नोएडा में प्रशासनिक लापरवाही और कानून व्यवस्था पर सवाल?

नोएडा /ग्रेटर नोएडा,  नोएडा और ग्रेटर नोएडा के स्थानीय निवासियों में प्रशासनिक जवाबदेही और कानून व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में नोएडा हिंसा से जुड़े मामले में गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी (डीएम) मेधा रूपम समेत संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है। कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी की एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम) के तहत हिरासत को रद्द करते हुए 5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया। यह राशि डीएम और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों (SHO सहित) के वेतन से वसूली जाएगी। साथ ही कोर्ट ने उनके सर्विस रिकॉर्ड पर प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज करने का आदेश भी दिया।

हाईकोर्ट की खंडपीठ (न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेवा) ने स्पष्ट कहा कि डीएम ने पुलिस रिपोर्ट को पर्याप्त रूप से सत्यापित किए बिना एनएसए का आदेश पारित किया। कोर्ट ने इसे मनमाना और बिना दिमाग लगाए लिया गया फैसला बताया। अप्रैल 2026 में नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों के वेतन वृद्धि आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और आगजनी के मामले में आकृति चौधरी पर एनएसए लगाया गया था। वे करीब पांच महीने न्यायिक हिरासत में रहीं। कोर्ट ने शांतिपूर्ण विरोध को लोकतंत्र का अधिकार बताते हुए प्रशासन की कार्रवाई की आलोचना की।

इसी बीच ग्रेटर नोएडा के परीचौक इलाके में एक गंभीर घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े किए हैं। अगस्त 2026 में एक 17 वर्षीय स्कूल छात्रा (मेनपुरी की रहने वाली) भारी बारिश में घर से निकली और परीचौक पहुंची। वहां एक खाली प्राइवेट स्लीपर बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने उसे नॉएडा सेक्टर-63 छोड़ने का वादा किया। बस में सवार होने के बाद दोनों आरोपियों ने उसके साथ कथित रूप से दुष्कर्म किया और कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया। पुलिस ने ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप को गिरफ्तार कर बस को जब्त कर लिया। इस मामले में निजी वाहनों/बसों पर कार्रवाई की बात सामने आई।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि एक तरफ आम लोगों के वाहनों पर सख्ती दिखाई जाती है, वहीं कुछ राजनीतिक प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के वाहनों पर जातिसूचक नाम लिखे होने और हूटर बजाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही। नोएडा के विभिन्न सेक्टरों से ऐसी शिकायतें आ रही हैं। इससे आम नागरिकों में भय और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। पुराने आंकड़ों के अनुसार नोएडा पुलिस कभी-कभी जातिसूचक शब्दों वाले वाहनों पर चालान काटती रही है, लेकिन हालिया मामलों में चुप्पी बरतने के आरोप लग रहे हैं। प्रशासन और पुलिस की ओर से इन आरोपों पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद डीएम मेधा रूपम के वेतन से हर्जाना वसूली की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। स्थानीय लोग कानून के समान लागू होने और महिलाओं-नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।

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