बसपा में आकाश आनंद की छुट्टी, एक तरह बुआ तो दूसरी तरफ ससुर, अब मायावती के फैसले ने बढ़ाई उत्तराधिकारी की चर्चा

mayavathi :

लखनऊ/नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी में परिवार और संगठन के बीच चल रही खींचतान अब एक बड़े राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है, जबकि कुछ ही दिन पहले उनके छोटे भाई ईशान आनंद को महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी दी गई थी। ऐसे में बसपा के भीतर नेतृत्व की अगली पीढ़ी को लेकर नई चर्चाएं तेज हो गई हैं।

यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कभी मायावती ने आकाश आनंद को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाकर बसपा की अगली पीढ़ी का चेहरा पेश किया था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में आकाश को पार्टी में लगातार पद मिलने और फिर हटाए जाने का सिलसिला चलता रहा। अब तीसरी बड़ी कार्रवाई के बाद उन्हें पार्टी से ही निष्कासित कर दिया गया है।

अशोक सिद्धार्थ ने लिया संन्यास, लेकिन आकाश को नहीं मिली वापसी

आकाश आनंद के ससुर और बसपा के वरिष्ठ नेता रहे अशोक सिद्धार्थ ने 10 सितंबर 2026 को राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की। यह घोषणा उस घटनाक्रम के बाद आई जिसमें मायावती ने संकेत दिया था कि अशोक सिद्धार्थ के सक्रिय राजनीति से हटने के बाद ही आकाश आनंद को पार्टी में स्वतंत्र भूमिका देने पर विचार किया जा सकता है।

लेकिन राजनीतिक घटनाक्रम ने इसके बाद बिल्कुल अलग मोड़ ले लिया। अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बावजूद मायावती ने आकाश आनंद को बसपा में वापस लेने के बजाय उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। मायावती ने आकाश पर पार्टी और बहुजन आंदोलन की अपेक्षाओं के अनुरूप काम नहीं करने तथा ‘डबल माइंड’ से काम करने जैसे गंभीर आरोप लगाए।

यानी जिस संन्यास को आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य के लिए रास्ता खोलने वाला कदम माना जा रहा था, उसी के बाद आकाश की बसपा से दूरी और बढ़ गई।

आकाश के बाद ईशान आनंद पर बढ़ा भरोसा?

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा ईशान आनंद की हो रही है। आकाश के छोटे भाई ईशान को सितंबर 2026 में बसपा संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई। रिपोर्टों के मुताबिक उन्हें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़कर अन्य राज्यों में पार्टी के संगठनात्मक कामकाज की समीक्षा की जिम्मेदारी मिली है।

बताया गया है कि पार्टी की संगठनात्मक व्यवस्था के तहत ईशान को कई राज्यों में संगठन की स्थिति देखने, बैठकों में हिस्सा लेने और अपनी रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी दी गई है। इससे साफ है कि मायावती ने उन्हें केवल पार्टी मंच पर दिखने वाला चेहरा नहीं रखा, बल्कि संगठन के काम में सक्रिय भूमिका देना शुरू कर दिया है।

ईशान आनंद इससे पहले भी मायावती की बैठकों में दिखाई दे चुके हैं। जनवरी 2025 में मायावती ने उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सामने पेश किया था। उस समय से ही उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें लगनी शुरू हो गई थीं।

क्या मायावती ने बदली उत्तराधिकारी की रणनीति?

आकाश आनंद को लेकर मायावती का रुख कई बार बदला है। 2023 में आकाश को पार्टी के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर पेश किया गया था और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारियां दी गईं। लेकिन इसके बाद उन्हें कई बार पद से हटाया गया और फिर वापस जिम्मेदारी दी गई। सितंबर 2026 में एक बार फिर उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया और अब पार्टी से भी निकाल दिया गया है।

इसके ठीक बाद ईशान आनंद को महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी दिया जाना राजनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि मायावती ने अभी आधिकारिक तौर पर ईशान आनंद को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है, इसलिए उन्हें निश्चित रूप से उत्तराधिकारी मान लेना जल्दबाजी होगी।

लेकिन घटनाक्रम यह जरूर संकेत देता है कि बसपा सुप्रीमो युवा नेतृत्व की अगली पीढ़ी को तैयार करने के विकल्प पर काम कर रही हैं।

मायावती के भाई आनंद कुमार भी रहे हैं ताकतवर केंद्र

बसपा के भीतर परिवार की भूमिका कोई नई बात नहीं है। 2017 में मायावती ने अपने छोटे भाई आनंद कुमार को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और संगठन में नंबर-दो की भूमिका दी थी। उस समय मायावती ने यह स्पष्ट किया था कि आनंद कुमार चुनाव नहीं लड़ेंगे और सार्वजनिक पद नहीं संभालेंगे।

2019 में आनंद कुमार के साथ उनके बेटे आकाश आनंद को भी पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका मिली। आकाश को राष्ट्रीय समन्वयक बनाया गया और धीरे-धीरे उन्हें पार्टी की युवा पीढ़ी के चेहरे के रूप में आगे बढ़ाया गया।

यही वजह है कि अब ईशान आनंद को मिली नई जिम्मेदारी को बसपा की भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

आकाश की जगह ईशान? अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं

राजनीतिक विश्लेषण में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मायावती अब आकाश आनंद के स्थान पर ईशान आनंद को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं?

ईशान को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलना इस संभावना को जरूर मजबूत करता है। कुछ रिपोर्टों में इसे मायावती की ओर से छोटे भतीजे पर बढ़ते भरोसे के संकेत के तौर पर देखा गया है।

हालांकि, बसपा सुप्रीमो की कार्यशैली को देखते हुए किसी भी व्यक्ति को औपचारिक उत्तराधिकारी घोषित किए जाने से पहले अंतिम निष्कर्ष निकालना मुश्किल है। मायावती पहले भी परिवार के सदस्यों को बड़ी जिम्मेदारियां देकर बाद में संगठनात्मक समीकरण बदलती रही हैं।

आकाश के लिए सबसे मुश्किल दौर

आकाश आनंद के राजनीतिक सफर में यह अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा सकता है। उन्हें कभी मायावती के उत्तराधिकारी के रूप में देखा गया था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उनके राजनीतिक करियर में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

मायावती ने सितंबर की शुरुआत में ही संकेत दे दिया था कि आकाश को अभी राजनीतिक परिपक्वता हासिल करने की जरूरत है। उस समय आकाश की गैरमौजूदगी में ईशान आनंद की पार्टी बैठक में मौजूदगी ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी थी।

अब पार्टी से निष्कासन के बाद सवाल यह है कि क्या आकाश आनंद बसपा से पूरी तरह राजनीतिक रूप से अलग हो जाएंगे या भविष्य में एक बार फिर मायावती उन्हें कोई मौका देंगी। फिलहाल इसका जवाब केवल मायावती के पास है।

बसपा में परिवार बनाम संगठन की बहस फिर तेज

बसपा की राजनीति लंबे समय से मायावती के व्यक्तिगत नेतृत्व के इर्द-गिर्द केंद्रित रही है। पार्टी के संस्थापक कांशीराम परिवारवाद के बजाय आंदोलन और संगठन को प्राथमिकता देने के लिए जाने जाते थे। मायावती ने भी लंबे समय तक परिवारवाद की राजनीति की आलोचना की।

इसके बावजूद पिछले वर्षों में उनके भाई आनंद कुमार और भतीजे आकाश आनंद को महत्वपूर्ण भूमिकाएं मिलने के बाद बसपा के भीतर परिवार की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब ईशान आनंद को भी महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी मिलने से यह बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

2027 से पहले बसपा का बड़ा राजनीतिक प्रयोग?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बसपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पुराने जनाधार को मजबूत करने की है। ऐसे समय में मायावती द्वारा एक ओर आकाश आनंद को पूरी तरह किनारे करना और दूसरी ओर ईशान आनंद को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना पार्टी की रणनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

फिलहाल इतना जरूर साफ है कि आकाश आनंद का राजनीतिक भविष्य बसपा में बेहद अनिश्चित हो गया है, जबकि ईशान आनंद तेजी से संगठन के भीतर अपनी जगह बना रहे हैं। क्या ईशान वास्तव में मायावती के नए राजनीतिक भरोसे का केंद्र बनेंगे और क्या उन्हें भविष्य में उत्तराधिकारी की भूमिका मिलेगी—इन सवालों का जवाब आने वाले महीनों में बसपा की अगली संगठनात्मक नियुक्तियां और मायावती के फैसले देंगे।

 

यह भी पढ़ें: ग्रेटर नोएडा में शिक्षकों का सम्मान, बेस्ट टीचर्स को मोमेंटो देकर बढ़ाया हौसला

यहां से शेयर करें