नोएडा प्राधिकरण के प्लानिंग विभाग में गड़बड़ियों की जांच, जीएम मीना भार्गव के कार्यकाल पर शासन की पैनी नजर

नोएडा। शहर के सुनियोजित विकास की जिम्मेदारी संभालने वाला नोएडा प्राधिकरण का प्लानिंग विभाग इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। विभाग में कथित अनियमितताओं, धांधली और नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सीधे शासन स्तर तक पहुंचने के बाद अब पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार, जांच का केंद्र बिंदु प्लानिंग विभाग की महाप्रबंधक (जीएम) मीना भार्गव का कार्यकाल है।

जानकारी के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा से नोएडा प्राधिकरण में स्थानांतरण के बाद मीना भार्गव के कार्यकाल में पास किए गए भवन नक्शों (बिल्डिंग प्लान) और जारी किए गए कंप्लीशन सर्टिफिकेट का विस्तृत ब्यौरा शासन ने मांगा है। शासन यह भी जांच कर रहा है कि इस अवधि में किन-किन मामलों में नियमों का पालन किया गया और कहीं किसी प्रकार की अनियमितता तो नहीं हुई।

कई गंभीर शिकायतें बनीं जांच का आधार

सूत्रों का दावा है कि शासन को भेजी गई शिकायतों में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें एक आवासीय भूखंड का नक्शा पहले स्वीकृत किए जाने और बाद में विभाग द्वारा निरस्त किए जाने का मामला शामिल है। वहीं एक बहुमंजिला इमारत में स्वीकृत मानचित्र से अधिक मंजिलों का नक्शा बिना अतिरिक्त शुल्क जमा कराए मंजूर किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इसके अलावा आईटी और कॉर्पोरेट परियोजनाओं के नक्शों, किसान कोटे के भूखंडों की प्लानिंग और अन्य नियोजन संबंधी मामलों में भी अनियमितताओं की शिकायतें शासन तक पहुंची हैं। इन सभी शिकायतों को जांच के दायरे में रखा गया है।

प्राधिकरण अधिकारियों को भी बाद में मिली जानकारी

बताया जा रहा है कि इन शिकायतों की जानकारी प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों को भी शुरुआत में नहीं थी, क्योंकि शिकायतें सीधे शासन स्तर पर भेजी गई थीं। हाल ही में जब शासन ने एक निश्चित अवधि के दौरान पास किए गए नक्शों और जारी किए गए कंप्लीशन सर्टिफिकेट का पूरा रिकॉर्ड तलब किया, तब प्राधिकरण अधिकारियों को इस जांच की जानकारी मिली।

एसीईओ सतीश पाल ने जांच की पुष्टि की

नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) सतीश पाल ने बताया कि शासन स्तर पर नियोजन विभाग से संबंधित जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण से एक निश्चित समयावधि के दौरान किए गए कार्यों का ब्यौरा मांगा गया है। हालांकि, जांच के दायरे और शिकायतों के संबंध में फिलहाल उनके पास इससे अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें

प्लानिंग विभाग किसी भी शहर के विकास की रीढ़ माना जाता है। ऐसे में यदि जांच में शिकायतें सही पाई जाती हैं तो यह मामला नोएडा प्राधिकरण के लिए बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बन सकता है। फिलहाल शासन द्वारा मांगे गए रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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