“Electricity in every home”: नोएडा। उत्तर प्रदेश की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले हाइटेक शहर नोएडा में बिजली विभाग की अव्यवस्था सुर्खियों में है। सरकार भले ही ‘हर घर बिजली’ पहुंचाने के दावे करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अंतरराष्ट्रीय निवेश को आकर्षित करने वाले इस शहर की बिजली आपूर्ति व्यवस्था आज भी बीसियों वर्ष पुरानी बनी हुई है। नतीजतन शहरवासी लगातार वोल्टेज के उतार-चढ़ाव और घंटों की अनिश्चित कटौती झेल रहे हैं। इतना ही नहीं, नया कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं पर ‘अफोर्डेबल चार्ज’ के नाम पर भारी-भरकम शुल्क थोपे जाने से आम जनता में रोष है। एक ओर जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण निर्बाध बिजली नहीं मिलती, दूसरी ओर नए कनेक्शन पर अनुचित शुल्क वसूला जा रहा है।
इस पूरे प्रकरण में जनप्रतिनिधियों की खामोशी को भी उतना ही जिम्मेदार माना जा रहा है। लाखों नागरिकों को प्रभावित करने वाले इस संकट पर उनकी चुप्पी से विभाग के हौसले बुलंद हैं। इसके अतिरिक्त, जिले में मैनपावर की भारी कमी के चलते मामूली फॉल्ट ठीक करने में भी घंटों लग जाते हैं। बिल संबंधी शिकायतों के लिए पूरे जिले को सेक्टर-18 स्थित विद्युत घर के चक्कर काटने पड़ते हैं, वहीं मीटर संबंधी समस्याओं के लिए पूरे शहर में केवल एक केंद्र होने से लोगों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है।
आरडब्ल्यूए सेक्टर 105 नोएडा के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने इस बदहाली पर कड़ा आक्रोश जताते हुए कहा कि ‘हर घर बिजली’ का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब निर्बाध आपूर्ति, पारदर्शी शुल्क संरचना और सुलभ सेवाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने शासन से मांग की कि पुराने ढांचे को तुरंत आधुनिक बनाया जाए, ‘अफोर्डेबल चार्ज’ वापस लिया जाए, पर्याप्त मैनपावर भर्ती की जाए और बिल-मीटर सुधार सेवाओं को सेक्टर-वार विकेंद्रीकृत किया जाए।
सेक्टर 105 स्थित डी-ब्लॉक की ग्रीन बेल्ट को बचाने के लिए रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) ने आवाज बुलंद की है। आरोप है कि बिल्डर कंपनी ‘मैक्स स्टेट’ ने अपने व्यावसायिक हितों के चलते नियमों को दरकिनार कर सार्वजनिक हरियाली पर कब्जा जमा लिया है। हरित भूमि पर वातानुकूलित (एसी) कंटेनर रखकर दफ्तर बनाए गए हैं, पेड़ काटे गए हैं और प्राकृतिक भूमि पर अवैध पक्की सड़क बनाई जा रही है। सुरक्षा के लिए बनी बाउंड्री वॉल को भी कई जगह तोड़ा गया बताया जा रहा है।
निवासियों में इस पर गहरा आक्रोश है, खासकर इसलिए कि जिस पार्क और ग्रीन बेल्ट में रोजाना बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे टहलने आते हैं, उसके मुख्य द्वारों पर ताले जड़कर आवाजाही रोक दी गई है। आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने इस कथित अवैध गतिविधि की कड़ी निंदा करते हुए चेतावनी दी कि सेक्टर वासियों के अधिकारों पर आंच आने वाली किसी भी मनमानी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने नोएडा प्राधिकरण के सीईओ से तत्काल संज्ञान लेने की अपील करते हुए मांग की है कि अनाधिकृत एसी कंटेनरों को हटाया जाए, अवैध सड़क निर्माण रोका जाए, क्षतिग्रस्त बाउंड्री वॉल व कटे पेड़ों के एवज में कंपनी पर आर्थिक दंड लगाया जाए और अवैध ताले तुड़वाकर नागरिकों का टहलने का अधिकार बहाल किया जाए।
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