कानपुर/मॉस्को। रूस की राजधानी मॉस्को में काम कर रहे कानपुर निवासी एक इंजीनियर को स्थानीय पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इंजीनियर की पत्नी ने दावा किया है कि उनके पति को रूसी सेना में शामिल होने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।
रविवार दोपहर हिरासत में लिए गए चंदन
मॉस्को में रह रही स्नेहा चंदन गुप्ता ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए बताया कि उनके पति चंदन गुप्ता को रविवार दोपहर करीब 12:30 बजे मॉस्को पुलिस ने हिरासत में लिया। स्नेहा मूल रूप से जौनपुर के मछलीशहर की रहने वाली हैं और कानपुर में रहती हैं। उनके मुताबिक पति चंदन गुप्ता करीब तीन साल से रूस में एक भारतीय कंपनी के लिए काम कर रहे हैं। स्नेहा के अनुसार, चंदन नोएडा सेक्टर-62 स्थित एक कंपनी से जुड़े हैं और वर्क वीजा पर एक असाइनमेंट के सिलसिले में रूस गए थे। फिलहाल स्नेहा अपने 10 साल के बेटे के साथ मॉस्को में ही फंसी हुई हैं और समझ नहीं पा रही हैं कि आगे क्या करें, क्योंकि उन्हें रूसी भाषा नहीं आती और वे यह पता नहीं लगा पा रही हैं कि उनके पति के साथ वास्तव में क्या हो रहा है।
रूसी सेना में भर्ती का दबाव होने का आरोप
स्नेहा ने दावा किया कि उनके पति ने कोई गलती नहीं की, फिर भी उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत के बाद से चंदन पर रूसी सेना में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा है। स्नेहा के मुताबिक, रूसी सेना में जवानों की कमी के चलते विदेशी नागरिकों, खासकर भारतीयों को सेना में भर्ती करने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि मॉस्को डे के आसपास उनके पति को परेशान भी किया गया था। हालांकि, चंदन की हिरासत की असल वजह, उन पर लगे आरोपों या उन्हें रूसी सेना में भर्ती करने की किसी औपचारिक प्रक्रिया की अब तक कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पीएम मोदी और सीएम योगी से मदद की गुहार
अपने भावुक वीडियो में स्नेहा ने भारत सरकार से तत्काल मदद की अपील की। उन्होंने लोगों से वीडियो को अधिक से अधिक साझा करने और प्रशासन का ध्यान इस मामले की ओर दिलाने का आग्रह किया। उन्होंने खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पति की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कराने की अपील की।
कंपनी, दूतावास या रूसी प्रशासन की ओर से कोई पुष्टि नहीं
चंदन जिस भारतीय कंपनी के लिए रूस में काम कर रहे थे, उसका मुख्यालय नोएडा में है और उसका रूस में भी कारोबार है। हालांकि, अब तक न तो कंपनी, न भारतीय दूतावास और न ही रूसी प्रशासन की ओर से चंदन की हिरासत या उन्हें सेना में भर्ती के लिए दबाव बनाए जाने के आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने आया है।
भारतीयों की रूसी सेना में भर्ती का बढ़ता मामला
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पहले भी नौकरी के बहाने रूस भेजे गए कई भारतीय नागरिकों के रूसी सैन्य गतिविधियों में शामिल होने की बात सामने आ चुकी है। दिसंबर 2025 तक रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान 202 भारतीयों की रूसी सेना में भर्ती हो चुकी थी, जिनमें से 26 की मौत हो गई और सात लापता बताए गए। भारत सरकार का कहना है कि कई लोगों को गुमराह कर या दबाव में सेना में शामिल कराया गया और सरकार उनकी रिहाई व वापसी के लिए प्रयासरत है।
जुलाई 2026 में विदेश मंत्रालय ने भारतीयों को फर्जी विदेशी नौकरी के प्रस्तावों के प्रति आगाह भी किया था। अब तक कूटनीतिक प्रयासों से 139 भारतीय नागरिकों की रिहाई सुनिश्चित की जा चुकी है, जबकि करीब दो दर्जन नागरिक अब भी रूस में फंसे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रभावित परिवारों की मदद के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने, डीएनए जांच, कानूनी सहायता, मुआवजा और वापसी में सहयोग जैसे कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

