J&K Kulgam Terror Attack: श्रीनगर / रायपुर। बेहतर कमाई की उम्मीद लेकर छत्तीसगढ़ से जम्मू-कश्मीर पहुंचे दो प्रवासी मजदूर शुक्रवार देर रात दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकियों की गोलियों का शिकार हो गए। दोनों मजदूरों को पॉइंट-ब्लैंक रेंज से गोली मारी गई। एक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे की शनिवार सुबह अस्पताल में सांसें थम गईं। मारे गए मजदूरों की पहचान दीपक रात्रे (24) और भूपेंद्र भैना के रूप में हुई है। दीपक छत्तीसगढ़ के शक्ति जिले के बुंदेली गांव के रहने वाले थे, जबकि भूपेंद्र सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के चुइया गांव से थे। दोनों मजदूर कुलगाम के किलम (केलम) क्षेत्र में एक ईंट भट्ठे पर काम कर रहे थे।
पुलिस और सुरक्षा स्रोतों के अनुसार, शुक्रवार देर शाम आतंकियों ने भट्ठे पर पहुंचकर मजदूरों की पहचान पूछी और पुष्टि होने के बाद उन पर गोलियां दाग दीं। दीपक रात्रे मौके पर ही शहीद हो गए, जबकि भूपेंद्र भैना गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें पहले अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, फिर सर्जरी के बाद बेहतर इलाज के लिए श्रीनगर के एसकेआईएमएस रेफर किया गया। शनिवार सुबह उनकी भी मौत हो गई। इससे हमले में मौतों का आंकड़ा दो हो गया। यह हमला पिछले 21 महीनों में गैर-स्थानीय मजदूरों पर हुआ पहला बड़ा लक्षित आतंकी हमला माना जा रहा है। पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है।
बेहतर कमाई की आस में निकले थे दोनों
दोनों मजदूर छत्तीसगढ़ में स्थानीय मजदूरी से कुछ अधिक कमाने की उम्मीद लेकर कश्मीर आए थे। भूपेंद्र भैना के छोटे भाई अनुराग भैना ने बताया कि उनके भाई पिछले चार-पांच महीने से जम्मू-कश्मीर में काम कर रहे थे। “बाहर काम करने पर हमें रोजाना 150 से 250 रुपये ज्यादा मिल जाते हैं। हमारे माता-पिता बीमार हैं। हम कश्मीर जाकर अंतिम संस्कार भी नहीं कर सकते। अधिकारी बता रहे हैं कि अंतिम संस्कार जम्मू-कश्मीर में ही होगा,” अनुराग ने बताया। भूपेंद्र अपनी पत्नी और तीन साल के बेटे को छोड़ गए हैं। दीपक रात्रे परिवार के अकेले कमाने वाले थे। उनके चाचा हल्धार रात्रे ने बताया कि दीपक अपनी पत्नी के साथ सात-आठ महीने पहले ईंट भट्ठे पर काम करने कश्मीर गए थे। चार साल का बच्चा और नाबालिग बहन घर पर रह गई थी। दीपक के पिता की कम उम्र में मौत हो गई थी और छोटा भाई शारीरिक रूप से विकलांग है। अब परिवार में कमाने वाला कोई नहीं बचा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और सहायता
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हमले की निंदा करते हुए दोनों परिवारों को 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कोई मुआवजा उन परिवारों के नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता, जो ईमानदारी से रोजी-रोटी कमाने आए थे।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी दोनों मजदूरों की हत्या पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने इसे “कायराना आतंकी हमला” बताया और परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। राज्य सरकार की ओर से भी सहायता की घोषणा की गई है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पुलिस महानिदेशक और वरिष्ठ अधिकारियों से बात की है। हमले के बाद क्षेत्र में सुरक्षा बलों का बड़ा अभियान चल रहा है। आतंकियों की तलाश में कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन जारी है। यह घटना उन हजारों प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रही है, जो कश्मीर में बेहतर वेतन की तलाश में सालों से काम करते आ रहे हैं। परिवार अब न सिर्फ आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, बल्कि अपने प्रियजनों के अंतिम दर्शन तक नहीं कर पा रहे हैं।

