कैलाश मानसरोवर यात्रा के प्रवेश द्वार को बहा ले गई थी मडस्लाइड, 2 हफ्ते बाद ऐसा दिखा ग्यीरोंग पोर्ट, अब भी 49 भारतीय लापता

बीजिंग। तिब्बत में नेपाल सीमा से लगे ग्यीरोंग पोर्ट पर आई भीषण मडस्लाइड की तबाही अब सामने आ रही है। घटना के करीब दो हफ्ते बाद अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों को चीन के हिस्से वाली सीमा पर ले जाया गया, जहां उन्होंने एक ऐसे इलाके को देखा जिसे पहचानना लगभग नामुमकिन था।

सीसीटीवी वीडियो में दिखी थी तबाही

26 अगस्त को रिकॉर्ड हुए एक सीसीटीवी वीडियो में मिट्टी, पानी और चट्टानों की विशाल दीवार को बॉर्डर क्रॉसिंग की ओर तेज़ी से बढ़ते देखा गया था। कुछ ही सेकंड में यह सैलाब नेपाल-चीन के बीच प्रमुख सीमा द्वार ग्यीरोंग पोर्ट की इमारतों को अपने साथ बहा ले गया। यह आपदा नेपाल की तरफ ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के कारण हुई थी।

पांच मंज़िला कस्टम बिल्डिंग का नामोनिशान नहीं

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के विदेश मंत्रालय द्वारा 6 सितंबर को आयोजित इस दौरे में पत्रकारों ने पाया कि ग्यीरोंग पोर्ट पर मौजूद पांच मंज़िला चीनी कस्टम बिल्डिंग पूरी तरह गायब हो चुकी है। करीब 20 मीटर ऊंचा बॉर्डर गेट भी नहीं बचा। पूरे इलाके में स्लेटी-काली मिट्टी फैली हुई है, जबकि बचाव दल अब भी लापता लोगों और शवों की तलाश में जुटे हैं। बताया गया कि आपदा-पूर्व की एकमात्र संरचना जो अब भी दिखाई दे रही थी, वह एक वॉटर टावर का हिस्सा था।

अब भी सैकड़ों लापता, 49 भारतीय शामिल

चीनी अधिकारियों के मुताबिक चीन की ओर अब तक करीब 43 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 519 अब भी लापता हैं। इनमें 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक शामिल हैं, जिनमें 49 भारतीय भी हैं। भारत-चीन संबंधों में सुधार के बाद बड़ी संख्या में भारतीय श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तिब्बत गए हुए थे। नेपाल की तरफ यह आंकड़ा और भी भयावह है, जहां मृतकों की संख्या सैकड़ों में और लापता लोगों की संख्या हज़ारों में बताई जा रही है।

बेल्ट एंड रोड परियोजना पर भी सवाल

इस हादसे ने नेपाल के तिब्बत से जुड़े प्रमुख सड़क मार्ग को भी तबाह कर दिया है, जिससे चीन की प्रस्तावित बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत तिब्बत-काठमांडू रेलवे परियोजना को लेकर जोखिमों पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों ने परियोजना के आगे बढ़ने से पहले डिज़ाइन और आपदा सुरक्षा उपायों पर पुनर्विचार की मांग की है। बचाव दल उत्खनन मशीनों, फावड़ों और ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार की मदद से मलबे की तलाशी जारी रखे हुए हैं, लेकिन ग्यीरोंग पोर्ट पर मिली तबाही ने साफ कर दिया है कि इस आपदा के घाव भरने में लंबा वक्त लगेगा।

यह भी पढ़ें: मिर्जापुर द मूवी: महाराणा प्रताप को समर्पित गाने पर विवाद, सिंगर रैपेरिया बालम ने लगाया चोरी का आरोप

यहां से शेयर करें