Floods wreak havoc across the country: नई दिल्ली/गुवाहाटी/भुवनेश्वर, मानसून की निरंतर भारी बारिश ने देश के कई राज्यों में बाढ़ का कहर बरपा दिया है। असम, ओडिशा और गुजरात सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। असम में बाढ़ से संबंधित मौतों का आंकड़ा 78 तक पहुंच गया है, जबकि सात जिलों में तीन लाख से अधिक लोग अभी भी प्रभावित हैं। ओडिशा में लगभग दो लाख लोग प्रभावित हुए हैं और करीब 30,000 लोग राहत शिविरों में हैं। गुजरात में भी हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है।
प्रभावित राज्यों का हाल
असम में सिवसागर, चराईदेव, जोरहाट, गोलाघाट समेत ऊपरी असम के जिलों में नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर रहा। सैकड़ों गांव जलमग्न हुए, फसलें बर्बाद हुईं और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई। पानी कुछ इलाकों में कम होने लगा है, लेकिन कई जगह अभी भी स्थिति गंभीर है। ओडिशा में भद्रक, बालासोर, जाजपुर समेत उत्तरी जिलों में बाढ़ का प्रकोप है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि लगभग दो लाख लोग प्रभावित हैं और 30,000 लोग राहत शिविरों में आवश्यक सहायता पा रहे हैं। छह एनडीआरएफ टीमें, ओडीआरएफ और फायर सर्विस तैनात हैं। कुछ जिलों में स्थिति में सुधार के संकेत हैं, लेकिन आईएमडी ने कुछ क्षेत्रों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी रखा है। गुजरात में लगातार बारिश के कारण नवसारी, वलसाड समेत जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने। करीब 38,000 लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए। सेना, एनडीआरएफ और कोस्ट गार्ड ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए। कुछ मौतें भी रिपोर्ट हुईं। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में लैंडस्लाइड, दिल्ली-एनसीआर में जलभराव और अन्य राज्यों में भी भारी बारिश के प्रभाव दिखे।
नेताओं की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम की स्थिति की लगातार समीक्षा की। उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल से बातचीत कर राहत-बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया। पीएम ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। संसद परिसर में असम के सांसदों से भी मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया। असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने राहत पैकेज की घोषणा की। मृतकों के परिवारों को मुआवजा बढ़ाने, प्रभावित परिवारों को अंतरिम सहायता (जैसे 15,000 रुपये) और छात्रों को किताब-यूनिफॉर्म सहायता देने का ऐलान किया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से राहत सामग्री के लिए योगदान मांगा। सभी असम विधायकों (कुछ विपक्षी को छोड़कर) ने एक महीने का वेतन बाढ़ राहत के लिए देने का वादा किया। ओडिशा में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और मंत्री सुरेश पुजारी ने राहत कार्यों की समीक्षा की। लोगों से घबराने न कहकर सरकार के साथ होने का आश्वासन दिया। गुजरात में सीएम भूपेंद्र पटेल ने अधिकारियों को सैनिटेशन और नुकसान आकलन के निर्देश दिए।
मदद के लिए कौन आगे आए
एनडीआरएफ, ओडीआरएफ, सेना, वायुसेना और कोस्ट गार्ड: बचाव और राहत सामग्री पहुंचाने में सक्रिय। असम में एयर फोर्स ने एयरलिफ्ट और एयरड्रॉप भी किया।
राज्य सरकारें: राहत शिविर, भोजन, चिकित्सा सुविधा और मुआवजा वितरण।
राजनीतिक दल और विधायक: बीजेपी विधायकों का वेतन योगदान, कुछ विपक्षी नेताओं द्वारा राहत सामग्री वितरण।
निजी क्षेत्र: एयर इंडिया एक्सप्रेस ने गुवाहाटी जाने वाली उड़ानों पर राहत सामग्री के लिए कार्गो चार्ज माफ किया।
स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवी संगठन: राहत वितरण केंद्र संचालित कर रहे हैं।
आगे के हालात कैसे होंगे?
मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार कुछ क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी है। ओडिशा के कुछ जिलों, छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश सीमा और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में और बारिश की संभावना है, जिससे स्थिति बिगड़ सकती है। असम में पानी कम होने के संकेत हैं, लेकिन पुनर्वास और फसल नुकसान का आकलन जारी रहेगा। गुजरात में पानी घटने के साथ सफाई और बहाली पर जोर दिया जा रहा है।सरकारें राहत शिविरों में सुविधाएं बढ़ाने, बिजली-सड़क बहाली और कृषि सहायता पर ध्यान दे रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की सक्रियता जारी रहने से सतर्क रहने की जरूरत है। प्रभावित परिवारों को सरकारी मदद और स्थानीय सहयोग से धीरे-धीरे राहत मिलने की उम्मीद है।

