खराब है तो रिपोर्ट इतनी सकारात्मक कैसे आ गई? क्या सर्वे सिर्फ वीआईपी इलाकों तक सीमित रहा?

नोएडा प्राधिकरण के पास 8 स्वीपिंग मशीनें और 4 हजार से ज्यादा सफाईकर्मी हैं, फिर भी सफाई व्यवस्था बेपटरी बताई जा रही है। जीएम एसपी सिंह ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। बारिश रुकते ही सड़कों की मरम्मत शुरू की जाएगी। कूड़ा फेंकने की शिकायतों पर पेट्रोलिंग टीम भी गठित कर दी गई है। स्थानीय निवासी मांग कर रहे हैं कि सर्विस रोड तुरंत खोली जाए, निर्माण सामग्री हटाई जाए और सफाई-मरम्मत का काम प्राथमिकता से पूरा किया जाए।

यह भी पढ़ें: चलती स्विफ्ट कार में लगी आग, युवकों ने पानी डालकर बुझाई

यहां से शेयर करें