A female journalist was attacked by a mob: दिल्ली, राजधानी दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से जारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो’ आंदोलन की कवरेज के दौरान एक और महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी और मारपीट का मामला सामने आया है। पत्रकार ने अपनी आपबीती में बताया कि किस तरह उग्र भीड़ ने उन्हें और उनके कैमरापर्सन को घंटों घेरे रखा, रास्ता नहीं दिया, गाड़ी में तोड़फोड़ की और मौका मिलते ही छेड़छाड़ की कोशिश भी की। पत्रकार के मुताबिक, जब भीड़ किसी भी तरह पीछे हटने को तैयार नहीं थी, तो उन्होंने और उनके कैमरामैन ने खुद आगे बढ़ने का फैसला किया। सख्ती से रास्ता माँगने पर भी भीड़ ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया और आगे-पीछे कहीं से निकलने नहीं दिया। इस दौरान उनके कैमरापर्सन लोकेश ठाकुर ने उन्हें बचाने और वहाँ से निकालने की पूरी कोशिश की। टीम को अपनी गाड़ी तक पहुँचने के लिए करीब दो किलोमीटर तक पैदल घूमकर भीड़ से बचना पड़ा।
“कोर टीम ने कहा है, इन्हें मारो” — भीड़ में से आती रहीं धमकियाँ
पत्रकार ने बताया कि भीड़ में शामिल कुछ लोग पीछे से आवाजें लगा रहे थे कि आयोजन की ‘कोर टीम’ के निर्देश पर उन्हें निशाना बनाया जाए। इसी दौरान भीड़ में से कई हाथ बार-बार उनकी तरफ बढ़े — कभी जांघ खींचने की कोशिश हुई, कभी शरीर के अन्य हिस्सों को छूने की। पत्रकार के अनुसार वे चेहरे पहचान नहीं पा रही थीं, सिर्फ हाथों को झटक कर खुद को बचाने की कोशिश कर रही थीं। एक पत्रकार होने के नाते हिम्मत से डटे रहना जरूरी लगा, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी सामान्य महिला के लिए इस तरह की भीड़ के सामने डटे रहना आसान नहीं होता।
गाड़ी को घेरकर पीटा, शीशे तोड़े, पत्थर बरसाए
किसी तरह अपनी गाड़ी तक पहुँचने के बाद भी पत्रकार और उनकी टीम को राहत नहीं मिली। भीड़ ने गाड़ी को चारों तरफ से घेरकर जोर-जोर से पीटना शुरू कर दिया, जिससे गाड़ी का अगला शीशा क्रैक हो गया, साइड मिरर टूट गया और पूरी बॉडी पर डेंट आ गए। पत्रकार जब गाड़ी से उतरकर सवाल पूछने गईं, तो भीड़ ने अभद्र गालियाँ दीं और अश्लील इशारे करने लगी। गाड़ी को जबरन वहाँ से निकालते वक्त भीड़ ने पीछे से पत्थर बरसाए, जिससे गाड़ी के बाकी शीशे भी टूट गए। टीम रॉन्ग साइड से गाड़ी निकालकर किसी तरह मिंटो ब्रिज के पास पहुँची, जहाँ पुलिस को 112 नंबर पर कॉल किया गया और मौके पर पहुँचीं SI रीना ने उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई।
अकेली घटना नहीं — 20-21 जुलाई को भी कई पत्रकार बने निशाना
यह वाकया किसी अकेले मामले तक सीमित नहीं है। 20 जुलाई को जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में हुए ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान कई और मीडियाकर्मियों के साथ भी बदसलूकी की खबरें सामने आई थीं। रिपोर्टों के अनुसार, टाइम्स नाऊ के एक रिपोर्टर की भीड़ ने बुरी तरह पिटाई की, उनकी शर्ट फाड़ दी गई और चश्मा तोड़कर उसी से चेहरे पर वार किया गया। कई अन्य पत्रकारों को भी ‘गोदी मीडिया’ कहकर घेरा गया, धक्का-मुक्की की गई और मीडिया की गाड़ियों पर पथराव किया गया। इन घटनाओं की जानकारी देने वाली रिपोर्टों के मुताबिक कुछ अन्य महिला पत्रकारों के साथ भी खींचतान और बदसलूकी हुई, जिनकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। एक अन्य वरिष्ठ महिला पत्रकार को तो जान का खतरा भांपते हुए पास के एक बैंक में शरण लेनी पड़ी थी, जहाँ बैंक कर्मचारियों के मुताबिक करीब एक हजार से ज्यादा की भीड़ पीछे लगी हुई थी। इसके अलावा पटना में भी छात्र आंदोलन की आड़ में हुए प्रदर्शन के दौरान एक वरिष्ठ पत्रकार पर हमला होने और गंभीर रूप से घायल होने की खबर सामने आई है।
एडिटर्स गिल्ड की चुप्पी पर सवाल
पत्रकारों पर लगातार हो रहे इन हमलों के बावजूद मीडिया की स्वतंत्रता की पैरोकार मानी जाने वाली संस्था एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की तरफ से अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिस पर मीडिया जगत के एक हिस्से में नाराजगी और सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा को देखते हुए एहतियाती कदम उठाने की बात कही है, हालांकि पत्रकारों पर हुए हमलों को लेकर अलग से कोई औपचारिक बयान अभी सामने नहीं आया है। पत्रकार सुरक्षा से जुड़े इन मामलों में अब तक किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। मामले पर आगे की जानकारी अपडेट होते ही दी जाएगी। यह रिपोर्ट एक पत्रकार की आपबीती (वीडियो बयान) और उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। घटनास्थल पर मौजूद पत्रकार की पहचान सार्वजनिक स्रोत में स्पष्ट रूप से सत्यापित न होने के कारण नाम का उल्लेख नहीं किया गया है।

