Traffic violations: नोएडा। शहर की सड़कों पर एक चिंताजनक प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है, जिसने स्थानीय निवासियों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (आरडब्ल्यूए) की नींद उड़ा दी है। निजी वाहनों पर ‘भारत सरकार’ या ‘उत्तर प्रदेश सरकार’ लिखवाकर सड़कों पर बेधड़क घूमना, खिड़कियों पर प्रतिबंधित काली फिल्म चढ़ाना और बिना नंबर प्लेट के ट्रैक्टरों का व्यावसायिक इस्तेमाल — ये तीनों प्रवृत्तियां अब नोएडा की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं।
पुलिस चेकिंग से बचने और अपराध छुपाने की आशंका
आरडब्ल्यूए सेक्टर 105 के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि निजी वाहनों पर सरकारी नाम का दुरुपयोग आमतौर पर पुलिस चेकिंग से बचने, टोल टैक्स की चोरी करने या आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने की नीयत से किया जाता है। उन्होंने बताया कि यह कृत्य भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 204 और मोटर वाहन अधिनियम के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।इसके अलावा, वाहनों की खिड़कियों पर लगाई जा रही काली फिल्म और गायब नंबर प्लेटें किसी दुर्घटना या आपराधिक घटना के बाद पहचान छुपाने की कोशिश की ओर इशारा करती हैं, जो शहर में असुरक्षा के माहौल को और बढ़ा सकती हैं।
बिना नंबर प्लेट ट्रैक्टरों का बढ़ता व्यावसायिक इस्तेमाल
रिपोर्ट के अनुसार, शहर की सड़कों पर बिना आगे-पीछे नंबर प्लेट के भारी-भरकम ट्रैक्टरों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जिनका धड़ल्ले से व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। ऐसे ट्रैक्टर न केवल आम जनजीवन और यातायात व्यवस्था के लिए खतरा साबित हो रहे हैं, बल्कि किसी दुर्घटना या अनहोनी की स्थिति में चालकों की पहचान करना भी लगभग असंभव बना देते हैं।
आरडब्ल्यूए ने पुलिस-प्रशासन से की सख्त कार्रवाई की मांग
आरडब्ल्यूए सेक्टर 105 के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने नोएडा पुलिस और यातायात विभाग से विनम्रता के साथ मगर दृढ़ता से अपील करते हुए तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टरों की जब्ती — व्यावसायिक कार्यों में लगे ऐसे ट्रैक्टरों को तत्काल प्रभाव से जब्त किया जाए।
सरकारी नाम के दुरुपयोग पर FIR — ‘भारत सरकार’ या ‘उत्तर प्रदेश सरकार’ का अनधिकृत उपयोग करने वाले वाहन मालिकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए।
काली फिल्म व बिना नंबर प्लेट वाहनों के खिलाफ अभियान — इन वाहनों के खिलाफ तत्काल एक सख्त और सतत कानूनी अभियान चलाया जाए। आरडब्ल्यूए का कहना है कि यदि समय रहते इन पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह प्रवृत्ति भविष्य में किसी बड़ी आपराधिक घटना का कारण बन सकती है, जिससे शहर की छवि और नागरिकों की सुरक्षा दोनों प्रभावित होंगी।

