जेवर। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच गौतमबुद्धनगर की जेवर विधानसभा सीट पर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी जहां इस सीट पर लगातार तीसरी जीत दर्ज कर हैट्रिक लगाने की तैयारी में जुटी है, वहीं बहुजन समाज पार्टी ने चुनावी मैदान में मजबूत दावेदारी पेश करते हुए अपना पहला बड़ा दांव चल दिया है। बसपा के राष्ट्रीय को-ऑर्डिनेटर आकाश आनंद ने दनकौर के आदर्श इंटर कॉलेज में आयोजित जनसभा में सतवीर नागर के नाम का एलान कर चुनावी ताल ठोक दी है।
जेवर सीट पर बसपा की सक्रियता को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि गौतमबुद्धनगर बसपा सुप्रीमो मायावती का गृह जनपद है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बसपा का पारंपरिक वोट बैंक रहा है और 2017 से पहले पार्टी इस क्षेत्र में लगातार मजबूत प्रदर्शन करती रही है। ऐसे में 2027 के चुनाव में जेवर सीट बसपा के लिए सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि पश्चिमी यूपी में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।
बसपा ने जेवर से क्यों शुरू किया शक्ति प्रदर्शन?
बसपा मौजूदा समय में अपने सबसे चुनौतीपूर्ण राजनीतिक दौर से गुजर रही है। लोकसभा में पार्टी का कोई सांसद नहीं है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में पार्टी के एकमात्र विधायक रहे उमाशंकर सिंह का 5 अगस्त को निधन हो चुका है। वहीं राज्यसभा में बसपा के पास केवल एक सीट बची है, जिसका कार्यकाल भी आने वाले महीनों में पूरा होने वाला है।
इसके अलावा बिहार, पंजाब और उत्तराखंड में पार्टी के कुछ विधायक हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर बसपा का राजनीतिक प्रभाव पहले की तुलना में काफी कमजोर हुआ है। ऐसे समय में पार्टी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जेवर विधानसभा सीट को लेकर जिस तरह से शक्ति प्रदर्शन किया है, उसके राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।
सतवीर नागर के नाम के एलान से बढ़ी राजनीतिक गर्मी
दनकौर में आयोजित जनसभा में आकाश आनंद द्वारा सतवीर नागर के नाम की घोषणा के बाद जेवर में चुनावी मुकाबले की तस्वीर कुछ हद तक साफ होने लगी है। बसपा अब संगठन को सक्रिय कर गांव-गांव तक पहुंच बनाने और अपने पारंपरिक वोट बैंक को दोबारा मजबूत करने की रणनीति पर काम कर सकती है।
जेवर क्षेत्र में बसपा का पुराना प्रभाव रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि दलित, पिछड़े और अन्य परंपरागत समर्थक वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करके वह भाजपा के सामने चुनौती खड़ी कर सकती है।
भाजपा के सामने जेवर में हैट्रिक की चुनौती
दूसरी ओर भाजपा जेवर विधानसभा सीट को अपनी प्राथमिकता वाली सीटों में शामिल कर चुनावी तैयारी कर रही है। पार्टी के लिए जेवर इसलिए बेहद अहम है क्योंकि यहां पिछले वर्षों में बड़े स्तर पर विकास परियोजनाएं आई हैं।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, फिल्म सिटी, सेमीकंडक्टर यूनिट, सोलर इंडस्ट्री और औद्योगिक विकास से जुड़ी कई परियोजनाओं को भाजपा चुनावी मुद्दे के रूप में जनता के बीच ले जा सकती है। पार्टी का तर्क है कि जेवर अब केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं रह गया है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के बड़े आर्थिक और औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है।
भाजपा इन विकास परियोजनाओं के जरिए जेवर के साथ-साथ पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विकास आधारित राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में है।
पीएम मोदी और सीएम योगी के कार्यक्रमों पर भी नजर
जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट समेत कई बड़ी परियोजनाओं के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी इस क्षेत्र में सक्रियता रही है। दोनों नेता अलग-अलग मौकों पर जेवर और आसपास के क्षेत्रों में कार्यक्रम कर चुके हैं।
आने वाले समय में भी बड़ी विकास परियोजनाओं से जुड़े कार्यक्रम जेवर में होने की संभावना है। भाजपा इन कार्यक्रमों को 2027 के चुनावी अभियान से जोड़कर क्षेत्र में अपने विकास मॉडल को और मजबूत तरीके से पेश कर सकती है।
बसपा के लिए जेवर क्यों है अहम?
राजनीतिक जानकारों की नजर में जेवर में बसपा की सक्रियता के पीछे केवल विधानसभा चुनाव जीतने की रणनीति नहीं है। पार्टी के लिए यह सीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन को दोबारा खड़ा करने की प्रयोगशाला भी बन सकती है।
अगर बसपा जेवर में भाजपा को कड़ी टक्कर देने या सीट पर सेंधमारी करने में सफल रहती है तो इसका असर आसपास की विधानसभा सीटों पर भी पड़ सकता है। इससे पार्टी के कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ेगा और 2027 के चुनाव में पश्चिमी यूपी में बसपा के पुनरुत्थान का संदेश जा सकता है।
जेवर में विकास बनाम पारंपरिक वोट बैंक की लड़ाई
2027 में जेवर का चुनाव मुख्य रूप से दो अलग-अलग राजनीतिक नैरेटिव के बीच दिखाई दे सकता है। भाजपा जहां एयरपोर्ट, फिल्म सिटी, उद्योग और रोजगार जैसी विकास परियोजनाओं को अपनी उपलब्धि के तौर पर जनता के बीच ले जाएगी, वहीं बसपा अपने पारंपरिक सामाजिक समीकरण और स्थानीय मुद्दों के सहारे चुनावी मुकाबला मजबूत करने की कोशिश करेगी।
सतवीर नागर के नाम के एलान के बाद बसपा ने अपनी रणनीति का पहला संकेत दे दिया है। अब भाजपा की ओर से चुनावी तैयारी और संभावित प्रत्याशी को लेकर गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है।
2027 में जेवर बनेगा पश्चिमी यूपी की सियासत का अहम केंद्र
जेवर विधानसभा सीट पर 2027 का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े विकास और निवेश क्षेत्रों में शामिल होने जा रहा है। एयरपोर्ट और उससे जुड़ी परियोजनाओं के कारण यहां जमीन, रोजगार, उद्योग और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में रहेंगे।
एक तरफ भाजपा विकास परियोजनाओं के दम पर लगातार तीसरी जीत की कोशिश करेगी, तो दूसरी तरफ बसपा अपने पुराने जनाधार को वापस पाने के लिए पूरी ताकत लगाएगी। ऐसे में जेवर विधानसभा चुनाव 2027 का मुकाबला सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक प्रभाव की नई दिशा तय करने वाला चुनाव भी बन सकता है।

