अमेरिका का बड़ा एक्शन, ईरान के तीन तेल टैंकरों पर हमला, नौसैनिक जहाजों पर मिसाइल दागने का लिया बदला

वॉशिंगटन/तेहरान, ईरान और अमेरिका के बीच पिछले करीब सात महीने से चल रहे तनाव ने शनिवार को एक बार फिर गंभीर मोड़ ले लिया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि अमेरिकी फौज ने ईरान के तीन क्रूड ऑयल टैंकरों पर हमला किया है। यह कार्रवाई ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा दो अमेरिकी नौसैनिक युद्धपोतों की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने के जवाब में की गई बताई जा रही है।

खारग आइलैंड के पास सुनाई दिए धमाके

घटना की शुरुआत शनिवार सुबह उस वक्त हुई जब ईरानी मीडिया ने देश के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खारग आइलैंड के पास कई धमाकों की सूचना दी। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स के मुताबिक उसके संवाददाता ने धमाकों की आवाज़ सुनी, हालांकि उस वक्त धुआं दिखाई नहीं दिया था। वहीं SNN और तस्नीम न्यूज एजेंसियों ने दावा किया कि खारग आइलैंड से करीब छह नॉटिकल मील दूर एक ईरानी तेल टैंकर को अमेरिका ने निशाना बनाया। ईरानी स्टेट टीवी के अनुसार टैंकर पर चार अमेरिकी मिसाइलें दागी गईं। इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन जहाज के चालक दल को वहां से निकाले जाने की जानकारी सामने आई।

CENTCOM ने की हमले की पुष्टि

कुछ घंटों बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने शनिवार को ईरान के तीन तेल टैंकरों पर हमला किया। बयान के अनुसार, इससे पहले क्षेत्र में गश्त लगा रहे एक अमेरिकी विमानवाहक पोत और एक गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर ने IRGC के कई हमलों को नाकाम किया, जिनमें किसी भी अमेरिकी सैनिक को नुकसान नहीं पहुंचा।

CENTCOM के मुताबिक जिन तीन जहाजों को निशाना बनाया गया, उनमें:

एमटी डाउनी (M/T Downy)  खारग आइलैंड के पास स्थायी रूप से निष्क्रिय किया गया

एमटी स्टार्क-1 (M/T Stark 1) जास्क के पास स्थायी रूप से निष्क्रिय किया गया

एमटी काइलो (M/T Kylo)  ओमान की खाड़ी में पूरी तरह नष्ट किया गया

गौरतलब है कि काइलो टैंकर उस वक्त तेल लेकर नहीं चल रहा था और अमेरिकी सेना ने हमले से पहले चालक दल को जहाज खाली करने का निर्देश दिया था।

CENTCOM कमांडर की सख्त चेतावनी

CENTCOM प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने बयान में IRGC को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अगर ईरान अमेरिका के दो जहाजों पर हमला करेगा, तो अमेरिका उसके तीन जहाज तबाह कर आर्थिक कीमत और बढ़ा देगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना जरूरत पड़ने पर ईरान के सीमित तेल बेड़े को नष्ट करने से पीछे नहीं हटेगी। इसके अलावा अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह बिल्कुल सीधा मामला है — अगर ईरान अमेरिकी जहाजों पर गोली चलाएगा, तो अमेरिका उसके तेल टैंकर डुबो देगा, और इससे बचने का एकमात्र रास्ता यह है कि ईरान अमेरिकी नौसेना पर हमला करना बंद करे। फिलहाल ईरानी सरकार की ओर से अमेरिका की इस कार्रवाई पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

छह महीने से ज़्यादा पुराना है यह संघर्ष

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा टकराव 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों से शुरू हुआ था, जो अब सात महीने पूरे कर चुका है। इस दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को सैन्य और आर्थिक, दोनों मोर्चों पर नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है। बातचीत के कई दौर नाकाम रह चुके हैं। गौरतलब है कि इस हमले से एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संघर्ष को हल्के में लेते हुए इसे “छोटी-मोटी बात” करार दिया था। साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि नतांज के पास स्थित ईरान के अत्यंत सुरक्षित “पिकैक्स माउंटेन” परमाणु परिसर पर बहुत जल्द हमला किया जा सकता है।

खारग आइलैंड और ईरान की तेल अर्थव्यवस्था

खारग आइलैंड ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात टर्मिनल है, जहां से युद्ध शुरू होने से पहले ईरान का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल निर्यात होता था। मध्य अप्रैल से अमेरिका ने ईरानी तेल निर्यात पर नाकाबंदी लगा रखी है, जबकि ईरान की ओर से भी होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में नाकाबंदी जारी है। इससे पहले मार्च 2026 में भी अमेरिकी वायुसेना ने खारग आइलैंड पर बड़ा हवाई हमला कर 90 से अधिक ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था, हालांकि उस वक्त तेल और गैस से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को जानबूझकर बख्शा गया था। ताजा हमले के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है, खासकर तब जब वैश्विक तेल आपूर्ति पहले से ही इस युद्ध के असर से जूझ रही है। आने वाले घंटों में ईरान की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं।
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