चंपत राय की डायरी से उठे सवालों ने बढ़ाई हलचल, नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर भी उठाए सवाल,जानिए पूरा मामला

अयोध्या। राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर अब पूर्व महासचिव चंपत राय की कथित डायरी में दर्ज टिप्पणियों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, डायरी में चंपत राय ने चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं कराने के फैसले और मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर कई सवाल उठाए हैं। हालांकि, डायरी में दर्ज कथित टिप्पणियों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

चढ़ावा चोरी के बाद तुरंत FIR क्यों नहीं कराई?

सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, चंपत राय ने अपनी डायरी में लिखा कि चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के तुरंत बाद एफआईआर कराने से उन्होंने इसलिए परहेज किया क्योंकि उन्हें आशंका थी कि पुलिस जांच लंबी खिंच सकती है। डायरी में इस फैसले को लेकर उन्होंने संभावित राजनीतिक असर की ओर भी संकेत किया है।

बताया गया है कि चंपत राय को आशंका थी कि मामले की जांच लंबे समय तक चलने से इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है। यही वजह बताई गई है कि तत्काल कानूनी कार्रवाई करने के बजाय परिस्थितियों को देखते हुए आगे बढ़ने का फैसला किया गया।

नृपेंद्र मिश्रा के इंटरव्यू पर भी सवाल

कथित डायरी में मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर भी चंपत राय ने सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, नृपेंद्र मिश्रा ने मीडिया चैनल को दिए एक इंटरव्यू में चढ़ावा चोरी की घटना को डकैती करार दिया था। चंपत राय ने माना कि इस तरह की टिप्पणी से समाज में गलत संदेश गया।

डायरी में कथित तौर पर यह भी लिखा गया है कि एक संत ने चंपत राय से बातचीत के दौरान नृपेंद्र मिश्रा को इस मामले में खलनायक तक कह दिया था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि घटना को लेकर मंदिर से जुड़े लोगों के बीच भी मतभेद और नाराजगी की स्थिति बनी थी।

चार दिनों में 14 चैनलों को इंटरव्यू देने पर सवाल

चंपत राय की कथित डायरी में नृपेंद्र मिश्रा के मीडिया इंटरव्यू को लेकर एक और गंभीर सवाल उठाया गया है। इसमें पूछा गया है कि नृपेंद्र मिश्रा जैसे अनुभवी व्यक्ति ने महज चार दिनों में करीब 14 मीडिया चैनलों से बातचीत क्यों की?

डायरी में कथित रूप से यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या उन्होंने यह सब किसी के इशारे पर किया था। चंपत राय ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अपनी चिंता जाहिर की और मीडिया में मामले को लेकर दिए गए बयानों के असर पर सवाल खड़े किए।

छह साल की बैठकों में हिसाब-किताब पर चर्चा नहीं हुई?

कथित डायरी में मंदिर निर्माण समिति की बैठकों का भी जिक्र किया गया है। चंपत राय ने सवाल उठाया है कि पिछले करीब छह वर्षों में मंदिर निर्माण समिति की बैठकों के दौरान व्यवस्थाओं अथवा हिसाब-किताब से जुड़े मुद्दों पर कभी चर्चा नहीं हुई, तो अब इन मामलों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाने का अधिकार किस आधार पर है।

यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है जब राम मंदिर से जुड़े आर्थिक और प्रशासनिक मामलों को लेकर सार्वजनिक बहस पहले से ही संवेदनशील बनी हुई है। ऐसे में डायरी में दर्ज कथित टिप्पणियों ने इस विवाद को और चर्चा में ला दिया है।

अखिलेश यादव तक जानकारी कैसे पहुंची?

कथित डायरी में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव तक मामले की जानकारी पहुंचने को लेकर भी सवाल उठाया गया है। चंपत राय ने कथित तौर पर पूछा है कि यह जानकारी अखिलेश यादव तक किस माध्यम से पहुंची और उन्हें यह बात किसने बताई।

डायरी में “असली भेदिया कौन है?” जैसे सवाल का भी उल्लेख बताया जा रहा है। चंपत राय ने कथित तौर पर इसे अपने सामने सबसे बड़ा प्रश्न बताया और यह पता लगाने की जरूरत जताई कि मंदिर से जुड़ी अंदरूनी जानकारी बाहर कैसे पहुंची।

मामला सिर्फ चोरी तक सीमित नहीं, अंदरूनी विवाद भी सामने आया

चढ़ावा चोरी का विवाद अब केवल चोरी की घटना और उसके बाद की कार्रवाई तक सीमित दिखाई नहीं दे रहा है। कथित डायरी के सामने आने के बाद मंदिर निर्माण से जुड़े पदाधिकारियों के बीच मतभेद, मीडिया में दिए गए बयान और अंदरूनी सूचनाओं के बाहर पहुंचने जैसे सवाल भी चर्चा में आ गए हैं।

हालांकि, इन दावों के आधार पर किसी व्यक्ति की भूमिका या जिम्मेदारी को अंतिम रूप से तय नहीं किया जा सकता। डायरी की प्रामाणिकता, उसमें दर्ज टिप्पणियों और पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।

विधानसभा चुनाव से जोड़कर भी देखी जा रही है पूरी कवायद

कथित डायरी में आगामी विधानसभा चुनाव के संभावित प्रभाव का उल्लेख किए जाने के कारण यह मामला राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हो गया है। अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में रहा है। ऐसे में मंदिर से जुड़ा कोई भी विवाद चुनावी माहौल पर असर डाल सकता है।

अब देखना होगा कि कथित डायरी में दर्ज टिप्पणियों को लेकर संबंधित पक्ष क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या इस मामले में कोई आधिकारिक जांच या स्पष्टीकरण सामने आता है। फिलहाल चंपत राय की कथित डायरी से सामने आए सवालों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

 

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