Ranchi Student Movement: रांची, झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर जैसा नजारा पेश कर रही है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब अपने छठे दिन में प्रवेश कर चुका है। इस बीच “कॉकरोच जनता पार्टी” (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने फोन पर आंदोलनकारी छात्रों से बात कर उन्हें अपना समर्थन देने का ऐलान किया है, जिसके बाद यह स्थानीय आंदोलन राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है।
कहां से शुरू हुआ आंदोलन
छात्रों का यह सत्याग्रह शुरुआत में रांची के मोरहाबादी मैदान में चल रहा था, लेकिन दुरंड कप के आयोजन और प्रशासनिक अनुमति न मिलने के कारण आंदोलन स्थल को मोरहाबादी मैदान से जयपाल सिंह स्टेडियम के समीप स्थानांतरित कर दिया गया। तब से छात्र लगातार जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे हुए हैं और मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं।
छात्रों की मुख्य मांगें
आंदोलनकारी छात्रों ने राज्य सरकार से अपील की है कि कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच JPSC परीक्षा रद्द की जाए और JSSC-CGL परीक्षा की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए। छात्रों की प्रमुख मांग है कि भर्ती प्रक्रियाओं में सामने आए कथित मामलों की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी, विशेषकर CBI से कराई जाए। इससे पहले 27 जुलाई को छात्रों ने राज्य की CID जांच पर सवाल उठाते हुए CBI जांच की मांग रखी थी। छात्रों का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ परीक्षा की नहीं बल्कि पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था बहाल करने की है, ताकि मेहनती और योग्य अभ्यर्थियों के साथ न्याय हो सके। भारी बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने रांची की सड़कों पर मार्च निकाला और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस्तीफे की मांग करते हुए चेतावनी दी कि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज होगा।
मशाल जुलूस और बढ़ता जनसमर्थन
आंदोलन को स्थानीय स्तर पर भी लगातार समर्थन मिल रहा है। हाल ही में सत्याग्रह के दौरान सैकड़ों छात्रों ने जयपाल सिंह स्टेडियम से फिरायालाल चौक तक मशाल जुलूस निकालकर राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्रों का कहना है कि यह केवल परीक्षा का मसला नहीं बल्कि झारखंड के युवाओं के भविष्य की लड़ाई है। इस दौरान आम लोगों ने भी छात्रों का साथ दिया और कई सामाजिक संगठनों ने भोजन व अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की, वहीं एक अन्य दिन रांची के स्थानीय लोगों ने आंदोलनकारी छात्रों को खिचड़ी परोसकर समर्थन जताया। आंदोलन के दौरान छात्रों ने प्रदर्शन स्थल पर तिरपाल लगाने की कोशिश की थी, लेकिन प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी, जिसके बाद छात्रों ने साफ कह दिया कि वे तेज धूप और बारिश की परवाह किए बिना आंदोलन जारी रखेंगे। कुछ छात्रों ने इस दौरान अपने आंदोलन को गैर-राजनीतिक बताते हुए एक स्वतंत्र मंच भी तैयार करने का फैसला लिया, ताकि इसे किसी दल से न जोड़ा जाए।
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके का समर्थन
इस बीच सबसे बड़ा घटनाक्रम रहा CJP प्रमुख अभिजीत दीपके का आंदोलन में सीधा हस्तक्षेप। CJP नेता अभिजीत दीपके ने आंदोलनरत छात्रों से फोन पर बात कर उनके समर्थन का ऐलान किया और कहा कि “CJP आपके साथ है।” गौरतलब है कि अभिजीत दीपके वही चेहरा हैं जिन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए 49 दिन लंबे छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया था, जो 25 जुलाई को सरकार के आश्वासनों और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद वापस लिया गया था। दिलचस्प यह है कि इससे पहले CJP की भूमिका को लेकर सवाल भी उठे थे। कुछ विश्लेषकों ने आरोप लगाया था कि परीक्षा अनियमितताओं को लेकर देशभर में मुखर रहने वाली CJP ने झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर लंबे समय तक चुप्पी साधे रखी, और जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन का समर्थन करने वाले विपक्षी दल भी झारखंड के मामले पर खामोश रहे। ऐसे में अब दीपके के सीधे फोन कर समर्थन देने को आंदोलन के लिए बड़ी राजनीतिक-सामाजिक बढ़त के तौर पर देखा जा रहा है। एक विश्लेषण में यह भी बताया गया कि CJP और रांची के छात्र आंदोलन के मुद्दे भले अलग हों, दोनों की जड़ में युवाओं का एक जैसा गुस्सा है। का सवाल देश की परीक्षा व्यवस्था को लेकर था, जबकि रांची के छात्रों का सवाल झारखंड की भर्ती व्यवस्था से जुड़ा है, लेकिन दोनों आंदोलनों की मनोवैज्ञानिक जड़ एक ही है मेहनत के बावजूद सिस्टम पर भरोसा न रहना।
राजनीतिक हलचल तेज
CJP के समर्थन के ऐलान के बाद यह आंदोलन अब स्थानीय से राष्ट्रीय मुद्दा बनता दिख रहा है। न्यूजट्रैक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, और अभिजीत दीपके के खुले समर्थन के बाद झारखंड का यह छात्र आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का मुख्य विषय बन गया है, और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे राज्य सरकार पर दबाव और बढ़ गया है। वहीं भाजपा ने भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है और पार्टी का कहना है कि परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी के लिए राज्य सरकार सीधे तौर पर जिम्मेदार है। इससे पहले एक छात्र ने भावुक अपील करते हुए मुख्यमंत्री से कहा था, “दिल्ली का जंतर-मंतर बनने मत दीजिए हेमंत सोरेन”, यह इशारा करते हुए कि यदि मांगें जल्द नहीं सुनी गईं तो रांची का आंदोलन भी दिल्ली जैसा लंबा खिंच सकता है और अब छठे दिन CJP के समर्थन के साथ यह आशंका सच होती दिख रही है। छात्रों ने साफ कर दिया है कि जब तक राज्य सरकार उनकी जायज मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लेती, उनका सत्याग्रह जारी रहेगा। आने वाले दिनों में यह आंदोलन झारखंड की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बनकर उभर सकता है।

