NEET paper leak protests: संसदीय अराजकता और सड़क पर युवा आक्रोश, कल्याण बनर्जी सस्पेंड, CJI ने CJP प्रदर्शनकारियों की याचिका पर कहा- ‘वीडियो देखने का समय नहीं’

NEET paper leak protests: नई दिल्ली, संसद के मानसून सत्र के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। एक ओर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी को दो बागी महिला सांसदों के खिलाफ कथित अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने पर पूरे सत्र के लिए लोकसभा से निलंबित कर दिया गया, वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर दायर याचिका पर मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने सख्त रुख अपनाया।

कल्याण बनर्जी पर सस्पेंशन की कार्रवाई

टीएमसी के कल्याण बनर्जी, जो पार्टी के लोकसभा चीफ व्हिप भी हैं, को राष्ट्रवादी नागरिक पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) से जुड़ी दो पूर्व टीएमसी महिला सांसदों सताब्दी रॉय और मिताली बाग की शिकायत पर सस्पेंड किया गया। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लिखित शिकायत में इन सांसदों ने आरोप लगाया कि बनर्जी ने उनके खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग किया। सस्पेंशन के बाद बनर्जी को सदन परिसर में प्रवेश करने से भी रोक दिया गया। बाद में टीएमसी सांसदों के साथ वे स्पीकर से मिले। यह घटना टीएमसी के भीतर चल रहे विद्रोह की पृष्ठभूमि में हुई है, जहां पहले भी बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बनर्जी पर महिलाओं के प्रति मिसोजिनिस्टिक (महिला-विरोधी) व्यवहार का आरोप लगाते हुए उन्हें सदन से निकालने की मांग की थी।

CJI का सख्त रुख: CJP प्रदर्शन पर याचिका खारिज

इसी दिन सुप्रीम कोर्ट में CJP प्रदर्शनकारियों पर जंतर-मंतर पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर एक याचिका का उल्लेख किया गया। CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने वकील की दलीलों को सुनने से इनकार कर दिया। वकील ने बताया कि छात्र NEET परीक्षा में पेपर लीक, बेरोजगारी और परीक्षा सुधार की मांग कर रहे हैं तथा पुलिस ने लाठीचार्ज, पानी की बौछार और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। CJI ने कहा, “Don’t waste our time… We are not interested in videos. We don’t have time to watch.” उन्होंने याचिका को तुरंत सुनने से इनकार करते हुए कहा कि कोर्ट का समय बर्बाद न करें। CJP ने 20 जुलाई को ‘चलो संसद मार्च’ का आह्वान किया था। हजारों युवा मेट्रो बंद, इंटरनेट प्रतिबंध और परिवहन व्यवस्था की रुकावटों के बावजूद जंतर-मंतर पहुंचे। पुलिस ने मार्च रोकने के लिए बल प्रयोग किया, जिसमें कई युवा घायल हुए। प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई को “बर्बरता” बता रहे हैं और घायल होने के बावजूद साइट पर डटे हुए हैं। मुद्दे शिक्षा सुधार, पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जुड़े हैं।

पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ

CJP आंदोलन CJI सूर्य कांत के पहले के एक बयान से प्रेरित माना जाता है, जिसमें कुछ बेरोजगार युवाओं को “कॉकरोच” कहा गया था। यह आंदोलन अब NEET-G और अन्य परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ एक बड़ा युवा विरोध बन चुका है। विपक्षी दलों ने भी इसका समर्थन किया है, जबकि सरकार ने इसे राजनीतिक साजिश बताया है। संसद में भी NEET मुद्दे पर हंगामा हो रहा है। विपक्ष ने प्रधान के इस्तीफे की मांग की है, जबकि सरकार चर्चा के लिए तैयार है लेकिन इस्तीफे से इनकार कर रही है। इन घटनाओं से संसदीय गरिमा और युवा असंतोष दोनों पर सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ सदन में व्यक्तिगत हमले, दूसरी तरफ सड़क पर युवाओं की आवाज को दबाने के आरोप। क्या यह लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है या बढ़ते विभाजन का? देश की नजरें अब आगे की घटनाओं पर टिकी हैं।

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