Trump’s Forced Labor Tariffs on 60 Countries: ट्रंप ने 60 व्यापारिक साझेदारों पर जबरन मजदूरी (Forced Labor) टैरिफ लगाए, 10% वैश्विक टैरिफ समाप्त होने के साथ नई ड्यूटीज लागू

Trump’s Forced Labor Tariffs on 60 Countries: वाशिंगटन/नई दिल्ली, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने शुक्रवार को 60 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों पर नई टैरिफ (आयात शुल्क) लगा दिए। ये टैरिफ 10% और 12.5% के बीच हैं और Section 301 ऑफ द ट्रेड एक्ट 1974 के तहत जबरन मजदूरी (Forced Labor) से जुड़े आरोपों पर आधारित हैं। यह कदम ठीक उसी समय उठाया गया जब ट्रंप की अस्थायी 10% वैश्विक टैरिफ 150 दिनों बाद समाप्त हो गई।

यह नया कदम ट्रंप प्रशासन की व्यापक संरक्षणवादी नीति का हिस्सा है, जिसका मकसद अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करना और वैश्विक सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी को रोकना है। USTR (यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव) जैमिसन ग्रीर ने कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका लगभग एक सदी से Forced Labor आयात पर प्रतिबंध लगाए हुए है और इसे सख्ती से लागू करता है। अब हमारे व्यापारिक साझेदारों को भी यही करना चाहिए।”

कौन-कौन से देश प्रभावित?

10% टैरिफ: अर्जेंटीना, बांग्लादेश, ब्रिटेन, कंबोडिया, कनाडा, इक्वाडोर, एल साल्वाडोर, ग्वाटेमाला, होंडुरास, भारत, इंडोनेशिया, जॉर्डन, मलेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान, श्रीलंका, त्रिनिदाद एंड टोबैगो आदि।
10% या 12.5% (प्री-एग्जिस्टिंग टैरिफ के साथ): यूरोपीय संघ (EU), ताइवान, जापान, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड।
12.5% टैरिफ: वियतनाम, चीन (उइघुर मुसलमानों के कैंपों का आरोप, जिसे बीजिंग खारिज करता है) समेत बाकी 38 देश।

ये नए टैरिफ अमेरिका के कुल आयात का 99.4% कवर करते हैं, लेकिन तेल-गैस, फर्टिलाइजर, कुछ खाद्य पदार्थ, विमान पार्ट्स, क्रिटिकल मिनरल्स और USMCA (अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा) समझौते के तहत कुछ सामान इससे मुक्त हैं।

पृष्ठभूमि

यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप की पुरानी “रिसिप्रोकल” टैरिफ नीति को रद्द करने के बाद आई है। प्रशासन अब Section 301 का इस्तेमाल करके टैरिफ फ्लोर बनाए रखना चाहता है, जो कानूनी रूप से ज्यादा मजबूत माना जा रहा है। जून 2026 में प्रस्तावित किए गए इन टैरिफ को अब अंतिम रूप दे दिया गया है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं

EU: विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने इसे “शॉक” बताया और कहा कि यूरोप के लेबर लॉ अमेरिका से बेहतर हैं। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील: टैरिफ को “अन्यायपूर्ण” करार दिया और हटाने की मांग की।
चीन: पहले से ही ट्रंप काल के टैरिफ का सामना कर रहा है; नई ड्यूटीज के साथ कुल प्रभाव 20% तक पहुंच सकता है। कई देशों ने इसे राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताया, जबकि अमेरिकी अधिकारी इसे मानवाधिकार और निष्पक्ष व्यापार का मुद्दा बता रहे हैं।

भारत पर क्या असर?

भारत को 10% टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। यह भारतीय निर्यातकों, खासकर टेक्सटाइल, फार्मा और आईटी हार्डवेयर क्षेत्र के लिए चुनौती पैदा कर सकता है। हालांकि, कुछ उत्पाद एग्जेम्प्ट हैं। भारत सरकार इस पर नजर रख रही है और द्विपक्षीय बातचीत से राहत की कोशिश कर सकती है।

अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव

विश्लेषकों का कहना है कि ये टैरिफ अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ा सकते हैं, लेकिन ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इससे अमेरिकी वर्कर्स को फायदा होगा और Forced Labor की प्रैक्टिस कम होगी। कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित करेगा और मुद्रास्फीति बढ़ा सकता है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये ड्यूटीज स्थायी नहीं हैं और जिन देशों ने Forced Labor पर सख्त कदम उठाए, उन्हें राहत मिल सकती है। स्थिति तेजी से बदल रही है—दोनों पक्ष आगे की बातचीत और संभावित रिटेलिएशन की तैयारी कर रहे हैं।

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