Rahul Gandhi’s Prayagraj speech: सार, प्रयागराज में युवाओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने देश के युवाओं के ‘दर्द’, ‘डेटा’ (आंकड़े/रोजगार) और ‘दौलत’ (आर्थिक असमानता) के मुद्दों पर जोर दिया। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा कि राहुल गांधी को चुनावी राज्य/राजनीतिक माहौल के चलते झारखंड जाना चाहिए था।
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में देश के युवाओं को संबोधित करते हुए ‘दर्द, डेटा और दौलत’ के मुद्दे पर विस्तार से बात की। केपी ग्राउंड में हुए इस कार्यक्रम में छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की भारी भीड़ जुटी, जो जलभराव और कीचड़ भरे हालात के बावजूद कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे।
क्या बोले राहुल गांधी
मंच से छात्रों के साथ संवाद करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि इस शाम वे युवाओं से दर्द, डेटा और दौलत के बारे में बात करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के 40 करोड़ युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं और अमेरिका, चीन व रूस की बात तो खूब होती है, लेकिन भारत के युवाओं का कोई मुकाबला नहीं है। राहुल ने शिक्षा प्रमाणपत्रों की गिरती अहमियत पर भी चिंता जताई और कहा कि आज डिग्रियां नौकरी दिलाने में नाकाम साबित हो रही हैं, इसलिए उनका मूल्य खत्म हो गया है। कार्यक्रम से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कहा था कि सरकार तभी झुकती है जब आवाज़ें एकजुट होकर उठती हैं। उन्होंने दिल्ली में परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर आवाज़ उठाने वाले छात्रों पर बल प्रयोग का आरोप भी दोहराया और कहा कि इन मामलों में अब तक किसी को सज़ा नहीं मिली है। कांग्रेस ने इस मौके पर “जॉब नहीं मिलेगा तो सिंहासन हिलेगा” नारे के साथ एक प्रचार वीडियो भी जारी किया।
पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं पर केंद्रित रहा एजेंडा
‘छात्रों की गूंज’ अभियान की शुरुआत राजस्थान के कोटा से हुई थी, जिसके बाद यह उत्तराखंड के देहरादून होते हुए अब प्रयागराज पहुंचा। कांग्रेस ने इस कार्यक्रम को पेपर लीक, भर्तियों में देरी, बढ़ती शिक्षा लागत और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को उठाने के मंच के तौर पर प्रचारित किया। हाल के महीनों में झारखंड, दिल्ली और अन्य राज्यों में परीक्षा अनियमितताओं को लेकर छात्रों के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों ने जेन Z को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है, जिसके बाद विभिन्न राजनीतिक दलों ने युवा मतदाताओं तक पहुंच बढ़ा दी है। कार्यक्रम से एक दिन पहले प्रयागराज प्रशासन ने आयोजन स्थल की अनुमति वापस लेने की कोशिश की थी, जिस पर कांग्रेस महासचिव पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि चाहे कितनी भी बाधाएं आएं, राहुल गांधी पीछे नहीं हटेंगे। कार्यक्रम वाले दिन शहर में राहुल गांधी के खिलाफ झारखंड छात्र आंदोलन को लेकर आलोचनात्मक पोस्टर भी लगाए गए।
BJP का पलटवार: झारखंड जाना चाहिए था
BJP ने राहुल गांधी के प्रयागराज कार्यक्रम को झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित पेपर लीक को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन से जोड़ते हुए निशाना साधा। पार्टी का कहना है कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड सरकार में छात्रों का आंदोलन लंबे समय से चल रहा है, लेकिन राहुल गांधी वहां जाकर छात्रों से मिलने के बजाय उत्तर प्रदेश में कार्यक्रम कर रहे हैं। पहले भी BJP आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय झारखंड में चल रहे पेपर लीक विरोध पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल की चुप्पी पर सवाल उठा चुके हैं। इस आरोप पर पलटवार करते हुए उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि BJP को पहले अपने शासन वाले राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल और उत्तराखंड की स्थिति देखनी चाहिए, जबकि झारखंड में आयोग अध्यक्ष इस्तीफा दे चुके हैं, कई अधिकारी और लोग गिरफ्तार हो चुके हैं और सीआईडी जांच के आदेश दिए जा चुके हैं। राय ने यह भी दावा किया कि BJP सरकार राहुल गांधी के कार्यक्रम को बाधित करने के लिए शिक्षण संस्थानों पर दबाव बना रही है ताकि छात्र कार्यक्रम में न पहुंच सकें।
शिक्षा ढांचे को लेकर भी निशाना
अजय राय ने यह भी कहा कि देश में विश्वविद्यालयों, संस्थानों, अस्पतालों और मेडिकल-इंजीनियरिंग कॉलेजों समेत छात्रों के भविष्य की नींव कांग्रेस पार्टी ने रखी थी, लेकिन प्रयागराज की धरती पर हाल के वर्षों में कोई नया कॉलेज या विश्वविद्यालय नहीं बना, बल्कि मौजूदा संस्थानों के कई संकाय बंद हो रहे हैं और मेडिकल कॉलेजों की हालत बिगड़ गई है।
आगे क्या
राहुल गांधी के इस कार्यक्रम को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की युवा-केंद्रित रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी का कहना है कि रोजगार, परीक्षा प्रणाली और शिक्षा सुधार आगामी चुनावी अभियान के प्रमुख मुद्दे रहेंगे। वहीं BJP का कहना है कि कांग्रेस झारखंड जैसे गैर-BJP शासित राज्यों में छात्र आंदोलनों पर चुप्पी साधकर केवल राजनीतिक फायदे के लिए ऐसे कार्यक्रम कर रही है।
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