Tukaram Mundhe IAS: 25 ट्रांसफर, 20 साल में ‘सिंघम’ तुकाराम मुंधे: मुंबई के रेस्टोरेंट्स की नींद उड़ाने वाला IAS अधिकारी, FDA में सख्ती की धूम

Tukaram Mundhe IAS: मुंबई, महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) आयुक्त तुकाराम मुंधे इन दिनों मुंबई के रेस्टोरेंट मालिकों और खाद्य व्यवसायियों के बीच चर्चा के केंद्र बने हुए हैं। मात्र दो महीने में 1,131 निरीक्षण, 49.57 करोड़ रुपये मूल्य की भेसड़ित सामग्री जब्त, 56 रेस्टोरेंट्स के लाइसेंस सस्पेंड और gutkha माफिया पर MCOCA लगाने जैसी कार्रवाइयों ने उन्हें ‘मुंबई के रेस्टोरेंट्स का डर’ बना दिया है। तुकाराम मुंधे, 2005 बैच के IAS अधिकारी, बीड जिले के तड़सोन्ना गांव के किसान पुत्र हैं। Zilla Parishad स्कूल में पढ़ाई, खेतों में काम और ईमानदार पिता से मिली सादगी उनकी पहचान है। 20 साल की सेवा में यह उनकी 25वीं पोस्टिंग है, जिसके बावजूद वे नियमों की सख्ती और सरप्राइज इंस्पेक्शन के लिए मशहूर रहे हैं।

FDA में तूफानी शुरुआत

25 मई 2026 को FDA कमिश्नर का चार्ज संभालते ही मुंधे ने साफ संदेश दिया: “जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों पर कोई नरमी नहीं।” नतीजा? राज्यभर में औसतन 20 से ज्यादा दैनिक छापे। 1.6 लाख लीटर भेसड़ित दूध समेत करोड़ों की जब्ती। Noor Mohammadi, K Rustom & Co., Shalimar, Parsi Dairy Farm (110 साल पुराना) और Waarsa-Flint जैसे iconic नामों पर कार्रवाई ने सुर्खियां बटोरीं। मुंबई के BKC स्थित FDA मुख्यालय में अब रोजाना शिकायतकर्ता और रेस्टोरेंट मालिक लाइन लगाते हैं। ग्राउंड फ्लोर पर शिकायत सेल सक्रिय है, जहां सोशल मीडिया से लेकर पत्रों तक हर शिकायत पर तुरंत एक्शन लिया जा रहा है। लैब टेस्टिंग दोगुनी हो गई है और प्रेस नोट्स, फोटो-वीडियो के साथ रोजाना अपडेट जारी हो रहे हैं।

‘सिंघम’ की विरासत: ट्रांसफर तो ट्रांसफर

मुंधे की कहानी सिर्फ FDA तक सीमित नहीं। Solapur कलेक्टर के रूप में ‘जलयुक्त शिवार’ से सैकड़ों गांवों को टैंकर-मुक्त बनाकर ‘महाराष्ट्र का वॉटरमैन’ कहलाए। Navi Mumbai Municipal Commissioner के तौर पर डेमोलिशन ड्राइव, प्रॉपर्टी टैक्स वसूली और ‘वॉक विद कमिश्नर’ जैसी पहलें कीं। Health Commissioner रहते अस्पतालों में सरप्राइज चेकिंग और बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू किया। हर पोस्टिंग में सख्ती के कारण राजनीतिक असंतोष और ट्रांसफर का सिलसिला चला। आलोचक उन्हें ‘अप्रत्याशित’ और ‘स्टेकहोल्डर्स को साथ न लेने’ का आरोप लगाते हैं, जबकि समर्थक ईमानदारी और जनहित की बात करते हैं। “कोई उनकी नीयत पर सवाल नहीं उठाता, बहस हमेशा तरीके पर होती है,” एक पूर्व सहयोगी ने कहा।

रेस्टोरेंट इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया

कई रेस्टोरेंट मालिक स्वीकार करते हैं कि सफाई और मानकों की जरूरत थी, लेकिन iconic जगहों पर फोकस और ‘परफेक्शन’ का बेंचमार्क चिंता पैदा कर रहा है। एक मालिक ने कहा, “कोई न कोई लैप्स तो मिल ही जाएगा। हम बस उम्मीद कर रहे हैं कि वे न आएं।” दूसरी ओर, छोटे वेंडर्स और पान शॉप मालिक MCOCA जैसे सख्त कानूनों के दुरुपयोग का आरोप लगा रहे हैं। FDA अधिकारियों के मुताबिक, नई SOPs, बढ़ी हुई मैनपावर और मजबूत प्रशासनिक समर्थन से यह ड्राइव संभव हुई है। मुंधे सुबह 9:40 से शाम 6:15 तक ऑफिस में रहते हैं और टीम को तेज गति से काम करने के लिए प्रेरित करते हैं।

क्या कहते हैं राजनीतिक गलियारे?

NCP (शरद पवार) विधायक जितेंद्र आव्हाड जैसे नेताओं ने ड्रग लॉबी और 250 करोड़ के सुपारी का आरोप लगाया, लेकिन मंत्री नरहरि जिरवाल ने मुंधे के काम की सराहना की और ट्रांसफर से इनकार किया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार में मुंधे को FDA जैसे महत्वपूर्ण विभाग में भेजना सख्ती का संकेत माना जा रहा है। तुकाराम मुंधे साक्षात्कार देने से बचते हैं, लेकिन उनके काम बोलते हैं। आलोचना हो या प्रशंसा, एक बात तय है महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा और ईमानदार प्रशासन की बहस अब उनके नाम से जुड़ गई है। क्या यह ड्राइव लंबे समय तक टिकेगी या फिर ट्रांसफर की लिस्ट बढ़ेगी? समय बताएगा।

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