ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओर से तैयार कराए गए फ्लैटों को खरीदार नहीं मिल रहे हैं। सेक्टर ओमिक्रॉन-1ए में खाली पड़े 90 तैयार फ्लैटों को बेचने के लिए कराई गई ई-नीलामी में खरीदारों की बेहद कम रुचि सामने आई। बृहस्पतिवार को हुई ई-नीलामी में 90 फ्लैटों में से महज पांच फ्लैटों के लिए ही बोली लगी। इससे साफ है कि तैयार और कब्जे के लिए उपलब्ध फ्लैट होने के बावजूद लोग इन्हें खरीदने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
प्राधिकरण ने इन फ्लैटों को बेचने के लिए कई बार आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाई, लेकिन इसके बावजूद योजना को अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। अंत में सिर्फ पांच आवेदकों ने ही बोली प्रक्रिया में हिस्सा लिया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ये फ्लैट सेक्टर ओमिक्रॉन-1ए में स्थित हैं और जनवरी 2026 में इनके लिए ई-नीलामी योजना शुरू की गई थी।
90 फ्लैटों में सिर्फ पांच के लिए बोली
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर ओमिक्रॉन-1ए में 83 वर्ग मीटर श्रेणी के 90 फ्लैटों की योजना निकाली थी। इन फ्लैटों का कार्पेट एरिया 83.38 वर्ग मीटर और सुपर एरिया 104.70 वर्ग मीटर है।
इन फ्लैटों का आरक्षित मूल्य करीब 73.23 लाख रुपये से 74.35 लाख रुपये के बीच रखा गया था। योजना के तहत ई-नीलामी में सबसे अधिक बोली लगाने वाले आवेदक को फ्लैट आवंटित किया जाना था। हालांकि, बोली प्रक्रिया में ही खरीदारों की संख्या बेहद कम रह गई।
कई बार बढ़ाई गई आवेदन की तारीख
योजना को लेकर शुरुआत से ही लोगों की दिलचस्पी कम दिखाई दी। प्राधिकरण की ओर से आवेदन और ई-नीलामी की तारीख को कई बार आगे बढ़ाया गया, ताकि अधिक से अधिक लोग योजना में शामिल हो सकें।
जनवरी में योजना सामने आने के बाद 90 तैयार फ्लैटों को ई-नीलामी के जरिए बेचने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। उस समय इन्हें तैयार और दो बेडरूम वाले फ्लैट के रूप में पेश किया गया था। लेकिन समय बढ़ाने के बाद भी आवेदकों की संख्या में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई। इसका नतीजा यह रहा कि 90 फ्लैटों में से केवल पांच के लिए ही बोली लगाने वाले सामने आए।
आरक्षित मूल्य से एक फीसदी अधिक पर होगा आवंटन
ई-नीलामी में जिन पांच फ्लैटों के लिए बोली लगी है, उनका आवंटन आरक्षित मूल्य से एक फीसदी अधिक कीमत पर किया जाएगा। यानी इन फ्लैटों के लिए प्राधिकरण को न्यूनतम आरक्षित मूल्य के मुकाबले मामूली अतिरिक्त कीमत प्राप्त होगी।
वहीं, जिन फ्लैटों के लिए कोई खरीदार सामने नहीं आया, उन्हें खाली पड़े फ्लैटों की सूची से निकालकर दोबारा आवंटन की प्रक्रिया में शामिल करना होगा।
पहले भी हो चुका है कुछ फ्लैटों का आवंटन
ओमिक्रॉन-1ए स्थित इस आवासीय परिसर में पहले भी कुछ फ्लैटों का आवंटन किया जा चुका है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में फ्लैट अब तक खाली हैं। जानकारी के मुताबिक, इस सोसायटी में करीब 350 फ्लैट अभी भी रिक्त पड़े हैं। यानी प्राधिकरण के सामने चुनौती केवल इन 90 फ्लैटों को बेचने की नहीं है, बल्कि परिसर में लंबे समय से खाली पड़े सैकड़ों फ्लैटों को खरीदार उपलब्ध कराने की भी है।
खाली फ्लैटों से प्राधिकरण के सामने बढ़ी चुनौती
प्राधिकरण द्वारा बनाए गए फ्लैटों का लंबे समय तक खाली रहना कई सवाल खड़े करता है। एक तरफ नोएडा-ग्रेटर नोएडा में निजी बिल्डरों के प्रोजेक्ट और नई हाउसिंग स्कीम लगातार बाजार में मौजूद हैं, वहीं दूसरी तरफ प्राधिकरण के तैयार फ्लैटों के लिए खरीदारों की कमी दिखाई दे रही है।
खाली फ्लैटों से प्राधिकरण की पूंजी लंबे समय तक संपत्ति में फंसी रहती है। साथ ही रखरखाव और परिसर के संचालन से जुड़ी जिम्मेदारियां भी बनी रहती हैं। ऐसे में खाली आवासीय स्टॉक को जल्द से जल्द आवंटित करना प्राधिकरण के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सीईओ ने दिए खाली फ्लैटों के जल्द आवंटन के निर्देश
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने संपत्ति विभाग को खाली पड़े फ्लैटों का जल्द से जल्द आवंटन करने के निर्देश दिए हैं। अब विभाग के सामने चुनौती है कि शेष रिक्त फ्लैटों के लिए ऐसी प्रक्रिया तैयार की जाए, जिससे खरीदारों की रुचि बढ़े और लंबे समय से खाली पड़े आवासीय स्टॉक का निस्तारण किया जा सके।
हालिया ई-नीलामी में कम भागीदारी ने प्राधिकरण के लिए इस समस्या को और स्पष्ट कर दिया है। 90 फ्लैटों में केवल पांच पर बोली लगना इस बात का संकेत है कि तैयार फ्लैट उपलब्ध होने के बावजूद कीमत, लोकेशन, वित्तीय शर्तों या खरीदारों की मौजूदा पसंद जैसे कारकों पर प्राधिकरण को नए सिरे से विचार करने की जरूरत पड़ सकती है।
खरीदारों की कम रुचि से उठे सवाल
ग्रेटर नोएडा में रियल एस्टेट की मांग के बीच प्राधिकरण के तैयार फ्लैटों को खरीदार नहीं मिलना अपने आप में महत्वपूर्ण स्थिति है। खासकर तब, जब ये फ्लैट पहले से निर्मित हैं और आवासीय उपयोग के लिए तैयार बताए जा रहे हैं। अब देखना होगा कि प्राधिकरण बाकी बचे फ्लैटों को किस तरीके से बाजार में लाता है और क्या कीमत, भुगतान व्यवस्था या आवंटन प्रक्रिया में कोई बदलाव किया जाता है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती करीब 350 खाली फ्लैटों को खरीदार उपलब्ध कराना है।

