Sergio Gor Kashmir Statement: भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक रिश्तों में एक बार फिर तल्खी देखने को मिली है। दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर मौजूद अनधिकृत ढांचों और बैरिकेड्स को हटाया गया है। यह कार्रवाई इस्लामाबाद में भारतीय हाई कमीशन के बाहर हुई एक ऐसी ही कार्रवाई के एक दिन बाद की गई, जिसके चलते इसे जवाबी कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
दिल्ली में क्या हुआ
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर जेसीबी की मदद से छोटे-मोटे अनधिकृत स्ट्रक्चर और बैरिकेड्स हटाए गए। यह कदम इससे ठीक एक दिन पहले इस्लामाबाद में भारतीय हाई कमीशन के बाहर हुई इसी तरह की कार्रवाई के जवाब में उठाया गया बताया जा रहा है। हालांकि इस घटनाक्रम का यह मतलब नहीं निकाला जा रहा कि इससे दोनों देशों के औपचारिक कूटनीतिक संबंधों में कोई बड़ा तनाव पैदा हुआ है, बल्कि इसे तात्कालिक और प्रतीकात्मक जवाबी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
अमेरिकी राजदूत के बयान से भड़का पाकिस्तान
इस घटनाक्रम से ठीक एक दिन पहले भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गौर के एक बयान ने पाकिस्तान को बेचैन कर दिया था। सर्जियो गौर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, और साथ ही उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर भारत सरकार के प्रयासों की सराहना भी की। इस बयान के बाद पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में मौजूद अमेरिकी राजनयिकों को तलब कर अपना विरोध दर्ज कराया। पाकिस्तान की इस प्रतिक्रिया को विश्लेषकों ने कश्मीर मुद्दे पर उसकी बेचैनी से जोड़कर देखा है, जबकि भारत का रुख शुरू से यही रहा है कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने का मामला भारत का आंतरिक और संवैधानिक विषय है, जिसमें किसी बाहरी देश के हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में बढ़ता असंतोष
इस पूरे घटनाक्रम की एक अहम पृष्ठभूमि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शन भी हैं। जून महीने से शुरू हुआ यह आंदोलन अगस्त में भी जारी है। स्थानीय लोगों की शिकायत है कि मंगला डैम जैसे संसाधनों से सस्ती बिजली तैयार होने के बावजूद उन्हें महंगे दामों पर बिजली बेची जाती है, जबकि आटा, दाल, चावल जैसी बुनियादी जरूरतों की चीजें भी उनकी पहुंच से दूर होती जा रही हैं। हाल के प्रदर्शनों को संबोधित करने वाले कुछ वक्ताओं ने बड़े पैमाने पर हताहत होने का दावा किया है, हालांकि क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं बाधित होने के चलते इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना मुश्किल है और इन्हें फिलहाल असत्यापित दावों के तौर पर ही लिया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों के बयानों में सीमा पार जम्मू-कश्मीर से तुलना करते हुए स्वायत्तता और अधिकारों की मांग भी उठती रही है।
पहलगाम हमले के बाद से बढ़ी तल्खी
गौरतलब है कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी, के बाद से भारत-पाकिस्तान संबंधों में लगातार खटास बनी हुई है। इसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत सीमा पार आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी, जिसके बाद से पाकिस्तान की ओर से समय-समय पर धमकी भरे बयान आते रहे हैं।
भारत का रुख: PoK हमेशा से भारत का हिस्सा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत भारत सरकार के प्रतिनिधि पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि गिलगित-बाल्टिस्तान से लेकर मुजफ्फराबाद तक का पूरा क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है और देर-सवेर यह भारत में शामिल होगा। विश्लेषकों का मानना है कि PoK में बुनियादी सुविधाओं को लेकर उठ रही आवाजें और सीमा पार जम्मू-कश्मीर से हो रही तुलना पाकिस्तान सरकार और सेना के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच हाई कमीशनों को लेकर हुई यह ताज़ा तनातनी औपचारिक कूटनीतिक रिश्तों पर किस हद तक असर डालती है।
यह भी पढ़ें: दादरी में 2027 की सियासी हलचलः विधायक तेजपाल नागर को मिल रही अपनो से चुनौती

