NEET paper leak: 22 सुसाइड, वादे के बावजूद अब तक किसी परिवार को नहीं मिला मुआवजा

NEET paper leak: CJP के नेता भी पीड़ित परिवारों से मिलने नहीं पहुंचे, 5 सितंबर को जंतर-मंतर से पुलिस मुख्यालय तक फिर मार्च का ऐलान

दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के विरोध में 20 जून से शुरू हुआ प्रदर्शन करीब 36 दिन चलने के बाद 25 जुलाई को खत्म हुआ था। सरकार ने उस वक्त तीन वादे किए थे — शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, पेपर लीक के बाद खुदकुशी करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपए मुआवजा, और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी FIR वापस लेना।

इनमें से पहला वादा पूरा हुआ — प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दे दिया। लेकिन एक महीने से ज्यादा बीत जाने के बाद भी बाकी दोनों वादे अधूरे हैं। पेपर लीक के बाद देशभर में 22 NEET अभ्यर्थियों ने अपनी जान दे दी थी। इनमें से 14 परिवारों से बातचीत में सामने आया कि मुआवजे को लेकर सरकार की तरफ से अब तक किसी ने संपर्क नहीं किया।

दिल्ली, अहमदाबाद और हिसार के परिवारों का दर्द

दिल्ली के आजाद नगर की जेजे कॉलोनी में रहने वाली अंशिका पांडे डॉक्टर बनने का सपना देखती थी और अपनी डायरी में खुद को पहले ही मेडिकल स्टूडेंट मानकर लिखती थी। NEET रद्द होने के 10 दिन बाद 14 मई को उसने घर पर ही जान दे दी। पिता इंद्रधर पांडे बताते हैं कि यह उनकी बेटी का तीसरा प्रयास था और उसे परीक्षा पास होने का पूरा भरोसा था। परिवार का कहना है कि न तो सरकार और न ही प्रशासन का कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने आया, जबकि आंदोलन उन्हीं छात्रों के नाम पर चलाया गया था।

अहमदाबाद में रहकर NEET की तैयारी कर रहे सूरत के काहान पटेल ने परीक्षा देने के बाद जूनियर्स को अपनी किताबें तक दे दी थीं, इतना भरोसा था कि इस बार सफलता मिलेगी। पेपर लीक के बाद दोबारा परीक्षा के ऐलान से वह बेहद आहत हुआ और परीक्षा से महज तीन दिन पहले 17 जून को उसने अपनी जान दे दी। पिता प्रशांत पटेल के मुताबिक बेटे की मौत के बाद अब तक न सरकार से कोई संपर्क हुआ है, न ही डेथ सर्टिफिकेट बनवाने में प्रशासन से मदद मिल रही है। हरियाणा के हिसार में रहने वाली सिमरन हमेशा टॉप करने वाली छात्रा थी और BSc एग्रीकल्चर में एडमिशन लेने के बावजूद डॉक्टर बनने का सपना देखती थी। 21 जून को परिवार के साथ खाना खाने के कुछ ही देर बाद उसने घर में जहरीला पदार्थ खा लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। पिता रोहतास कुमार का कहना है कि सरकार की तरफ से आज तक कोई संपर्क नहीं हुआ।

नौ राज्यों के परिवारों की एक जैसी शिकायत

यूपी, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, दिल्ली और मध्य प्रदेश — इन सभी राज्यों के पीड़ित परिवारों ने एक ही बात दोहराई कि न सरकार ने मुआवजे को लेकर संपर्क किया और न ही आंदोलन खत्म होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं ने उनसे कोई बातचीत की।

CJP बोली- सरकार ने पत्र का जवाब नहीं दिया, 5 सितंबर को फिर मार्च

CJP प्रवक्ता सौरव दास के मुताबिक, संगठन ने मुआवजे को लेकर सरकार को पत्र लिखा था, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। इसी वजह से संगठन ने दोबारा सड़क पर उतरने का फैसला किया है। 5 सितंबर को जंतर-मंतर से पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकाला जाएगा, जिसमें जान गंवाने वाले छात्रों के परिवार भी शामिल होंगे। परिवारों और CJP के आरोपों पर सरकार से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

FIR वापसी की प्रक्रिया आंशिक रूप से पूरी

20 जुलाई की हिंसा के बाद दिल्ली, यूपी, बिहार समेत कई राज्यों में 121 से ज्यादा FIR दर्ज हुई थीं। 28 जुलाई और 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में कोर्ट ने साफ किया कि केवल गंभीर और जघन्य अपराधों में शामिल लोगों को ही राहत से बाहर रखा जा सकता है, बाकी मामलों को कानून के मुताबिक बंद करने या वापस लेने की अनुमति दी गई। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली, बिहार, यूपी और बंगाल समेत कई राज्यों में FIR वापस लेने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और दिल्ली में हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारी छोड़ दिए गए हैं। हालांकि 2,700 से ज्यादा ऐसे लोग चिन्हित हुए हैं जिनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है, हालांकि उनके खिलाफ प्रदर्शन से जुड़ी कोई नई FIR दर्ज नहीं की गई है। CJP प्रवक्ता सौरव दास ने पुलिस के इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर ये लोग अपराधी थे तो प्रदर्शन में कैसे पहुंचे, और सरकार को तोड़फोड़ से जुड़ा फुटेज सार्वजनिक करना चाहिए। उनका कहना है कि संगठन फिलहाल IB के एडिशनल डायरेक्टर जनार्दन सिंह के संपर्क में है और मांग अब भी यही है कि किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कार्रवाई न हो।

78 दिन में 22 स्टूडेंट्स ने गंवाई जान

पेपर लीक विवाद शुरू होने के बाद के 78 दिनों में देशभर के अलग-अलग राज्यों — उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड, गुजरात, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश — से कुल 22 NEET अभ्यर्थियों की आत्महत्या से मौत की खबरें सामने आईं। पीड़ितों में 17 से 23 साल तक के छात्र-छात्राएं शामिल हैं, जिनमें से कई दूसरे या तीसरे प्रयास में परीक्षा दे रहे थे। कुछ मामलों में पुलिस को सुसाइड नोट मिला, जबकि ज्यादातर मामलों में परिवारों को अंत तक कोई अंदेशा नहीं था कि उनके बच्चे इतना बड़ा कदम उठा सकते हैं। यह रिपोर्ट संवेदनशील विषय पर आधारित है। अगर आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव या आत्महत्या के विचारों से जूझ रहा है, तो कृपया किसी नजदीकी काउंसलर, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या हेल्पलाइन से तुरंत संपर्क करें।

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